पीरियड्स में भारी बहाव के कारण दिनभर गीलेपन की वजह से रैशेज का खतरा बढ़ जाता है । इसलिए हर दो से तीन घंटे में सैनिटरी नैपकिन को बदल देना चाहिए । पूरे दिन एक ही सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करना रैशेज का प्रमुख कारण है । खासतौर पर गर्मियों के मौसम में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
बाजार में आने वाले विभिन्न तरह के पैड्स में से अपनी स्किन के अनुसार ही सैनेटरी पैड का चुनाव करना चाहिए । आमतौर पर कॉटन पैड्स को बेहतर माना जाता है । लेकिन हर महिला की त्वचा भिन्न होती है । यदि आपकी त्वचा किसी खास कपड़े के लिए संवेदनशील है तो उसका इस्तेमाल करने से आपको बचना चाहिए ।
पीरियड के दौरान साफ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए । स्किन संबंधित किसी भी समस्या से बचने के लिए सफाई सर्वोत्तम उपाय है । साथ ही पीरियड्स के दौरान ढीले कपड़ों का ही प्रयोग करना चाहिए ।
इन सारे उपायों से आप पीरियड्स के समय होने वाली रैशेज जैसी दिक्कतों से बच सकते हैं, लेकिन किसी भी समस्या को नजरअंदाज करना ऐसे समय में और भी खतरनाक हो सकता है । इसलिए रैशेज या अन्य कोई भी दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें ।
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