चीनी को लेकर आपने कई बातें सुनी होंगी। जिनमें से ज्यादातर नकारात्मक बातें ही सुनी होंगी। क्या आप जानते हैं चीनी कार्बोहाइड्रेट है। हमारे आहार में ऊर्जा का 50-60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट से मिलता है। सुक्रोज, फ्रक्टोज, ग्लूकोस और लैक्टोज ये कार्बोहाइड्रेट के रूप हैं, जिनमें से फ्रक्टोज (सफेद चीनी) सबसे मीठा होता है। आज हम आपको बताएंगे की चीनी से जुड़ा सच और मिथक क्या है।
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चीनी को मोटापे, मेटाबोलिक सिंड्रोम और डायबिटीज जैसी बीमारियों का जिम्मेदार ठहराया जाता है। हमारी सुस्त जीवन शैली चीनी के अधिक सेवन को प्रमुख रूप से दोषी बनाती है। ऐसी में लोगों का मानना है कि नियमित योग या एक्ससरसाइज करने से स्थिति सामान्य रहती है।
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यह शोध का मुद्दा है। हालांकि, संयमित रूप से खायी गयी कोई भी चीज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होती। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार, चीनी का अधिक उपभोग का परिणाम अस्थिरता, खाने की अधिक इच्छा और परिवर्तित मानसिक क्रियाएं होती हैं।
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आपको बता दें कि, चीनी मुक्त उत्पादों में फैट अधिक होता है और इसमें नकली मिठास का उपयोग किया जाता है जो सफेद चीनी की तुलना में कई गुना अधिक मीठा होता है। ऐसे उतपादों का इस्तेमाल स्वास्थ के लिए हानिकारक है।