अधिकतर बुजुर्गों को घेरने वाली बीमारी रेक्टल कैंसर अब युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है। रेक्टल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें मलाशय के ऊतकों में कैंसर कोशिकाएं बन जाती हैं। स्वास्थ्य इतिहास मलाशय के कैंसर के विकास के जोखिम को प्रभावित करता है। मलाशय के कैंसर के संकेतों में आंत में बदलाव या मल में रक्त शामिल है।
एक स्टडी के मुताबिक, रेक्टल कैंसर के मामले अब 50 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों में कम हो रहे हैं तो वहीं 20 से 30 साल की ऐज ग्रुप के लोगों में यह आंकड़ा बढ़ रहा है। यह बीमारी कोलोन या रेक्टल हिस्से को प्रभावित करती है, इसके अनुसार इसे कोलोरेक्टल कैंसर या रेक्टल कैंसर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
अमेरिका के जर्नल जेएएमए नेटवर्क ओपन में प्रकाशित स्टडी में इस बार पर चिंता जताई गई कि यह कैंसर न सिर्फ युवाओं को निशाना बना रहा है बल्कि इसके फैलने की रफ्तार भी बढ़ गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, 'हमें लगा था कि यह बीमारी कुछ सालों में कम हो जाएगी लेकिन इसके उलट हर साल युवाओं में इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं जो काफी चिंताजनक है'।
रिसर्च में सामने आया कि इससे पीड़ित युवा मरीजों की संख्या में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर डाला कि इस कैंसर के बढ़ने के इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह जानना जरूरी हो गया है कि आखिर युवाओं को यह बीमारी कैसे जकड़ रही है।
हालांकि, उन्होंने स्टडी में इस बात का जिक्र किया कि इस कैंसर के फैलने की वजह लाइफस्टाइल और मोटापा हो सकता है। वहीं टाइप 2 डायबीटीज भी इसे ट्रिगर कर सकती है। शोधकर्ताओं ने इस कैंसर को लेकर और जागरूकता फैलाने पर जोर दिया ताकि शुरुआती स्टेज में ही इसके बारे में पता लग सके और मरीज ठीक हो सके।