इस बारे में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डाॅ. विनोद कुमार पाॅल ने आईसीएमआर मानक उपचार कार्यप्रणाली खंड तीन किताब जारी की है, जिसमें 11 चिकित्सकीय विशिष्टताओं से तहत 54 रोगों के बारे में दिशा निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एक मोबाइल ऐप भी लाॅन्च किया गया है।
इस मौके पर आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल और डीएचआर सेक्रेटरी प्रोफेसर बलराम भार्गव कहते हैं, उत्कृष्ट कार्य कर रहे प्राइमरी केयर चिकित्सक मुख्य रूप से बाहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हैं। मानक उपचार कार्यप्रणाली इन डॉक्टरों को अपडेट रखेगा और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए तरीके के बारे में दिशा निर्देश देगा।
साल 2019 में वाॅल्यूम 1 और इसी साल मार्च में वाॅल्यूम 2 जारी
प्रोफेसर पॉल ने बताया कि मानक उपचार कार्यप्रणाली को ऑपरेशनल रिसर्च मोड और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के विभिन्न स्तर पर आकलन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत प्रसार रणनीति में कई हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय प्रसार की योजना बनाई जानी चाहिए। आईसीएमआर ने साल 2019 में 53 स्थितियों के साथ वॉल्यूम-I और इसी साल मार्च में ट्यूबरक्लोसिस पर केंद्रित 18 स्थितियों के साथ वॉल्यूम-II जारी किया था।
कहा गया कि बढ़ते नए वैज्ञानिक साक्ष्य और स्वास्थ्य देखभाल के लिए बढ़ते खर्च को देखते हुए चिकित्सकों के लिए नियमित रूप से साधारण मानक उपचार कार्यप्रणाली और संदर्भ मैनुअल की जरूरत महसूस की गई। इस बाबत नवीनतम सरल मानक उपचार कार्य प्रणाली हेल्थ केयर की गुणवत्ता पर केंद्र में रखते हुए हर स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेगी।
स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को बेहतर बनाना उद्देश्य
आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लोकेश शर्मा कहते हैं “एसटीडब्ल्यू यानी सरल मानक उपचार कार्यप्रणाली का विकास करना आईएमआरसी के लिए मिशन मोड परियोजना है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सभी स्तरों पर इलाज करने वाले चिकित्सकों द्वारा सामान्य और गंभीर बीमारियों का दिशानिर्देश है। दवाओं के प्रबंधन, उपचार और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के तर्कसंगत उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एसटीडब्ल्यू की जरूरत है।
उम्मीद की गई कि ये संसाधन स्तरीकृत उपचार कार्यप्रणाली प्राथमिक, माध्यमिक और त्रिस्तरीय लेवल पर काम करने वाले चिकित्सकों के लिए उपयोगी होगी और संसाधनों के उपयोग में मदद करेगी। प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि भारतीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत, पोषण अनुपूरक योजना, इन्द्रधनुष योजना आदि जैसी कई योजनाओं के जरिए यह सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) को हासिल करने में मदद करेगा।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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