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अपनी सुरक्षा के लिए महिलाएं अपनाएं ये उपाय

Thu, 03 Jan 2013 05:29 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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सड़क के किनारे चलते वक्त, बस या टैक्सी में सफर करते वक्त या अपने ही घर के आसपास, कभी भी और कहीं भी महिलाओं की सुरक्षा और शुचिता पर कोई भी असमाजिक तत्व हाथ डाल सकता है। दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद आज महिलाओं की सुरक्षा की गंभीरता को समझना और भी जरूरी हो चुका है।
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ऐसे में प्रशासन, समाज और सरकार के दायित्व के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि महिलाएं खुद आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा को लेकर मुस्तैद रहें जिसके लिए सेल्फ डिफेंस टेकनीक की सही जानकारी बहुत जरूरी है। तो चलिए, आज हम आपको उन उपायों की जानकारी दे रहे हैं जिन्हें अपनी जीवनशैली में शामिल करके महिलाएं किसी भी मुश्किल घड़ी का सामना करने के लिए खुद को पूरी तरह फिट बना सकती हैं।

योग से लाएं शरीर में फूर्ति
शरीर को फुर्तीला बनाने के लिए योग बहुत प्रभावी माध्यम है। इससे शरीर अधिक मजबूत और लचीला होता है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार, उत्तानपादासन, पर्वतासन, धनुरासन आदि को दिनचर्या में शामिल करने से शरीर लचीला, फुर्तीला और मजबूत रहता है।
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ध्यान और प्राणायाम से बढ़ाएं आत्मविश्वास
अगर आपमें भरपूर आत्मविश्वास हैं तो किसी भी परिस्थिति का सामना करने की ताकत आ ही जाती है। ऐसे में मानसिक तौर पर मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए भ्रामरी प्राणायाम, भ्रस्रिका प्राणायाम, ध्यान और श्वास संबंधी क्रियाएं बेहद फायदेमंद हैं। इन्हें दिनचर्या में शामिल करने से शरीर स्वस्थ रहता है और दिमाग तेजी से कार्य करता है।

सेल्फ डिफेंस तकनीक
अपनी सुरक्षा के लिए शरीर को मजबूत बनाना और खुद को एलर्ट रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है आत्मरक्षा की कला में निपुण होना। आजकल न सिर्फ स्कूलों में बल्कि फिटनेस सेंटर व हेल्थ क्लब्स में महिलाओं के लिए तरह-तरह के सेल्फ डिफेंस वर्कआउट्स होते हैं। जूडो, कराटे, टायक्वांडो, जुजित्सू, कुंग फू आदि ऐसी कई कलाएं हैं जिनका उपयोग मुश्किल समय में करके आत्मरक्षा की जा सकती है। खासतौर पर उस स्थिति में जब आप बिल्कुल निहत्थे हों, ये वर्कआउट्स आपके लिए बेहद मददगार साबित होंगे।   

समझें सिक्स्थ सेन्स के इशारे
अक्सर मुश्किल घड़ी में हमारा सिक्स्थ सेन्स हमें इशारे करता है कि हम कहां सुरक्षित हैं और कहा नहीं। महिलाओं का यह सिक्स्थ सेन्स और भी सजग होता है। तो अगर अपनी सुरक्षा को लेकर आपके मन में कोई भी संशय हो तो उसे दबाने के बजाय उसपर गौर करें। इसके लिए यह भी जरूरी है कि आप स्ट्रेस और टेंशन से मुक्त रहें और तुरंत निर्णय लेने के लिए हमेशा तैयार रहें। इससे अपने मन की आवाज को समझने में आसानी होगी और आप किसी अप्रत्याशित घटना का शिकार होने से बचेंगी।
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