चमगादड़ों से फैलता है निपाह वायरस
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मेडिकल स्टाफ हैं दोनों संक्रमित
फिलहाल पश्चिम बंगाल की बात करें तो मीडिया रिपोर्ट्स के मताबिक दोनों प्रभावित एक प्राइवेट अस्पताल के मेडिकल स्टाफ हैं। दोनों की उम्र 22 से 25 साल के बीच है। मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि दोनों व्यक्तियों को वायरस का संक्रमण कैसे हुआ और कौन से लोग उनके संपर्क में आए थे।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने निपाह वायरस को लेकर पहले से जारी दिशानिर्देशों को फिर जारी करते हुए पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों को अलर्ट पर रहने के लिए कहा है।
निपाह वायरस और इसके जोखिम
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निपाह संक्रमण आखिर होता क्या है?
निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो न सिर्फ काफी तेजी से फैलती है बल्कि इससे संक्रमितों में मौत का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। जूनोटिक रोग उन संक्रामक बीमारियों को कहा जाता है जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं। ये वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी या कवक जैसे सूक्ष्मजीवों के कारण होती हैं। ये वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों के संपर्क से फैलता है।
- कुछ मामलों में सुअर, बकरी, घोड़े जैसे अन्य जानवरों के माध्यम से भी इसका संक्रमण हो सकता है।
- संक्रमित जानवरों के संपर्क में रहने वालों में इस संक्रमण का खतरा अधिक देखा जाता है।
- संक्रमित जानवर के शारीरिक तरल पदार्थ (रक्त, मल, पेशाब या लार) के माध्य से इसका संक्रमण इंसानों को हो सकता है।
- ये संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में भी तेजी से फैलता है जिससे कम समय में इससे अधिक से अधिक लोगों के शिकार होने का खतरा रहता है।
- इस संक्रमण के कारण मौत का भी खतरा अधिक होता है। इसका मृत्युदर 40-75 फीसदी के बीच देखा जाता रहा है।
निपाह संक्रमितों को हो सकता है एन्सेफलाइटिस
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संक्रमितों में एन्सेफलाइटिस का भी रहता है खतरा
निपाह वायरस इसलिए भी काफी खतरनाक माना जाता रहा है क्योंकि इससे दिमाग में गंभीर सूजन होने का जोखिम रहता है जिसे एन्सेफलाइटिस कहते हैं। इसके कारण बुखार, सिरदर्द, कन्फ्यूजन, दौरे पड़ने और गंभीर न्यूरोलॉजिकल क्षति का भी जोखिम रहता है। यही कारण है कि संक्रमितों को त्वरित रूप से उपचार उपलब्ध कराना जरूरी हो जाता है।
- निपाह संक्रमितों को शुरुआत में फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। इसमें में खांसी और गले में खराश से लेकर तेजी से सांस लेने, बुखार-मतली और उल्टी जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं।
- ये वायरस फेफड़ों और मस्तिष्क को भी अटैक कर सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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