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Health Alert: खतरे में हेल्दी इंडिया का सपना? करोड़ों बच्चों पर मंडरा रहा है जानलेवा बीमारियों का खतरा

Sun, 22 Mar 2026 07:55 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बचपन के मोटापे के मामले 2040 तक बढ़कर 56 मिलियन तक पहुंचने की आशंका है , जो 2025 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि है। 
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भारतीय बच्चों में मोटापे का खतरा - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार
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क्रॉनिक बीमारियां भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। जिस गति से भारत में डायबिटीज, हृदय रोग, हाइपरटेंशन और कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स से साफ होता है कि लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के चलते एक दशक पहले की तुलना में अब इन बीमारियों का बोझ काफी बढ़ गया है। 

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साल 2024 के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि भारत में 9 से 10 करोड़ वयस्क डायबिटीज के साथ जी रहे हैं, जो जनसंख्या का लगभग 10% है। यही आंकड़े भारत को दुनिया का डायबिटीज कैपिटल बना रहे हैं। डायबिटीज के साथ भारतीय आबादी में बढ़ता मोटापा भी गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है।

विशेषतौर पर बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर विशेषज्ञ काफी चिंतित है। मोटापे के शिकार बच्चों में भविष्य में गंभीर क्रॉनिक रोगों का जोखिम अधिक होता है, जो अगले दो-तीन दशकों में भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा करने वाला हो सकता है।
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हाल ही में जारी 'वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5 से 19 की आयु वाले 41 मिलियन (4.1 करोड़) बच्चे हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के साथ जी रहे हैं, जिनपर भविष्य में जानलेवा रोगों का खतरा मंडरा रहा है।

बच्चों में अधिक वजन की समस्या - फोटो : Adobe Stock
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 की रिपोर्ट बढ़ा रही टेंशन

भारत सरकार हेल्दी इंडिया के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है, हालांकि हालिया रिपोर्ट इस लक्ष्य के लिए बड़ी चुनौतियां पेश कर रही है। 
 
  • वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार भारत अब अधिक वजन से प्रभावित बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। 
  • 5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 1.4 बच्चे बच्चे मोटापे से भी ग्रस्त पाए गए। 
  • साल 2010 और 2025 के बीच, 5-19 वर्ष की आयु के बच्चों में हाई बीएमआई और मोटापे की दर में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जो उनमें गंभीर क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ाती जा रही है। 
  • इस आधार पर विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि साल 2040 तक इस आयु के बच्चों में हाई बीएमआई के कारण बीमारियों के जोखिम में भी काफी वृद्धि होने की आशंका है।

बच्चों की सेहत पर मंडराता खतरा - फोटो : Freepik.com
शुगर से लेकर दिल की बीमारियों तक का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि बच्चों में मोटापा सिर्फ आज के लिए खतरनाक नहीं है बल्कि भविष्य के लिए भी एक बड़ी मुसीबत है। ये बच्चे जब 30-40 की उम्र तक पहुंचेंगे तो मोटापे के कारण उनमें डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना अधिक हो सकता है।

ऐसे में साल 2040 तक भारत में हाई बीएमआई के कारण बच्चों में बीमारियों का खतरा काफी बढ़ने का अनुमान है। 
 
  • हाई ब्लड प्रेशर के मामलों के 29 लाख से बढ़कर 42 लाख होने की उम्मीद है।
  • हाई ब्लड शुगर, डायबिटीज के मामले 13.9 लाख से बढ़कर 19.1 लाख होने की उम्मीद है।
  • हाई ट्राइग्लिसराइड्स के मामले 43.9 लाख से बढ़कर 60.7 लाख होने की आशंका जताई गई है।
  • मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) के मामले 83.9 लाथ से बढ़कर 1.18 करोड़ तक जा सकते हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ सकता है अतिरिक्त बोझ - फोटो : Freepik.com
2040 तक स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ सकता है अतिरिक्त दबाव

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों के मोटापे के मामले 2040 तक बढ़कर 56 मिलियन (5.6 करोड़) तक पहुंचने की आशंका है, जो 2025 के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इन 5.6 करोड़ बच्चों में से, देश में लगभग 2 करोड़ बच्चे मोटापा जबकि बाकी 3.6 करोड़ बच्चों में अधिक वजन होने का खतरा हो सकता है।

वहीं वैश्विक स्तर पर मोटापे या अधिक वजन की समस्या से जूझ रहे 5-19 साल के बच्चों की संख्या साल 2025 के 41.9 करोड़ से बढ़कर 2040 तक 50.7 करोड़ से अधिक हो जाने की आशंका जताई गई है। 
 
  • एक अन्य रिपोर्ट, 'चिल्ड्रन इन इंडिया 2025' में भारत के बच्चों में हाई ट्राइग्लिसराइड्स (खून में बहुत ज्यादा फैट) को लेकर भी चिंता जताई गई है। 5-9 साल के एक-तिहाई से ज्यादा भारतीय बच्चों में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर ज्यादा पाया गया है, जो सीधे तौर पर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है।
  • हाई ट्राइग्लिसराइड्स से दिल की बीमारी के साथ टाइप 2 डायबिटीज, फैटी लिवर और पैंक्रियाटाइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है। मसलन भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर अगले कुछ वर्षों में मोटापा जनित रोगों का बोझ काफी बढ़ने वाला है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि इन जोखिमों को कम करने के लिए बच्चों के वजन को कंट्रोल करना जरूरी है। जंक फूड्स से दूरी और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर जोखिमों को कम किया जा सकता है।




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स्रोत:
Childhood obesity is rising


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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