मानसिक स्वास्थ्य विकार
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छात्रों में बढ़ रही है मानसिक स्वास्थ्य की समस्या
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं, कॉलेज एडमिशन, अंक प्राप्त करने की दौड़ और माता-पिता की अपेक्षाओं का बोझ उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ रहा है। कई बार उन्हें लगता है कि अगर वे सफल नहीं हुए तो उनकी पहचान और अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। इस तरह की सोच एंग्जाइटी, डिप्रेशन और पैनिक अटैक जैसी समस्याओं का कारण बनती जा रही है।
मनोचिकित्सकों ने अलर्ट किया है कि शैक्षणिक दबाव से जूझने से लेकर अकेलेपन का सामना करने तक, बड़ी संख्या में देश में कॉलेज के छात्र चुपचाप बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट की चपेट में आ रहे हैं।
छात्रों में स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्या
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छात्रों में चिंता-अवसाद की समस्या
बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, विशेषकर छात्रों के बीच बढ़ते इसके खतरे को समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने देश के विभिन्न शहरों में सर्वे किया जिसमें युवा-वयस्कों में चिंता, अवसाद और भावनात्मक संकट के बढ़ते मामलों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के छात्र अन्य शहरों के छात्रों की तुलना में अवसाद से अधिक प्रभावित हैं।
एशियन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित ये शोध जुलाई से नवंबर 2023 के बीच किया गया था। ये शोध एसआरएम विश्वविद्यालय एपी, अमरावती में मनोविज्ञान विभाग द्वारा संचालित किया गया। इसमें आठ टियर-1 शहरों हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता और दिल्ली में 18-29 वर्ष की आयु के 1,628 छात्रों का सर्वेक्षण किया। प्रतिभागियों में से 47.1% पुरुष और 52.9% महिलाएं थीं।
अध्ययन के निष्कर्ष एक स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। लगभग 70% छात्रों में मध्यम से उच्च स्तर की चिंता की दिक्कत देखी गई, 60% में अवसाद के लक्षण दिखाई दिए वहीं 70% से अधिक ने अत्यधिक तनाव के अनुभव के बारे में बताया। लगभग एक तिहाई ने बताया कि वह कमजोर भावनात्मक संबंधों से परेशान हैं, 14.6% में जीवन से संतुष्टि कम थी और लगभग 8% में समग्र मानसिक स्वास्थ्य खराब देखा गया।
तनाव, स्ट्रेस का समय पर निदान जरूरी
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समय पर लक्षणों की पहचान
अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि पुरुष छात्रों की तुलना में महिलाओं में तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को दिक्कत अधिक थी।
पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों के छात्रों ने अधिक सकारात्मकता और बेहतर स्वास्थ्य की सूचना दी, जबकि कोलकाता के छात्रों में कम सकारात्मकता लेकिन अपेक्षाकृत बेहतर मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का प्रदर्शन किया।
अध्ययन के प्रमुख लेखक के.सुरेश कहते हैं, हमारे निष्कर्ष युवा वयस्कों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली स्वास्थ्य नीतियों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं, विशेष रूप से रोग के शीघ्र पहचान और समय रहते इसमें चिकित्सकीय मदद की आवश्यकता है।
मेंटल हेल्थ की समस्या और इसका निदान
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉ ओम प्रकाश कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याएं काफी चिंताजनक हैं जिसको लेकर सभी उम्र के लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। अवसाद, तनाव या चिंता के लक्षण दिखाने वाले युवाओं को तत्काल परामर्श की आवश्यकता होती है। टेली-मानस (14416) जैसे उपकरण प्रारंभिक सहायता प्रदान करके, छात्रों को अपनी समस्याओं को व्यक्त करने में मदद करने और शीघ्र जांच करवाने में सहायता कर रहे हैं।
इसके अलावा, परिवार और समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है। अक्सर स्ट्रेस या एंग्जाइटी झेल रहे युवा खुलकर बात नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें डर होता है कि कहीं लोग उन्हें कमजोर न समझें। यही चुप्पी धीरे-धीरे गंभीर मानसिक समस्याओं का रूप ले लेती है।
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स्रोत
Mental health of young adults pursuing higher education in Tier-1 cities of India: A cross-sectional study
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