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Monkeypox: क्या सेक्स करने से फैल रहा है मंकीपॉक्स? जानिए डब्ल्यूएचओ के डॉक्टर ने क्या कहा

Sun, 24 Jul 2022 02:15 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स संक्रमण के प्रसार पर डब्ल्यूएचओ ने दी जानकारी - फोटो : istock
दुनियाभर के 75 देशों में मंकीपॉक्स के 16 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। भारत में भी मंकीपाॅक्स के केस बढ़ रहे हैं। सबसे पहले 14 जुलाई को दक्षिण केरल में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था। उसके बाद से कई मामले सामने आने के बाद दिल्ली में मंकीपॉक्स का नया केस आया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस का इस बारे में कहना है कि इस बीमारी का प्रकोप तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है। यह किन माध्यमों से फैल रहा है इसके बारे में हमें अभी बहुत कम जानकारी है। हालांकि मंकीपॉक्स के तेजी से फैलते मामलों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जाहिर करते हुए वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इस मुद्दे पर डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों को गंभीर होने का आह्वान किया है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्स के फैलने की वजह पुरुषों के बीच यौन संबंध को बताते हुए मानवाधिकारों और प्रभावित समुदाय के लोगों की गरिमा का खास ध्यान रखने की सलाह दी है।
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डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह - फोटो : एएनआई
पुरुषों के बीच यौन संबंधों से मंकीपाॅक्स का प्रसार 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की रीजनल डायरेक्टर के तौर पर चुनी गईं पहली भारतीय डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने तेजी से फैल रहे मंकीपॉक्स को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जोखिम वाली आबादी के बीच पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों में केंद्रित मामलों के साथ, इस बीमारी के प्रसार को कम करना संभव है।
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मंकीपॉक्स वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित - फोटो : istock
मंकीपाॅक्स सार्वजनिक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित

डब्ल्यूएचओ की रीजनल डायरेक्टर डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने अपने बयान में कहा कि मंकीपॉक्स के मामले उन देशों में तेजी से सामने आ रहे हैं जिन्होंने इसे पहले नहीं देखा है, यह बहुत चिंता की बात है। हालांकि, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों में केंद्रित मामलों के साथ, इस बीमारी के प्रसार को कम करना संभव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों से मंकीपॉक्स के लिए निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मजबूत करने का आह्वान करते हुए इस बीमारी को सार्वजनिक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

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समलैंगिक पुरुषों में मंकीपाॅक्स के केस ज्यादा - फोटो : Pixabay
संक्रमण वाले 98 फीसदी लोग समलैंगिक पुरुष 

मंकीपाॅक्स को लेकर शहरों के निवासी रोगियों के चिकित्सीय रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर पाया गया कि मंकीपॉक्स संक्रमण वाले 98 फीसदी लोग समलैंगिक या उभयलिंगी पुरुष थे। इनकी औसतन आयु 38 वर्ष है। साथ ही अधययन में पता चला कि करीब 95 फीसदी लोग यौन संबंधों के दौरान एक दूसरे से संक्रमित हुए। लेकिन विशेषज्ञों ने अध्ययन में साफ तौर पर कहा है कि इससे समलैंगिक समुदाय के खिलाफ गलत भावना नहीं आनी चाहिए। यह एक स्थिति है जो किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है।

अध्ययन में यह भी पता चला है कि मंकीपॉक्स संक्रमित सभी मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। करीब 13 फीसदी रोगियों को भर्ती करना पड़ा था जिनमें चकत्ते, बुखार, सुस्ती, मायलागिया सिरदर्द और लिम्फ नोड्स की सूजन इत्यादि लक्षण दिखाई दे रहे हैं।मंकीपॉक्स डीएनए वायरस है और 32 में से 29 संक्रमित रोगियों के वीर्य द्रव जांच में यह मिला है। 
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मंकीपॉक्स से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी - फोटो : istock
मंकीपाॅक्स के वायरस की जानकारी कम

मंकीपॉक्स को लेकर क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सिंह का कहना है कि बीमारी को लेकर हम सभा का केंद्रित प्रयास और उपाय संवेदनशील व भेदभाव रहित होना चाहिए। हालांकि वैश्विक स्तर पर और इस क्षेत्र में मंकीपॉक्स का जोखिम अंतरराष्ट्रीय प्रसार की संभावना को बढ़ाता है। इसके अलावा, वायरस के बारे में अभी तक अधिक जानकारी नहीं है। ऐसे में हमें मंकीपॉक्स को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है और इस बीमारी के प्रसार को कम करने के लिए तैयार रहना होगा।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : सोशल मीडिया
डब्ल्यूएचओ लगातार कर रहा प्रयास 

जब से इस बीमारी की शुरुआत हुई, डब्ल्यूएचओ अधिक जोखिम वाले देशों को सपोर्ट करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का आकलन करने के साथ इस क्षेत्र में परीक्षण क्षमताओं का निर्माण व सुविधा प्रदान करने में सहायता कर रहा है।  
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मंकीपाॅक्स पर डब्ल्यूएचओ की चेतावनी - फोटो : amar ujala
संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयास जारी

डाॅ. सिंह ने कहा, प्रभावित समुदायों की रक्षा के लिए निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायो को तेज करना, अस्पतालों और क्लीनिकों में नैदानिक प्रबंधन और संक्रमण की रोकथाम व नियंत्रण को मजबूत करने के लिए टीकों, चिकित्सा विज्ञान और अन्य उपकरणों के उपयोग में अनुसंधान में तेजी लाना, ये सब उन प्रमुख उपायों में से हैं जिन्हें बढ़ाने की जरूरत है। 

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मंकीपाॅक्स त्वचा या घावों के सीधे संपर्क से फैलता है - फोटो : सोशल मीडिया
जानवरों से मनुष्यों तक पहुंचता है मंकीपाॅक्स

कहा गया कि मंकीपॉक्स वायरस संक्रमित जानवरों से मनुष्यों में अप्रत्यक्ष या सीधे संपर्क के माध्यम से फैलता है। मानव-से-मानव ट्रांसमिशन संक्रामक त्वचा या घावों के सीधे संपर्क के जरिए हो सकता है। मंकीपॉक्स के ट्रांसमिशन में आमने-सामने से सीधे, त्वचा से त्वचा और श्वसन के संपर्क में आना शामिल हैं।

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मंकीपॅाक्स के प्रसार का मुख्य जरिया शारीरिक संपर्क - फोटो : istock
यौन संपर्क ट्रांसमिशन का एक मुख्य कारण

जिन देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं, वहां ट्रांसमिशन मुख्य रूप से निकट शारीरिक संपर्क के माध्यम से हुआ है, जिसमें यौन संपर्क भी शामिल है। इसके अलावा संक्रमण का प्रसार दूषित सामग्री जैसे लिनेन, बिस्तर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों से भी हो सकता है, जो त्वचा के संपर्क में आते हैं।
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टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने मंकीपाॅक्स पर दी चेतावनी - फोटो : Facebook
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने मंकीपाॅक्स पर कहा

वहीं डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस एडनॉम घेब्रेयसस ने हाल ही में कहा, 'मैंने तय किया है कि वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थित है।' भारत के तीन और थाईलैंड के एक मंकीपॉक्स के मामले समेत दुनिया के 75 देशों में मंकीपॉक्स के 16000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वहीं भारत के मामले में उन नागरिकों को शामिल किया गया है जो मध्य पूर्व से स्वदेश लौटे हैं, जबकि थाईलैंड के मामले में देश में रहने वाले विदेशी व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई थी।
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नोट: ये लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह और डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक के बयान के आधार पर तैयार की गई है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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