स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'जीरो डोज' वाले बच्चों की संख्या में आई गिरावट का श्रेय यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) के माध्यम से टीकाकरण के बढ़ावा देने को दिया है। इसके तहत 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.6 करोड़ शिशुओं (0-1 वर्ष) को प्रतिवर्ष मुफ्त टीकाकरण सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
इस एक उपाय की मदद से बच्चों को पूरे जीवनकाल तक कई प्रकार की खतरनाक और संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित किया जा सकता है।
बीमारियों से बचाव में टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि टीकाकरण सबसे शक्तिशाली और लागत प्रभावी तरीका है जिसकी मदद से न सिर्फ हम लोगों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं साथ ही इन बीमारियों के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को भी कम किया जा सकता है।
बयान में कहा गया है, "हमारे स्वास्थ्य सेवाकर्मी आशा और एएनएम देशभर में 1.3 करोड़ से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित करते हैं। निरंतर, सतत प्रयासों और देशभर में टीकाकरण अभियान के परिणामस्वरूप 'जीरो डोज' वाले बच्चों की संख्या में कमी देखी गई है।
वैश्विक डेटा चिंता बढ़ाने वाले
नवीनतम (2020-22) रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर 2014-16 में 130/लाख जीवित जन्मों से घटकर 2020-22 में 88/लाख जीवित जन्म रह गई है।
गौरतलब है कि ये रिपोर्ट उस समय आई है जब हाल में द लैंसेट में प्रकाशित एक विश्लेषण में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि दुनियाभर में लाखों बच्चे जानलेवा बीमारियों के खतरे में हैं, उनमें पहले की तुलना में गंभीर और संक्रामक बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ गया है। कारण- स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं और गलत सूचना के चलते हाल के वर्षों में टीकाकरण कवरेज में आई कमी।
(यहां पढ़िए खबर- इस एक चूक ने बढ़ा दिया बच्चों में जानलेवा बीमारियों का खतरा, पांच दशकों की मेहनत पर फिरा पानी)
बच्चों के टीकाकरण में आई कमी
- फोटो : Amarujala.com
पिछले 10 साल में टीकाकरण की दर में गिरावट
विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि पिछले एक दशक में कई देशों में टीकाकरण की गति में काफी कमी आ गई है, लिहाजा बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले पांच दशकों (50 साल) में दुनियाभर में बच्चों के टीकाकरण को लेकर देखे गए बेहतर कवरेज के चलते करीब 154 मिलियन (15.4 करोड़) बच्चों की मौतों को रोका गया था। लेकिन साल 2010 के बाद से, कई देशों अचानक से टीकाकरण में गिरावट दर्ज की गई जिसके कारण बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 204 देशों में से 100 में खसरे के टीकाकरण की दर में गिरावट आई है। वहीं डिप्थीरिया, टिटनस, काली खांसी, पोलियो और टीबी के खिलाफ वैक्सीनेशन कवरेज 36 उच्च आय वाले देशों में से 21 में कम हो गया है। इसमें फ्रांस, इटली, जापान, यूके और यूएस जैसे देश भी शामिल हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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