ब्रेन तक पहुंचा परजीवी
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एंटीबॉडी मिलने का मतलब सक्रिय संक्रमण नहीं
मनोरोग विभाग के डॉ. महादेव सिंह सेन के अनुसार, वैज्ञानिक यह समझने में रुचि रखते हैं कि इस परजीवी का मानसिक और तंत्रिका संबंधी स्वास्थ्य से कोई संबंध है या नहीं। हालांकि, अध्ययन में मरीजों और नियंत्रण समूह के बीच एंटीबॉडी मिलने की दर का अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था। इसलिए केवल एंटीबॉडी की मौजूदगी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी मरीज की बीमारी परजीवी के कारण हुई है या उसके शरीर में सक्रिय संक्रमण है।
अध्ययन में क्या पता चला (सांकेतिक)
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562 लोगों के रक्त नमूनों की जांच की गई
इस तरह कुल 562 लोगों के रक्त नमूनों की जांच की गई। अध्ययन के अनुसार, डिमेंशिया के 35 प्रतिशत मरीजों में टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी के खिलाफ एंटीबॉडी मिलीं। सिजोफ्रेनिया के मरीजों में यह दर 33.34 प्रतिशत, बाइपोलर अफेक्टिव डिसऑर्डर में 32 प्रतिशत, पार्किंसंस रोग में 31.03 प्रतिशत और नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े मानसिक एवं व्यवहार संबंधी विकारों में 30 प्रतिशत रही। इहबास के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. सोनाली माहेश्वरी के अनुसार, रक्त नमूनों की जांच के लिए एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसोरबेंट एसे (एलिसा) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए इम्युनोग्लोबुलिन जी (आईजीजी) एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगाया गया। ये एंटीबॉडी आमतौर पर पहले हुए संक्रमण या परजीवी के संपर्क में आने का संकेत हो सकती हैं।
संक्रमण से बचाव के उपाय
बिल्ली के मल की सफाई करते समय दस्ताने पहनें और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएं। फल-सब्जियों को साफ पानी से धोएं तथा मांस को अच्छी तरह पकाकर खाएं। ये सावधानियां संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
संक्रमण से बचाव के उपाय
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टॉक्सोप्लाज्मोसिस का खतरा
न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. राजिंदर के धमीजा के अनुसार, टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी से होने वाले संक्रमण को टॉक्सोप्लाज्मोसिस कहते हैं। दूषित मिट्टी-पानी, संक्रमित बिल्ली के मल से दूषित वस्तुओं और अधपके संक्रमित मांस के सेवन से यह संक्रमण हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में परजीवी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुंचकर वहां लंबे समय तक बना रह सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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