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क्या है रोटावायरस, जिसके संक्रमण से 7 साल पहले हुई थी दो लाख से ज्यादा मौतें

Sun, 05 Jul 2020 02:25 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रोटावायरस - फोटो : Social media
दुनिया इस वक्त कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण से जूझ रही है। इससे निजात पाने के लिए न तो अभी तक कोई वैक्सीन मिल पाई है और न ही दवाई। ऐसे में कोरोना के संक्रमण को रोकना दुनियाभर के देशों के लिए मुश्किल साबित होता दिख रहा है। हालांकि ये कोई पहला वायरस नहीं है जो इतनी तबाही मचा रहा है। दुनिया में और भी कई खतरनाक वायरस हैं जो समय-समय पर तबाही मचा चुके हैं। इन्ही में से एक है रोटावायरस। यह एक अत्याधिक संक्रामक विषाणु है जो बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का संक्रमण) होने का एक आम कारण है। आइए जानते हैं यह वायरस कितना खतरनाक है और इसका नाम 'रोटावायरस' ही क्यों रखा गया? 
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रोटावायरस - फोटो : Social media
दरअसल, रोटावायरस डबल-स्ट्रैंडेड वाला आरएनए वायरस है, जो रियोविरिडे परिवार का है। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से अगर इस वायरस को देखें तो इसकी आकृति एक पहिए की तरह दिखाई देती है। यही वजह है कि इसका नाम रोटावायरस रखा गया। रोटा एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब पहिया होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अब चूंकि रोटावायरस संक्रामक है, ऐसे में यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सामान्य संपर्क से भी आसानी से फैल जाता है। यह वायरस मल में मौजूद होता है और हाथों के मुंह से संपर्क से और दूषित पानी या अन्य चीजों से फैलता है। इसके फैलने का तरीका कुछ-कुछ कोरोना वायरस की तरह ही है, जैसे कि यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी फैल सकता है। यह वायरस पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ज्यादातर अपना शिकार बनाता है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में लगभग हर बच्चा पांच साल की उम्र से पहले कम से कम एक बार रोटावायरस से संक्रमित जरूर होता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैसे तो रोटावायरस बच्चों में आसानी से फैल जाता है, लेकिन उसके बाद उन बच्चों से उन लोगों तक भी यह वायरस पहुंच जाता है जो बच्चों के सबसे पास होते हैं। इसके लक्षण बिल्कुल सामान्य हैं, जैसे कि सर्दी-खांसी, बुखार, दस्त, उल्टी, पेट दर्द। दस्त और उल्टी की वजह से बच्चों के शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने तक की नौबत आ जाती है। वैसे इसके संक्रमण के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है। बच्चों के शरीर में पानी की कमी को पूरा करके उनकी जान बचाई जा सकती है, लेकिन अगर समय पर इलाज उपलब्ध नहीं हुआ या देर से हुआ तो रोगी की मौत भी हो सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दुनियाभर में रोटावायरस के कारण लगातार मौंतें हो रही हैं। हालांकि मौतों की संख्या अब थोड़ी कम हो गई है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों को देखें तो साल 2013 में रोटावायरस के संक्रमण के कारण लगभग 2,15,000 मौतें हुई थी, जिसमें ज्यादातर बच्चे ही थे। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि रोटावायरस का टीका वैज्ञानिक बना चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन रोटावायरस से बचाव और इसके नियंत्रण के लिए टीके को ही एकमात्र उपाय मानता है। यह बच्चों को मुंह में ड्रॉपर के जरिए दिया जाता है। इसकी पहली खुराक छह हफ्ते पर, दूसरी खुराक 10 हफ्ते पर और तीसरी खुराक 14 हफ्ते पर देनी जरूरी है। यह टीका बच्चों की प्रतिरक्षण क्षमता विकसित करने में मदद करता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैसे साफ-सफाई की आदतें अपनाने से भी रोटावायरस इनफेक्शन से काफी हद तक बचा जा सकता है। जैसे कि शौचालय के इस्तेमाल से पहले और बाद में हाथों को साबुन से जरूर धोएं। इसके अलावा बच्चों की लंगोट बदलने के बाद, उन्हें दूध पिलाने से पहले, मैले कपड़ों को हाथ लगाने के बाद और खाना बनाने और खाने से पहले भी हाथ धोना जरूरी है। वैसे अधिक और सटीक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। 
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