अक्सर महिलाओं को कमर में दर्द होता है, जिसको वे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कई बार यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।
शरीर का दर्द कई बार असहनीय होता है, लेकिन महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। कई बार शरीर का यह भयंकर दर्द ‘सायटिका’ हो सकता है। वैसे तो सायटिका एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसे गंभीरता से लेना जरूरी है, क्योंकि इसमें पैर और लोअर बैक सुन्न पड़ सकते हैं और आपको कमजोरी महसूस हो सकती है। पैरों में दर्द या सायटिका का लक्षण प्रायः 40 साल की उम्र के बाद दिखाई देता है, लेकिन आजकल बदलती जीवन-शैली ने कम उम्र में भी लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
क्यों होता है सायटिका?
किसी भी मरीज को सायटिका का दर्द तब होता है, जब सायटिका तंत्र पर दबाव पड़ता है या इसकी क्षति होती है। सायटिका नर्व पीठ के पिछले हिस्से से शुरू होती है और प्रत्येक पैर के पीछे तक जाती है। यह नर्व घुटने के निचले और पैर के पिछले हिस्सों को नियंत्रित करती है। इन नसों में जहां-जहां सूजन होती है, वहां-वहां दर्द होता है। सायटिका का दर्द कभी भी नसों के दबने से नहीं होता, बल्कि नसों के बीच गद्दों में भरे जेल के निकलने से होता है। नसों के दबने से पैरों में कमजोरी होती है, लेकिन महसूस नहीं होती है।
उम्र भी एक कारण
सायटिका का दर्द उम्र के साथ बढ़ता है, क्योंकि यह अधिक उम्र के साथ होने वाली समस्या है। लेकिन कभी-कभी कम उम्र में इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई बार शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से भी इस तरह के दर्द का सामना करना पड़ता है।
दिखते हैं ये लक्षण
सायटिका में तेज दर्द के अलावा शुरुआती दिनों में झनझनाहट और जलन होती है। साथ ही दर्द अक्सर एक तरफ होता है, जो पिंडलियों और पैर के तलवे में होता है। सायटिका से पीड़ित व्यक्ति के पैर में कमजोरी महसूस होती है। खड़े होने और बैठने में दर्द महसूस होता है। दिन के एक निश्चित समय के दौरान खांसने-छींकने पर भी दर्द हो सकता है।
करें ये उपाय
यह दर्द आपके लिए ज्यादा परेशानी खड़ी न करे, इसके लिए आप हमेशा गद्देदार बिस्तर का इस्तेमाल न करें। साथ ही रोजाना एक्सरसाइज करें। सायटिका से बचने के लिए रीढ़ की हड्डी का लचीला होना जरूरी है, इसलिए रीढ़ की एक्सरसाइज जरूर करें। दर्द की शुरुआत में भी कड़े व्यायाम शुरू न करें, इससे आपको परेशानी हो सकती है। आप हल्के व्यायाम शुरू करें और उन्हें जारी रखें।
सर्दियों में खास ख्याल
सर्दियों के मौसम में सायटिका की परेशानी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में आपको धूप सेंकना चाहिए, खुद को ढक कर और गरम रखने की कोशिश करनी चाहिए। कम उम्र में इस तरह की समस्या खुद भी ठीक हो जाती है, लेकिन 90 दिन की फिजियोथेरैपी से मरीज को राहत मिलती है।
व्यायाम और खान-पान
डॉ. अनुपम सचान
वरिष्ठ हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
सायटिका का दर्द कई मरीजों के लिए असहनीय तो जरूर होता है, लेकिन उचित खान-पान और व्यायाम से इस मुश्किल से बचा जा सकता है। नियमित व्यायाम करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, इसलिए ऐसे में रोज व्यायाम करें। साथ ही झटके से बचें और सावधानी से काम करें। सायटिका मूलतः डिस्क के उस हिस्से के फटने से होता है, जहां वर्टिब्रा कमजोर हो जाती है। हड्डियों में कैल्शियम और विटामिन डी की मात्रा ठीक होने से वे मजबूत होती हैं और इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके लिए आप खान-पान का ख्याल रखें। हमेशा हरी साग-सब्जियों, ज्वार, बाजरा और रागी का सेवन करें। इनको जीवन-शैली में गेहूं और चावल के साथ जोड़ें।