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देखिए आपके शहर में कहां-कहां मिलता है 'मां का दूध', पूरी लिस्ट यहां देख लें

Thu, 02 Aug 2018 11:21 AM IST
मंजू ममगाईं
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पहली बार जब कोई मां अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए उसे अपनी छाती से लगाती है तो उस समय उसे जो सुख की अनुभूति होती है उसे उसके अलावा कोई और महसूस नहीं कर सकता। मां का दूध न सिर्फ बच्चे के लिए अमृत समान है बल्कि यह मां और बच्चे के बीच में एक मजबूत भावनात्मक रिश्ता भी कायम करता है। नवजातों के लिए इसे 'सुपर फूड' कहें तो ये कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

बावजूद इसके कई बार स्वस्थ्य कारण, बच्चे के लिए पर्याप्त दूध न होने पर या फिर किसी खास वजह के चलते कई ऐसे बच्चे होते हैं जो इस अमृत से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में इन शिशुओं की मदद करते हैं शहरों में मौजूद 'मदर मिल्क बैंक'। लेकिन जानकारी के अभाव में माताएं इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाती हैं। तो चलिए देर किस बात की आपको बताते हैं भारत में मौजूद ऐसे नामी 'मदर मिल्क बैंक' के बारे में जो आपके शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए उसे पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देते।   
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डॉक्टर अर्चना धवन बजाज,स्त्रीरोग विशेषज्ञ,The Nurture IVF की मानें तो मां का दूध बच्चे के लिए बेहद फायदेमंद होता है। लेकिन कई बच्चे इसका लाभ नहीं उठा पाते। जिसकी वजह से माताओं को मजबूरी में 'फॉर्मूला मिल्क' का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह मां के दूध का एक विकल्प तो जरूर होता है लेकिन उसके दूध की बराबरी नहीं कर सकता। डॉक्टर की मानें तो भारत में शिशु मौत की मुख्य वजह संक्रमण और कम वजन के बच्चों का पैदा होना है। मां के दूध से वंचित बच्चों में डॉयरिया और न्यूमोनिया फैलने का भी खतरा हमेशा बना रहता है।

 ऐसे में शिशु की सेहत बनाए रखने में स्तनपान सबसे प्रभावशाली समाधान है। बच्चे को पैदा होने से लेकर अगले छह महीने तक अपनी मां का दूध ही पीना चाहिए। लेकिन कई ऐसी भी महिलाएं होती हैं जिन्हें अपने शिशु के लिए दूध नहीं बन पाता तो वो क्या करें...ऐसी महिलाओं की मदद करते हैं  'मदर मिल्क बैंक'।     
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भारत के इन कोनों में मौजूद हैं ह्यूमन मिल्क बैंक

- अमारा दूध बैंक -ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली
-सायन अस्पताल यानी की लोकमान्य तिलक अस्पताल, मुंबई
-कामा एंड एल्बेलेस अस्पताल, मुंबई 
-केईएम अस्पताल, परेल मुंबई महाराष्ट्र
-जेजे अस्पताल, मुंबई 
-दिव्य मदर मिल्क बैंक,राजस्थान के उदयपुर में
-दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र,पुणे
-एसएसकेएम अस्पताल,कोलकाता
-इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, एग्मोर, चेन्नई 
-विजया अस्पताल, चेन्नई 

 

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भारत में मौजूद 'मदर मिल्क बैंक ऐसे बीमार और कमजोर बच्चों की मदद कर रहे हैं जिनकी माताओं का अपने बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं बन पाता है, जो बच्चे बीमार हैं या फिर जिन्हें दूध नहीं मिलता है।

क्या इस बैंक से दूध लेना सुरक्षित है
बता दें, जब कोई महिला अपना दूध डोनेट करने आती है तो सबसे पहले उसके स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाती है। उस समय इस बात पर बहुत जोर दिया जाता है कि उसे किसी तरह की कोई बीमारी न हो, ऐसा न होने पर ही किसी मां से उसका दूध लिया जाता है।
-दूध को माइनस 20 डिग्री पर रखा जाता है। ये दूध 6 माह तक खराब नहीं होता है।

 
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कैसे हुई शुरूआत
27 साल पहले डॉ. अरमिडा फर्नांडिस ने नवजातों की जिंदगी बचाने के लिए मुंबई में देश के पहले मदर मिल्क बैंक की स्थापना की थी। उस समय सेहत के प्हैरति जागरूक नहोने की वजह से नवजातों की मृत्युदर ज्यादा हुआ करती थी। जिसका कारण इंफेक्शन से डायरिया था। बाेतल से दिया जा रहा पाउडर का दूध नवजातों के लिए ठीक नहीं था।

डॉक्टरों की मानें तो लेट मैरिज और लेट बेबी की चाहत रखने वाली महिलाओं में प्रेग्नेंसी को लेकर कई तरह की समस्याएं बाद में देखने को मिलती हैं। जिसका असर नवजात बच्चों में इन्फेक्शन और वजन कम होने की समस्या को जन्म देता है। ऐसी महिलाओं में दूध नहीं बनता है, कम बनता है, दवा या दूसरी बीमारी की वजह से बच्चे के लिए सेफ नहीं होता है। ऐसे बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ह्यूमन मिल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है। 

आपको हमारी स्टोरी कैसी लगी कृपया कमेंट कर हमें जरूर बताएं । आपके सुझाव सादर आमंत्रित हैं।
 
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