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दुनिया से मच्छर खत्म होते ही भुगतने पड़ेंगे ये 5 साइड इफेक्ट, क्या आप तैयार हैं...

Sun, 16 Sep 2018 03:23 PM IST
मंजू ममगाईं
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बरसात का मौसम हो या फिर जुलाई की चिपचिपी गर्मी दोनों ही चीजें मच्छरों के पनपने के लिए बेहतर समय होती हैं।यह वही मौसम होता है जब डेंगू, मलेरिया और चिकुनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियां व्यक्ति को अपना शिकार बनाती हैं। बावजूद इसके क्या आप वाकई चाहते हैं कि आपका खून पीकर ये गंभीर बीमारी फैलाने वाले मच्छर दुनिया से गायब हो जाएं...अपना जवाब हां में देने से पहले एक बार जरूर पढ़ लें ये खबर...
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मौसम बदलते ही लोग डेंगू, मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को कोसने लगते हैं पर सवाल ये उठता है कि क्या वाकई दुनिया से मच्छरों को खत्म कर देना चाहिए।ऐसा करने से क्या कोई नुकसान भी हो सकता हैं? फ्लोरिडा के कीट वैज्ञानिक फिल लोनीबस की मानें तो मच्छरों का इस तरह खात्मा करने से व्यक्ति को कई साइड इफेक्ट भुगतने पड़ सकते हैं। 
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फलों का विकास
लोनीबस के अनुसार नर मच्छर सिर्फ पौधों का रस पीकर जिंदा रहते हैं।जिसकी वजह से पौधों के पराग फैलते हैं।उनके ऐसा करने से फूलों का फल के तौर पर विकास होता है।इतना ही नहीं मच्छर कई परिंदों और चमगादड़ों का भी भोजन बनते हैं।  
 

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फूड चेन पर असर
मच्छरों के होने का दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इनके लार्वा से मछलियों और मेंढकों को भोजन मिलता है।यदि मच्छरों का पूरी तरह से खात्मा कर दिया जाएगा तो ऐसा करने से क़ुदरती फ़ूड चेन पर असर पड़ सकता है। वहीं, ओलिविया जडसन इस तर्क को नहीं मानती। उनका मानना है कि मच्छरों के खात्मे से दूसरे जीव इस फ़ूड चेन की कड़ी बन जाएंगे। उनका कहना है कि धरती के विकास के दौरान कई नस्लें खत्म हो गईं थीं। इन प्रजातियो के खात्मे से किसी तरह की कोई तबाही नहीं आई बल्कि उनकी जगह कई नई प्रजातियों ने ले ली। 
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बीमारी फैलने का खतरा
फिल लोनीबस ने ओलिविया जडसन के तर्क में जवाब देते हुए कहा कि अगर मच्छरों की जगह नए जीवों ने ले ली, तो भी तो परेशानी हो सकती है। मच्छरों की जगह लेने वाले नए जीव उनकी ही तरह या फिर मच्छरों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।जिसका व्यक्ति की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि, हो सकता है कि इस नए जीव से दूसरी बीमारियां और भी तेजी से और दूर तक फैलें। 
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forest - फोटो : google
जंगलों को खतरा
विज्ञान लेखक डेविड क्वामेन की मानें तो मच्छरों का इंसानियत पर बहुत ही सीमित तौर पर घातक असर पड़ता है।मच्छर आमतौर पर गर्म इलाकों वाले जंगल में इंसान के बसने की गुंजाइश को लगभग कम कर देते हैं। बारिश वाले जंगलों में दुनिया भर के पेड़-पौधों और दूसरे जीवों की बड़ी तादाद रहती है। मच्छरों की वजह से ही इंसान इन जंगलों के पास आने से डरता है। लेकिन अगर मच्छर खत्म हुए, तो इन जंगलों पर भी इंसानी तबाही का खतरा मंडराने लगेगा।मच्छरों ने इस तरह की तबाही को पिछले दस हजार सालों से रोका हुआ है। 
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