HKU5 वायरस और इसके कारण होने वाली दिक्कतें
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कोरोना जैसे एक नए वायरस का खतरा
अमेरिका स्थित वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं ने इस वायरस के एक समूह का अध्ययन किया है, जिसे मेरबेकोवायरस के रूप में जाना जाता है। ये मार्स सीओवी फैमिली का ही है। वैज्ञानिकों ने पाया कि अगर इस वायरस में कुछ और म्यूटेशन होते हैं तो ये तेजी से इंसानों को संक्रमित करने की क्षमता वाला हो सकता है।
वैज्ञानिकों की टीम ने इसको लेकर अध्ययन किया है ताकि बेहतर ढंग से समझा जा सके कि ये कोशिकाओं को कैसे संक्रमित करते हैं? और किस प्रकार के जोखिमों का कारण बन सकते हैं।
चमगादड़ों से फैल रहा एक नया वायरस
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एचकेयू5 का संक्रमण हो सकता है खतरनाक
वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा है कि वैसे तो अधिकांश मेरबेकोवायरस इंसानों के लिए सीधे खतरा नहीं पैदा करते हैं हालांकि इसके एचकेयू5 (HKU5) नामक एक उपसमूह का पता चला है जो चिंताजनक हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने कहा, एचकेयू5 वायरस, जो एशिया, यूरोप, अफ्रीका और मध्य पूर्व में पाए गए हैं वो इंसानों के संक्रमित करने के लिए बिल्कुल कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) की ही तरह से शरीर में ACE2 नामक एक होस्ट रिसेप्टर का उपयोग करते हैं।
वायरस में एक और म्यूटेशन से हो सकता है खतरा
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इस साल की शुरुआत से जारी है नए वायरस की चर्चा
एक छोटा सा अंतर ये है कि फिलहाल एचकेयू5 वायरस केवल चमगादड़ों में एसीई2 जीन का उपयोग कर सकता है, पर अगर इसमें म्यूटेशन होता है तो ये इंसानों के लिए खतरनाक साबित होने की पूरी क्षमता रखता है।
इस साल की शुरुआत में सामने आए एक अन्य अध्ययन में चीन में पाए जाने वाले एचकेयू5 वायरस का विश्लेषण किया गया था, जिसके इसे मिंक जानवर को संक्रमित करते हुए पाया गया था। वैज्ञानिकों ने कहा, ये मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इंसानों में इसके मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसकी आशंका जरूर है।
एक और महामारी की आशंका
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HKU5-CoV-2 और इसका जोखिम
स्थानीय चीनी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार वायरोलॉजिस्ट शि झेंगली के नेतृत्व वाली वाली टीम ने HKU5-CoV-2 की खोज की है। शि झेंगली को कोरोनावायरस पर अपने आजीवन काम के लिए "बैटवुमन" के नाम से भी जाना जाता है। विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि ये नया वायरस मेरबेकोवायरस सबजेनस से संबंधित है। मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (मर्स) को भी इसी से संबंधित माना जाता रहा है।
इस नए वायरस वायरस की प्रकृति को लेकर जर्नल सेल में प्रकाशित एक पेपर में वैज्ञानिकों ने लिखा "बैट मेरबेकोवायरस (HKU5-CoV-2) जो जेनेटिक रूप से MERS-CoV से संबंधित हैं, मनुष्यों में फैलने का उच्च जोखिम पैदा करता है। वायरस की संरचना और क्षमताओं के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि ये श्वसन तंत्र और छोटी आंत में संक्रमण बढ़ाने वाला हो सकता है।
मेरबेकोवायरस की मृत्यु दर लगभग 34 प्रतिशत बताई जाती है।
आने वाली है एक नई महामारी?
ये चर्चा लंबे समय से चलती आ रही है कि क्या कोरोना के बाद मार्स वायरस या इसके समूह के कारण एक और महामारी आ सकती है?
इस बारे में मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. माइकल ओस्टरहोम कहते हैं, यह अतिशयोक्तिपूर्ण है। साल 2019 में जब नोवेल कोरोनावायरस फैला था, उसकी तुलना में वैश्विक आबादी में अब सार्स और मर्स वायरस के प्रति बहुत अधिक प्रतिरक्षित हो गई है। ऐसे में एचकेयू5-सीओवी-2 के कारण भी महामारी आने का जोखिम होगा, इसकी आशंका फिलहाल नहीं है। हालांकि वायरस कितना खतरनाक हो सकता है इसको समझा जाना अभी बाकी है।
हमें इसमें होने वाले म्यूटेशंस पर गंभीरता से नजर बनाए रखने की आवश्यकता है, क्योंकि इसे बड़े खतरे के तौर पर जरूर देखा जा रहा है।
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स्रोत और संदर्भ
New coronavirus discovered in China ‘only small step’ from infecting humans
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