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Heart Transplant: 18 साल के किशोर के हृदय दान ने बचाई 13 वर्षीय लड़की की जान, जानिए क्या है पूरा मामला

Sun, 14 Sep 2025 11:05 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • केरल में 13 वर्षीय एक लड़की का हृदय प्रत्यारोपण शनिवार को एक निजी अस्पताल में सफलतापूर्वक पूरा हो गया, वह अब स्वस्थ है। लड़की गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थी जिसके लिए उसे हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी।
  • 18 वर्षीय किशोर द्वारा दान किए गए हार्ट ने किशोरी को नई जिंदगी दी है।
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हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी ने बचाई किशोरी की जान - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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Heart Transplant Surgery Of A 13-year-Old Girl: हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं अब केवल उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतें नहीं रह गई हैं,  कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में 20 से कम आयु के लोगों में न सिर्फ हृदय रोगों का निदान किया जा रहा है, बल्कि इस आयु वर्ग में हार्ट अटैक से हो रही मौत की खबरें अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय भी बनी रहती हैं।

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सोचिए, कभी जिसे बुजुर्गों की बीमारी कहा जाता था, वही आज नई पीढ़ी में तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके पीछे के कारणों पर ध्यान दिया जाए तो पता चलता है कि तेज रफ्तार लाइफस्टाइल, जंक फूड्स, नींद की कमी और बढ़ता स्क्रीनटाइम प्रमुख हो सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह समस्या अब केवल हार्ट अटैक तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई मामलों में हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर जरूरतों तक पहुंच रही है।

शनिवार (13 सितंबर) को केरल के कोच्चि में डॉक्टरों ने 13 साल के किशोरी की सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी कर नई जिंदगी दी है।

हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता - फोटो : Freepik.com
13 वर्षीय लड़की का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट

अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि कोल्लम से कोच्चि लाई गई 13 वर्षीय एक लड़की का हृदय प्रत्यारोपण शनिवार को एक निजी अस्पताल में सफलतापूर्वक पूरा हो गया, वह अब स्वस्थ है। लड़की गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थी जिसके लिए उसे हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मल्लुसेरी निवासी 18 वर्षीय बिलजीत ने आपना हृदय दान किया था। हाल ही में बलजीत को एक सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद परिवार वालों ने हृदय दान करने का फैसला किया था।

हार्ट ट्रांसप्लांट - फोटो : adobe stock images
क्या है पूरा मामला?

हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जन डॉ जोस चाको पेरियाप्पुरम के नेतृत्व वाली एक टीम ने शनिवार को किशोरी में हृदय प्रत्यारोपित किया। 

दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इंजीनियरिंग के छात्र बिलजीत को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उसके परिवार ने उसके हृदय, गुर्दे, लिवप और कॉर्निया सहित अंगों को दान करने की सहमति दी। शुक्रवार शाम को, लड़की के परिवार को हृदय की उपलब्धता के बारे में सूचित किया गया, जिसके बाद उसे देर रात ये सर्जरी शुरू हुई। 

दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए बिलजीत के हृदय को निकालने की सर्जरी शुक्रवार आधी रात तक पूरी हो गई। शनिवार रात करीब 1 बजे अंग को किशोरी के अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस द्वारा यातायात नियंत्रित करने के कारण यह दूरी केवल 20 मिनट में पूरी हो गई। 

प्रत्यारोपण सर्जरी रात 1.25 बजे शुरू हुई और सुबह 3.30 बजे तक किशोरी के शरीर में नए दिल ने धड़कना शुरू कर दिया। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि पूरी सर्जरी सुबह 6.30 बजे तक पूरी हो गई। डॉ. पेरियाप्पुरम ने कहा, "सर्जरी सफल रही, लेकिन अगले 48 घंटे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
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हृदय रोग और इसके बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com
अंगदान की कमी से हर साल होती हैं हजारों मौतें

हृदय प्रत्यारोपण या हार्ट ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें किसी मरीज के खराब या क्षतिग्रस्त हृदय को निकालकर हाल ही में मृत अंगदाता के स्वस्थ हृदय से लगाया जाता है। यह लास्ट स्टेज के हार्ट फेलियर या गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित व्यक्तियों के लिए एक अंतिम उपाय है जो उनकी जान बचा सकता है। 

हृदय प्रत्यारोपण की कमी से होने वाली मौतों के सटीक वैश्विक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अमेरिका में हृदय प्रत्यारोपण के इंतजार में हर दिन लगभग 13 लोगों की मौत हो जाती हैं, सालाना ये आंकड़ा लगभग 4,745 है। भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत और भी ज्यादा है, जहां हर साल लगभग 50,000 हृदयों की जरूरत होती है, जबकि प्रत्यारोपण की संख्या बहुत कम है, जिसके कारण अंगों की कमी से हजारों मौतें होती हैं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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