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IVF Treatment: कब पड़ती है आईवीएफ की जरूरत, किन कपल्स के लिए ये मददगार? आईवीएफ एक्सपर्ट ने दी सारी जानकारी

Tue, 23 Jun 2026 08:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में बढ़ती प्रजनन से संबंधित समस्याएं गंभीर चिंता का विषय है। बांझपन से जूझ रहे कपल्स के लिए आईवीएफ बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है। पर कब आपको ये समझ लेना चाहिए कि अब आईवीएफ की जरूरत है?
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आईवीएफ की जरूरत - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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लाइफस्टाइल-खानपान और पर्यावरण से संबंधित गड़बड़ियों ने हमारी पूरी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। इसके कारण न सिर्फ मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ गई हैं, बल्कि अब लोगों के लिए बच्चे पैदा करना भी बड़ा टास्क होता जा रहा है।  

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कुछ दशकों पहले तक जो गर्भधारण स्वाभाविक रूप से हो जाता था, उसके लिए अब कई दंपतियों को महीनों या वर्षों तक इलाज कराना पड़ रहा है। कई मामलों में अंततः उन्हें इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसी सहायक प्रजनन तकनीकों का सहारा भी लेना पड़ रहा है।

भारत में बढ़ती प्रजनन से संबंधित समस्याएं गंभीर चिंता का विषय है। अगर आपको लगता है कि बच्चे न पैदा होना सिर्फ महिला की कमी है तो यहां आप गलत हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि इनफर्टिलिटी के 50% मामलों के लिए पुरुष जिम्मेदार होते हैं। 
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प्रजनन समस्याओं और बांझपन से जूझ रहे कपल्स के लिए आईवीएफ उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। पर किन कपल को इसकी जरूरत है, ये कैसे पता चले?

इंफर्टिलिटी की समस्या - फोटो : Freepik.com
प्रजनन संबंधित समस्याएं और आईवीएफ की जरूरत

विशेषज्ञ बताते हैं कि पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या में कमी, हार्मोनल गड़बड़ियां और अस्वस्थ जीवनशैली प्रजनन की समस्याएं बढ़ा रही हैं। यानी संतान प्राप्ति में आने वाली दिक्कत एक साझा स्वास्थ्य मुद्दा है, जिसे केवल किसी एक पक्ष से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

भारत में प्रजनन संबंधी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली, सही पोषण, नियमित व्यायाम और विशेषज्ञ की सलाह कई मामलों में जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। 




प्रजनन संबंधित समस्याओं और आईवीएफ के बारे में अमर उजाला से बातचीत में आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ गौरी अग्रवाल ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। किन कपल्स को आईवीएफ की जरूरत है, कब इसके लिए आपको जाना चाहिए? डॉ गौरी ने सरल तरीके से सभी सवालों के जवाब दिए हैं।

गर्भधारण कैसे होगा? - फोटो : Adobe Stock
पहले नेचुरल प्रेग्नेंसी को जानना जरूरी

डॉ गौरी बताती हैं, सामान्य रूप से हर महीने महिला के शरीर में एक अंडा फूटता है। यौन संबंध के दौरान जब स्पर्म रिलीज होता है, तो ये स्पर्म गर्भाशय से होकर उस ट्यूब तक पहुंचता है जहां अंडा पहले से मौजूद होता है। वहीं पर शुक्राणु और अंडा मिलकर बच्चे का निर्माण करते हैं।
 
  • पांच दिन बाद ये ट्यूब बच्चे को गर्भाशय में डाल देता है जहां 9 महीने तक बच्चा बढ़ता रहता है।
  • अगर किसी महिला के ट्यूब ब्लॉक हैं, अंडे कम बन रहे हैं, शुक्राणु कम (10 मिलियन से कम) हैं या फिर गर्भाशय में गांठ या कोई अन्य समस्या है, इन स्थितियों में सामान्य तौर पर गर्भधारण कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में आईवीएफ की जरूरत होती है।
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आईवीएफ की प्रक्रिया - फोटो : Adobe Stock
आईवीएफ में होता क्या है?

आईवीएफ में 10-12 दिन तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। इन इंजेक्शन से दोनों अंडाकोष में अंडे बनते हैं। हालांकि अंडे बनने की प्रक्रिया आपकी कई शारीरिक स्थितियों पर निर्भर करती है।
 
  • अगर महिला में अंडे बन रहे हैं तो इसे एक प्रक्रिया द्वारा बाहर निकालकर लैब में स्पर्म के साथ मिलाया जाता है। इससे भ्रूण तैयार होता है। 
  • 3-4 दिन के भीतर इस भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित कर दिया जाता है। 
  • अगर किसी महिला का गर्भाशय भ्रूण के लिए तैयार नहीं है तो फिर कुछ और प्रक्रियाएं की जाती हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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