खान-पान में गड़बड़ी और कैंसर का खतरा
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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स बढ़ा रहे हैं कैंसर का खतरा
फेफड़ों के कैंसर को सामान्यत: उन लोगों से जोड़ा जाता था जो वर्षों से धूम्रपान करते आ रहे हैं, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। अब यह जानलेवा बीमारी सिर्फ बुजुर्गों या अधिक धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रही है, अब ये कैंसर तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया।
इसी से संबंधित एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि जो लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (यूपीएफ) का सेवन अधिक करते हैं उनमें लंग्स कैंसर विकसित होने का खतरा 40 फीसदी तक अधिक हो सकता है। खान-पान में इस गड़बड़ी को पहले से ही कई प्रकार की गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाला माना जाता रहा है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स होते क्या हैं?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स औद्योगिक रूप से तैयार किए जाते हैं, इनमें ऐसे मिश्रण होते हैं जो खाद्य पदार्थों से निकाले गए या उनसे प्राप्त सामग्री से बनाए जाते हैं। इस तरह के खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों, स्वादों और प्रिजर्वेटिव्स जैसे पदार्थों की अधिकता होती है जो शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं।
पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ, फ्रोजन खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड मीट आदि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स हैं जिनका सेवन कम से कम करने की सलाह दी जाती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अध्ययनों से पता चलता है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स के अधिक या नियमित सेवन से व्यक्ति को कई प्रकार के कैंसर का खतरा हो सकता है। थोरैक्स जर्नल में प्रकाशित शोध में पाया गया कि यूपीएफ का अधिक सेवन नॉन-स्मॉल सेल (एनएससीएलसी) और स्मॉल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी) दोनों के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
कैलिफोर्निया स्थित मेमोरियलकेयर टॉड कैंसर इंस्टीट्यूट में हेमेटोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट नीलेश वोरा बताते हैं, जो लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन अधिक करते हैं उनमें फलों, सब्जियों और साबुत अनाज जैसी चीजों का सेवन भी कम देखा गया, इससे व्यक्ति में कई प्रकार के कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है।
फेफड़ों की बीमारी को न करें अनदेखा
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इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 50,187 पुरुष और 51,545 महिलाओं के डेटा को शामिल किया। प्रतिभागियों की शुरुआत में औसत आयु 62.5 वर्ष थी। शोध में पाया गया कि जो लोग अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स अधिक खाते थे उनमें लंग्स कैंसर का जोखिम 40% से अधिक था। असल में इस प्रकार के खाद्य पदार्थों में अक्सर संतृप्त वसा, नमक और चीनी की मात्रा अधिक होती है और जब हम इन्हें खाते हैं, तो हमारे आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों के लिए जगह कम बचती है। इसके अलावा रसायन और प्रिजर्वेटिव्स समय के साथ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
शुरुआती संकेतों को न करें अनदेखा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फेफड़ों के कैंसर के मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि युवाओं में इसके लक्षणों को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार खांसी, थकान, सांस फूलना या हल्का सीने में दर्द लंबे समय तक बना रहता है तो इसे अनदेखा न करें। इन संकेतों को लोग अक्सर मामूली सर्दी-खांसी या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, हालांकि ये गंभीर रूप ले सकता है।
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स्रोत
Association between ultra-processed food consumption and lung cancer risk
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