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तकिया भी है खतरनाक, बन सकता है इन बीमारियों की वजह

Sat, 04 Jul 2020 11:51 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सोते समय तकिया लगाना आज भले ही लोगों की एक जरूरत बन गया है, लेकिन क्या आपको पता है कि ये जितने आरामदेह लगता है, उतना ही खतरनाक भी होता है। ये कई बीमारियों की वजह बन सकता है। अक्सर हम सोचते हैं कि तकिए जल्दी खराब थोड़ी होते हैं और इसीलिए हम सालों तक एक ही तकिये का इस्तेमाल करते रहते हैं। हालांकि ऐसा करना नहीं चाहिए, क्योंकि तकिए की भी एक 'एक्सपायरी डेट' होती है। उसके बाद उसे बदल लेना ही बेहतर होती है, नहीं तो वो कई बीमारियों को घर में ला सकता है और परेशानी खड़ी कर सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अक्सर हमारी आदत होती है कि हम सोने से पहले बालों में ढेर सारा तेल लगा लेते हैं और आराम से तकिए के ऊपर सिर रखकर सो जाते हैं, लेकिन हम ये नहीं सोचते कि बालों में लगा वो तेल तकिया भी सोख सकता है। हमें लगता है कि इससे सिर्फ तकिए का खोल (कवर) ही गंदा होता है और उसे निकालकर हम धो देते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। उस तेल को तकिए के अंदर भरा फाइबर भी सोख लेता है और हमेशा इस्तेमाल होने के कारण उसमें माइक्रोब्स यानी सूक्ष्म जीव पनपने लगते हैं। जब हम बार-बार एक ही तकिए पर सोते हैं तो वो सूक्ष्म जीव हमारी सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और हमें बीमार कर देते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जब हमें सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां होती हैं, तब भी हम उसी तकिए का इस्तेमाल करते हैं, जिसका इस्तेमाल हम पहले से करते आ रहे होते हैं। ऐसे में हमारी सांस और नाक से आने वाला पानी और मुंह से निकलने वाला लार हमारे तकिए पर चिपक जाता है और तकिया उसे सोख लेता है, जिससे बीमार करने वाले जीवाणु पैदा हो सकते हैं और हमें कभी भी बीमार कर सकते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अगर आपके चेहरे पर बार-बार पिंपल आ जाते हैं तो बेहतर होगा कि आप अपना तकिया बदल लें, क्योंकि वो तकिया इसकी वजह हो सकता है। दरअसल, जब हम काफी समय से एक ही तकिया इस्तेमाल कर रहे होते हैं तो धीरे-धीरे वो दब जाता है या फिर अंदर भरे फाइबर की अवस्था बदल जाती है। ऐसे में कभी-कभी हमारे गाल की त्वचा का सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है। साथ ही तकिए के अंदर पनप रहे बैक्टीरिया हमारे चेहरे पर हमला कर सकते हैं, जिससे पिंपल्स घटने के बजाए बढ़ सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तकिए के अंदर पनप रहे जीवाणुओं से हमें सर्दी-खांसी के अलावा कफ और बुखार आने की भी समस्या हो सकती है। इसके अलावा गर्दन अकड़ने और कंधे में दर्द जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। इसलिए बेहतर है कि तकिए को अक्सर धूप में सुखाएं, क्योंकि इससे तकिए के अंदर पैदा हुए जीवाणु मर जाएंगे। साथ ही यह भी जरूरी है कि कवर को कम से कम महीने में चार बार बदलें, ताकि उनसे जीवाणु पैदा न हो सकें। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा करके आप उस तकिए को हमेशा इस्तेमाल कर सकते हैं। बेहतर होगा कि हर 10-12 महीनों में अपना तकिया बदल लें। 
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