फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Brain Tumor: महिलाओं की ये छोटी सी गलती बढ़ा रही है ब्रेन में ट्यूमर का खतरा, कहीं आपको भी तो नहीं है खतरा?

Fri, 03 Jul 2026 08:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अध्ययन में पाया गया कि गर्भनिरोधक दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मेनिन्जियोमा नाम के ब्रेन ट्यूमर का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया। कहीं आप भी तो इस तरह की गोलियों का सेवन नहीं कर रही हैं?
विज्ञापन
ब्रेन में ट्यूमर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सा डर बन जाता है, कहीं ये कैंसर तो नहीं? हालांकि कई अध्ययनों से ये स्पष्ट हो चुका है कि हर बार ट्यूमर होने का मतलब कैंसर नहीं होता। पर ट्यूमर खुद में एक गंभीर समस्या है, जो कई तरह की जटिलताओं का कारण बन सकता है।

विज्ञापन


आंकड़े बताते हैं कि भारत में ब्रेन ट्यूमर का खतरा हाल के दशकों में तेजी से बढ़ा है। हर साल इसके लगभग 40,000 नए मामले सामने आते हैं और करीब 25 हजार लोगों की इससे मौत हो जाती है। यह देश में 14वां सबसे आम कैंसर है और कैंसर से होने वाली मौतों का 11वां सबसे बड़ा कारण है।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जेनेटिक कारणों के साथ गड़बड़ जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी और बढ़ते पर्यावरणीय कारकों ने ब्रेन ट्यूमर का खतरा कम उम्र वालों में भी बढ़ा दिया है। इसी को लेकर एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने महिलाओं की गड़बड़ आदत के कारण ब्रेन ट्यूमर के मामलों के लेकर अलर्ट किया है।
विज्ञापन


अध्ययन में पाया गया है कि लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियां, इंजेक्शन या हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा अधिक हो सकता है। कहीं आप भी तो ये गलती नहीं कर रही हैं?


(ये भी पढ़िए- गर्भ में ही तय हो जाता है बच्चे को कैंसर-एडीएचडी जैसी बीमारियां होंगी या नहीं? पर कैसे, समझिए)

गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल नुकसानदायक - फोटो : Adobe Stock Photos
गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक

दुनियाभर में करोड़ों महिलाएं गर्भधारण से बचने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं। इन्हें एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता रहा है। पर इसका लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के इस्तेमाल कहीं आपके लिए बड़ी मुसीबत का कारण न बन जाए?
 
डेनमार्क में 30 लाख महिलाओं के 25 वर्षों के मेडिकल रिकॉर्ड पर किए गए एक अध्ययन ने वैज्ञानिकों को कुछ ऐसे संकेत दिए हैं, जिन पर अब दुनियाभर के डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं। 
 
  • इस अध्ययन में पाया गया कि कुछ हार्मोन आधारित गर्भनिरोधक दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मेनिन्जियोमा नाम के ब्रेन ट्यूमर का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया।
  • यह ट्यूमर ज्यादातर मामलों में कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर समय रहते इसका पता न चले तो गंभीर जोखिमों का कारण जरूर बन सकता है।

ब्रेन में ट्यूमर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
अध्ययन में क्या पता चला?

मेनिन्जियोमा ऐसा ट्यूमर होता है जो सीधे दिमाग के अंदर नहीं, बल्कि दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्ली (मेनिंजेस) में बनता है। जैसे-जैसे इसका आकार बढ़ता है, यह आसपास के हिस्सों पर दबाव डालने लगता है। इससे लगातार सिरदर्द, दौरे (मिर्गी जैसे झटके), आंखों की रोशनी में कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कई बार ऑपरेशन या रेडियोथेरेपी की जरूरत भी पड़ जाती है।
 
  • वैज्ञानिकों ने 25 साल तक इस लिंक को समझने के लिए अध्ययन किया। उन्होंने 1,473  महिलाओं की तुलना 14,717 दूसरी महिलाओं से की जिन्हें ब्रेन ट्यूमर नहीं था।
  • रिसर्च में सबसे ज्यादा खतरा मेड्रॉक्सीप्रोजेस्टेरोन (Medroxyprogesterone) नाम के गर्भनिरोधक इंजेक्शन से जुड़ा मिला। ब्रिटेन में यह डेपो-प्रोवेरा (Depo-Provera) नाम से बेचा जाता है। 
  • इस इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मेनिन्जियोमा होने की आशंका 355 प्रतिशत ज्यादा पाई गई।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि उम्र बढ़ने के साथ यह खतरा ज्यादा दिखाई देता है। 55 से 59 साल की महिलाओं में अनुमान लगाया गया कि अगर वे एक साल तक यह इंजेक्शन इस्तेमाल करती हैं तो हर 5,372 महिलाओं में एक अतिरिक्त मेनिन्जियोमा का मामला सामने आ सकता है। 

वहीं 15 से 19 साल की उम्र में यही जोखिम बहुत कम था, जहां करीब 4.49 लाख महिलाओं में एक अतिरिक्त मामला सामने आने का अनुमान लगाया गया।

इन पिल्स को पाया गया सबसे खतरनाक
 
जामा नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में कुछ कॉम्बिनेशन गर्भनिरोधक गोलियों (जिनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोजेन दोनों हार्मोन होते हैं) से भी खतरा बढ़ा हुआ मिला।
 
  • सबसे ज्यादा जोखिम डेसोजेस्ट्रेल (Desogestrel) वाली दवाओं में देखा गया, जहां खतरा 66% ज्यादा था।
  • इसके बाद साइप्रोटेरोन (61%), ड्रोस्पाइरेनोन (58%), जेस्टोडीन (44%), लेवोनॉरजेस्ट्रेल (40%), नोरेथिस्टेरोन (38%) और नॉरजेस्टिमेट (4%) वाली दवाएं रहीं।
विज्ञापन

दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डेनिश मेडिसिन्स एजेंसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक माना जाता था कि यह खतरा सिर्फ ज्यादा डोज वाली हार्मोन दवाओं और डेपो इंजेक्शन से जुड़ा है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि कुछ सामान्य गर्भनिरोधक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्रोजेस्टोजेन हार्मोन से भी यह जोखिम जुड़ा हो सकता है।

हालांकि राहत देने वाली बात ये है कि ज्यादातर महिलाओं में गर्भनिरोधक बंद करने के पांच साल के भीतर यह बढ़ा हुआ खतरा लगभग खत्म हो जाता है।
 
  • अमेरिकी कैंसर विशेषज्ञ पॉल फरो कहते हैं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बढ़ा हुआ जोखिम केवल गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल करने के दौरान दिखाई दिया और दवा बंद करने के बाद धीरे-धीरे कम हो गया। यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है यानी इसमें लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया है, इसलिए यह पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता कि दवा ही इसकी सीधी वजह है। फिर भी अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को देखते हुए दोनों के बीच संबंध होने की संभावना मजबूत लगती है।
 
  • आब्स्टट्रिशन एंड गायनेकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर जीनो पेकोरारो कहते हैं, यह अध्ययन डॉक्टर और मरीज के बीच सही जानकारी के आधार पर फैसला लेने में मदद करेगी। अगर कोई महिला इस खबर को लेकर चिंतित है तो वह डॉक्टर से सलाह लेकर दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकती है।



--------------
स्रोत:
Contraceptive Progestogens and Incident Meningioma


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें