शोधकर्ताओं ने वायरस जैसे कणों (वीएलपी) का उपयोग करके वायरस की जांच की, जो सार्स सीओवी 2 प्रोटीन की संरचनात्मक विशेषताओं की नकल करते हैं। जेनिफर डौडना, मैलानी ओट और उनके सहयोगियों ने जिन चार वेरिएंट के बीच तुलना की, उसमें बी.1, बी.1.1, डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट शामिल है। बी.1, बी.1.1, डेल्टा और ओमिक्राॅन के वीएलपी का मूल्यांकन कोविड-19 से बचे 38 लोगों के एंटीसेरा नमूनों के खिलाफ किया था। जिसमें टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले दोनों तरह के लोग शामिल थे।
मूल बी.1 स्ट्रेन के विपरीत, दो टीके लग चुके एक शख्स में ओमिक्रॉन को बेअसर करने में 15 गुना कम प्रभावी क्षमता मिली। फिर भी 16 से 21 दिनों के भीतर तीसरा एमआरएनए टीका प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों में ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ इन विट्रो तटस्थ गतिविधि में काफी वृद्धि हुई। वर्तमान में उपलब्ध चार मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी-कैसिरिविमैब, इमदेविमैब, सोट्रोविमैब और बेबेटलोविमैब की इन विट्रो न्यूट्रलाइजिंग पोटेंसी का लेखकों ने मूल्यांकन किया। उन्होंने पाया कि ओमिक्रॉन के खिलाफ केवल बेबेटलोविमैब ही काफी प्रभावी था।
निष्कर्षों के मुताबिक, लेखकों का अनुमान है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट विशेष रूप से आंशिक तौर पर संक्रामक हो सकता है क्योंकि इसे बेअसर करना कठिन है। शोधकर्ताओं ने एक मौजूदा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी भी पाया, जो इन विट्रो में भिन्नता को बेअसर कर सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
New study finds out why Omicron variant is highly transmissible
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