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अलर्ट: क्या आपकी बिल्ली भी बन सकती है बीमारी की वजह? टॉक्सोप्लाज्मोसिस संक्रमण को लेकर अलर्ट, जानिए विस्तार से

Mon, 02 Nov 2026 12:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टॉक्सोप्लाज्मोसिस टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक परजीवी से होने वाला संक्रमण है, जो बिल्ली के मल से दूषित मिट्टी, पानी और भोजन के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह दिमाग और आंखों को प्रभावित कर सकता है। इहबास के अध्ययन में मानसिक एवं तंत्रिका रोगियों में इसकी एंटीबॉडी मिलीं
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टॉक्सोप्लाज्मोसिस का अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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बिल्ली के मल, दूषित मिट्टी-पानी और अधपका संक्रमित मांस टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक परजीवी के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। यह परजीवी शरीर के ऊतकों में लंबे समय तक बना रह सकता है और कुछ परिस्थितियों में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक भी पहुंच सकता है। 

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 पूर्वी दिल्ली स्थित मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के एक अध्ययन में मानसिक और तंत्रिका संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में इस परजीवी के खिलाफ बनी एंटीबॉडी पाई गई हैं। हालांकि, शोध में परजीवी और इन बीमारियों के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। मार्च से सितंबर 2025 के बीच किए गए इस अध्ययन में मानसिक और तंत्रिका संबंधी रोगों से पीड़ित 281 मरीजों तथा 281 स्वस्थ व्यक्तियों को नियंत्रण समूह के रूप में शामिल किया गया।

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ब्रेन तक पहुंचा परजीवी - फोटो : Adobe Stock
एंटीबॉडी मिलने का मतलब सक्रिय संक्रमण नहीं

मनोरोग विभाग के डॉ. महादेव सिंह सेन के अनुसार, वैज्ञानिक यह समझने में रुचि रखते हैं कि इस परजीवी का मानसिक और तंत्रिका संबंधी स्वास्थ्य से कोई संबंध है या नहीं। हालांकि, अध्ययन में मरीजों और नियंत्रण समूह के बीच एंटीबॉडी मिलने की दर का अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था। इसलिए केवल एंटीबॉडी की मौजूदगी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी मरीज की बीमारी परजीवी के कारण हुई है या उसके शरीर में सक्रिय संक्रमण है।

अध्ययन में क्या पता चला (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
562 लोगों के रक्त नमूनों की जांच की गई

इस तरह कुल 562 लोगों के रक्त नमूनों की जांच की गई। अध्ययन के अनुसार, डिमेंशिया के 35 प्रतिशत मरीजों में टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी के खिलाफ एंटीबॉडी मिलीं। सिजोफ्रेनिया के मरीजों में यह दर 33.34 प्रतिशत, बाइपोलर अफेक्टिव डिसऑर्डर में 32 प्रतिशत, पार्किंसंस रोग में 31.03 प्रतिशत और नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े मानसिक एवं व्यवहार संबंधी विकारों में 30 प्रतिशत रही। इहबास के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. सोनाली माहेश्वरी के अनुसार, रक्त नमूनों की जांच के लिए एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसोरबेंट एसे (एलिसा) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए इम्युनोग्लोबुलिन जी (आईजीजी) एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगाया गया। ये एंटीबॉडी आमतौर पर पहले हुए संक्रमण या परजीवी के संपर्क में आने का संकेत हो सकती हैं।

संक्रमण से बचाव के उपाय

बिल्ली के मल की सफाई करते समय दस्ताने पहनें और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएं। फल-सब्जियों को साफ पानी से धोएं तथा मांस को अच्छी तरह पकाकर खाएं। ये सावधानियां संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
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संक्रमण से बचाव के उपाय - फोटो : Freepik.com
टॉक्सोप्लाज्मोसिस का खतरा

न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. राजिंदर के धमीजा के अनुसार, टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी से होने वाले संक्रमण को टॉक्सोप्लाज्मोसिस कहते हैं। दूषित मिट्टी-पानी, संक्रमित बिल्ली के मल से दूषित वस्तुओं और अधपके संक्रमित मांस के सेवन से यह संक्रमण हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में परजीवी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुंचकर वहां लंबे समय तक बना रह सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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