फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CoronaVirus: भारत में कोरोना वायरस के 73 नए स्वरूपों की पहचान, मरीजों के इलाज में मदद करेगा यह शोध

Sat, 15 Aug 2020 02:38 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
Coronavirus New Research - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच कई देशों में इसकी वैक्सीन और दवाओं को लेकर अच्छी खबरें सामने आई हैं। वहीं, इस वायरस की प्रकृति और प्रभाव समझने के लिए वैज्ञानिक और शोधकर्ता लगातार शोध में लगे हैं, ताकि इसके उपचार में मदद मिल सके। इसी कड़ी में भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के 73 नए स्वरूपों की पहचान की है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अंतर्गत शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने इसका पता लगाया है। टीम का दावा है कि वायरस की विस्तृत प्रकृति का पता लग जाए तो कोविड-19 के इलाज में बहुत मदद मिलेगी। 
विज्ञापन

2 of 8
कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • दरअसल, जीनोम का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों की एक टीम ने ओडिशा में कोरोना स्ट्रेन के इन 73 स्वरूपों की पहचान की है, जो बिल्कुल नए हैं। सीएसआईआर- जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (IGIB), नई दिल्ली और चिकित्सा विज्ञान संस्थान व एसयूएम अस्पताल, भुवनेश्वर के विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस के बारे में यह पड़ताल की है।
विज्ञापन

3 of 8
कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • प्रमुख अनुसंधानकर्ता और आईएमएस एवं एसयूएम अस्पताल के निदेशक (रिसर्च) डॉ. जयशंकर दास के मुताबिक, टीम ने 752 क्लिनिकल नमूने समेत 1536 नमूनों का अनुक्रम तैयार किया। उन्होंने बताया कि भारत में पहली बार कोरोना वायरस के B-1.112 और B-1.99 स्वरूप मिले हैं। 

4 of 8
coronavirus in jammu kashmir, covid-19, plasma therapy in Srinagar, doctor donated plasma - फोटो : अमर उजाला
  • डॉ. दास का कहना है कि कोरोना वायरस की विस्तृत प्रकृति का पता लगाया जाए तो मरीजों का उपचार करने और उनके ठीक होने में बहुत मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं की टीम को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की मदद मिली है। 
विज्ञापन

5 of 8
coronavirus in maharashtra - फोटो : पीटीआई
10 देशों के 12 संगठनों से आगे निकला भारत
  • डॉ. दास ने सीक्वेंस के संबंध में प्रौद्योगिकी कंपनी इलुमिना की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस नए अध्ययन से भारत ने अनुसंधान की पुष्टि और डाटा को ऑनलाइन तरीके से जारी कर 10 देशों में 12 संगठनों को पीछे छोड़ दिया है।
विज्ञापन

6 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • उन्होंने बताया कि आईएमएस और एसयूएम अस्पताल के अनुसंधानकर्ता भी जीनोम सीक्वेंसिंग का काम कर रहे हैं। शोधकर्ता हल्के, मध्यम और गंभीर स्तर के संक्रमण को समझने के लिए 500 वायरस जीनोम का विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे संक्रमण के प्रसार पता करने और समझने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन

7 of 8
कोरोना वायरस वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
  • डॉ. दास ने कहा कि इस अध्ययन से पूर्वी भारत में वायरस के स्वरूप के प्रभाव, नुकसान और प्रसार को समझने में आसानी होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के तेजी से हुए प्रसार को देखते हुए इसके निदान के लिए सार्स-कोव-2 के जीनोम को ज्यादा से ज्यादा जानना और समझना जरूरी है। 
विज्ञापन

8 of 8
कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : iStock
  • डॉ. दास ने कहा कि इस अध्ययन से पूर्वी भारत में वायरस के स्वरूप के प्रभाव, नुकसान और प्रसार को समझने में आसानी होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के तेजी से हुए प्रसार को देखते हुए इसके निदान के लिए सार्स-कोव-2 के जीनोम को ज्यादा से ज्यादा जानना और समझना जरूरी है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें