बाउल कैंसर का कम हो सकेगा खतरा
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बाउल और ओवेरियन कैंसर को रोक सकती है ये वैक्सीन
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाउल और ओवेरियन कैंसर से बचाव वाली इस वैक्सीन के जल्द ही ट्रायल शुरू होने वाले हैं, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या ये वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इस तरह से तैयार कर सकती है कि वह कैंसर बनने से पहले ही संदिग्ध और असामान्य कोशिकाओं (सेल्स) को पहचानकर खत्म कर दे?
- यह ट्रायल खासतौर पर उन लोगों पर किया जाएगा जिन्हें लिंच सिंड्रोम नाम की आनुवंशिक स्थिति है।
- लिंच सिंड्रोम शरीर में कई प्रकार के कैंसर जैसे पेट या आंत (कोलोरेक्टल कैंसर) और गर्भाशय (एंडोमेट्रियल) कैंसर होने के जोखिम 80 प्रतिशत तक बढ़ा देती है।
- जीन में म्यूटेशन के कारण ये खतरा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलता जाता है।
- आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि अकेले इंग्लैंड में लगभग 1.75 लाख लोग इस सिंड्रोम से प्रभावित हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 5 प्रतिशत लोगोंयानी करीब 10 हजार लोगों को ही पता है कि उन्हें यह समस्या है।
कैंसर से बचाने वाली वैक्सीन का ट्रायल
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इम्यून सिस्टम को कैंसर के खिलाफ तैयार करेगी ये वैक्सीन
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना के सहयोग से ये ट्रायल किया जाना है जिसमें प्रतिभागियों को mRNA-4194 नाम की वैक्सीन दी जाएगी।
- इसके बाद वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि उनके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कैसी प्रतिक्रिया देती है, कौन-सी खुराक सबसे बेहतर रहती है और क्या यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है?
- अध्ययन का दूसरा चरण 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसमें ऑक्सफोर्ड सहित ब्रिटेन के कई चिकित्सा केंद्र शामिल होंगे, ताकि बड़े स्तर पर वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा को परखा जा सके।
- इस पूरे ट्रायल का मुख्य उद्देश्य इम्यून सिस्टम को पहले से तैयार करना है। यानी शरीर को यह सिखाना कि कौन-सी कोशिकाएं आगे चलकर कैंसर में बदल सकती हैं और उन्हें शुरुआती चरण में ही खत्म कर देना है।
कैंसर के खिलाफ लड़ाई में मिली बड़ी कामयाबी
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क्या कहते हैं शोधकर्ता?
प्रमुख शोधकर्ता और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च यूके के वरिष्ठ प्रोफेसर डेविड चर्च बताते हैं कि लिंच सिंड्रोम वाले लोगों में जीवनभर कैंसर का खतरा बना रहता है।
- कई बार ऐसा भी देखा गया है कि किसी महिला को पहले गर्भाशय में कैंसर हुआ और कुछ साल बाद उसे बाउल कैंसर हो गया। या फिर पहले बाउल कैंसर और बाद में कोई दूसरा कैंसर विकसित हो सकता है।
- प्रोफेसर चर्च का कहना है कि वैक्सीन के लिए जिन जैविक लक्ष्यों (टारगेट्स) को चुना गया है, वे लिंच सिंड्रोम से जुड़े कई तरह के कैंसरों में समान रूप से पाए जाते हैं।
- यदि यह वैक्सीन सफल रहती है, तो यह एक साथ कई प्रकार के कैंसरों से सुरक्षा देने में मदद कर सकती है।
शरीर में कैंसर बनने ही नहीं देगी ये वैक्सीन
लिंच सिंड्रोम वाले लोगों में समय के साथ कोशिकाओं के भीतर कई तरह के म्यूटेशन होते रहते हैं। यही बदलाव कोशिकाओं को कैंसर में बदलने की आशंका बढ़ा देते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि इन बदलावों को प्रतिरक्षा प्रणाली पहचान सकती है । यदि इम्यून सिस्टम को सही तरीके से प्रशिक्षित और सक्रिय किया जाए, तो वह इन असामान्य कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें कैंसर बनने से पहले ही खत्म कर सकता है।
- प्रोफेसर चर्च के अनुसार यह mRNA वैक्सीन शरीर को ये पहचानने में मदद कर सकती है कि किन संदिग्ध कोशिकाओं को पहचानना है और उन पर हमला कैसे करना है?
- अगर यह साबित हो जाता है कि इम्यून सिस्टम को कैंसर से जुड़ी आनुवंशिक गड़बड़ियों को पहचानने और उनके खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है, तो यह तरीका दूसरे प्रकार के कैंसरों की रोकथाम में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
अगर यह वैक्सीन सफल साबित होती है, तो चिकित्सा विज्ञान में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि हो सकती है। अब तक ज्यादातर कैंसर का इलाज तब शुरू होता है जब बीमारी सामने आ चुकी होती है, लेकिन यह वैक्सीन पहली बार कैंसर को बनने से पहले ही रोकने की दिशा में उम्मीद जगाती है।
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स्रोत:
Vaccines for cancer prevention
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