भारत में मंकीपॉक्स के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच मंकीपॉक्स को लेकर एक नई अध्ययन रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मंकीपॉक्स न्यूरोलॉजिकल और मानसिक समस्याओं का भी कारण बन सकता है। मंकी पॉक्स से ग्रसित मरीज की त्वचा पर चकत्ते पड़ जाते हैं। हालांकि मंकीपॉक्स से बचाव के लिए चेचक का टीका असरदार है। लेकिन जिन मरीजों को चेचक का टीका लग चुका है, उनमें तंत्रिका विकार जैसी समस्याएं सामने आने की खबरें हैं।
लंदन के क्वीन मैरी विश्वविद्यालय के एकेडमिक फाउंडेशन के डॉक्टर जेम्स ब्रंटन बैडेनोच ने इस अध्ययन को लेकर बताया कि मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में तंत्रिका संबंधी या मानसिक समस्याओं का पता लगाने के लिए अध्ययन किया गया। जिसके नतीजे 'इक्लिनिकल मेडिसिन' प्रकाशित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मंकीपॉक्स की चपेट में मरीजों में तंत्रिका संबंधी समस्याएं विकसित हो गईं, जिनमें इंसेफेलाइटिस यानी मस्तिष्क की सूजन भी शामिल है।
मस्तिष्क की गंभीर और दुर्लभ समस्याओं के साथ ही मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान आदि लक्षण पाए जाते हैं। हालांकि अध्ययनों को देखने से यह स्पष्ट नहीं पता चलता है कि लक्षण कितने गंभीर हैं। मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में तंत्रिका संबंधी समस्याओं के कारणों का भी पता नहीं चल सका।
मंकीपाॅक्स की समस्याओं में अंतनिर्हित जैविक प्रक्रियाएं अस्पष्ट हैं और वायरस सीधे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। ज्यादातर आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में मंकीपाॅक्स के मामले पाए जा रहे हैं।
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