डायबिटीज के इलाज के लिए स्टडी
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जीन थेरेपी से होगा लाइलाज डायबिटीज का इलाज
'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज एंड ट्रीटमेंट्स फॉर डायबिटीज' में ये रिपोर्ट पेश किया गया है।
वैज्ञानिकों ने एक खास तरीके की जीन थेरेपी विकसित की है, जिसके एक सिंगल इंजेक्शन से मांसपेशियों को लंबे समय तक इंसुलिन बनाने वाले अंग में बदला जा सकेगा। इस एक इंजेक्शन की मदद से कई वर्षो या फिर शायद दशकों तक शरीर में इंसुलिन बनता रहेगा और मरीजों को रोज-रोज इंसुलिन इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं होगी।
विशेषज्ञों ने बताया कि दुनिया की अपनी तरह की पहली स्टडी में सबसे पहले उन वयस्कों को शामिल किया जाएगा जिनका ब्लड शुगर ठीक से कंट्रोल में नहीं रहता और जो पहले से ही ऑटोमेटेड इंसुलिन डिलीवरी सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इससे वैज्ञानिकों को यह बारीकी से ट्रैक करने का मौका मिलेगा कि यह थेरेपी कितना इंसुलिन बनाती है और ग्लूकोज के लेवल को कितनी असरदार तरीके से स्थिर रखती है।
डायबिटीज की समस्या को जान लीजिए
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टाइप-1 डायबिटीज के बारे में जान लीजिए
इस थेरेपी के बारे में जानने से पहले टाइप-1 डायबिटीज के बारे में जान लेना जरूरी है।
टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसका मतलब है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं पर अटैक कर देती है। यही बीटा कोशिकाएं इंसुलिन बनाती हैं, जो खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।
- इस बीमारी का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। शोध बताते हैं कि इसमें आनुवंशिकता और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका हो सकती है।
- कुछ वायरल संक्रमण जैसे एंटेरोवायरस प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकते हैं।
- जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को टाइप-1 डायबिटीज होती है, उनमें इसका खतरा थोड़ा अधिक देखा गया है।
- टाइप-1डायबिटीज में भी टाइप-2 की ही तरह बार-बार पेशाब, अत्यधिक प्यास लगने, वजन कम होने, धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होती हैं।
- बच्चों और किशोरों में यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है।
हमेशा के लिए छूट सकती है इंसुलिन इंजेक्शन
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KRIYA-839 थेरेपी से जगी उम्मीद
इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में डायबिटीज के लिए नेशनल स्पेशलिटी एडवाइजर डॉ. पार्थ कर कहते हैं, यह तरीका सचमुच बहुत रोमांचक है और इसमें लाइलाज बीमारी को 'पूरी तरह ठीक करने' की क्षमता है। अगर यह वास्तव में सफल होता है, तो इससे लाखों लोगों को मदद मिल सकती है।
KRIYA-839 नाम की ये थेरेपी एक बिल्कुल ही अलग तरीका अपनाती है। इंजेक्शन या किसी डिवाइस के जरिए इंसुलिन की कमी पूरी करने के बजाय, इसका मकसद मरीज की अपनी ही मांसपेशियों को लंबे समय तक इंसुलिन बनाने वाली फैक्ट्री में बदलना है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि एक बार इंजेक्शन लगाने के बाद मांसपेशियों की कोशिकाएं इंसुलिन और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले दूसरे प्रोटीन बनाना शुरू कर देंगी, जिससे रोजाना के इलाज की जरूरत खत्म हो जाएगी।
- शोधकर्ताओं ने बताया यह थेरेपी जीन एडिटिंग नहीं है और न ही यह किसी व्यक्ति के डीएनए में कोई बदलाव करती है।
- इसके बजाय, यह मांसपेशियों की कोशिकाओं में जेनेटिक सिग्नल पहुंचाती है, जिससे वे समय के साथ नियंत्रित तरीके से इंसुलिन बना पाती हैं।
टाइप-1 डायबिटीज का इलाज होगा आसान
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जानवरों पर किए गए शुरुआती ट्रायल में इसके नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले रहे हैं। इस इलाज ने लगातार इम्यून सप्रेशन यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाओं की जरूरत के बिना, चार साल तक काम करना जारी रखा। आमतौर पर टाइप-1 जैसी ऑटोइम्यून बीमारी में बहुत अधिक सक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली को कंट्रोल करने के लिए इम्यून सप्रेशन दवाएं दी जाती हैं। अब, पहली बार इसका परीक्षण इंसानों पर किया जाएगा।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और मेडिसिन के एसोसिएट के प्रोफेसर जेरेमी पेटस कहते हैं यह डायबिटीज रोगियों के लिए एक नया दौर लाने वाला हो सकता है।
यूसीएच-यूएमसी लुब्लियाना में एंडोक्रिनोलॉजी के प्रमुख तादेज बैटेलिनो कहते हैं, ये देखना है कि इंसानों के अध्ययन में इसके कैसे परिणाम देखने को मिलते हैं। अगर यह थेरेपी लंबे समय तक ब्लड शुगर को एक कंट्रोल सीमा में रख पाती है तो इसे बड़ी कामयाबी माना जा सकता है।
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स्रोत:
KRIYA 839, a potential one-time gene therapy for type 1 diabetes
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