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AI Vaccine: वैज्ञानिकों ने एआई की मदद से बनाई 'यूनिवर्सल वैक्सीन', फ्लू हो या कोरोना ये सब पर असरदार

Sun, 07 Jun 2026 06:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे संभावित महामारी पैदा करने वाले वायरसों से लोगों को बीमारी होने से पहले ही बचाया जा सकता है। इस तकनीक को यूनिवर्सल वैक्सीन कहा जा रहा है। भले ही वायरस के स्ट्रेन क्यों न बदल जाएं ये आपको तब भी सुरक्षा देती रहेगी।
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एक वैक्सीन देगी कई वायरस से सुरक्षा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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बीते वर्षों में वैश्विक स्तर पर कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा देखा गया। साल 2020-23 तक कोरोना महामारी हो या फिर मौजूदा समय में नया खतरा बनकर उभर रहा इबोला वायरस, ये सभी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का कारण रहे हैं। इन वायरल रोगों से बचाव के लिए वैक्सीन को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता रहा है। कोरोना के दौर में वैज्ञानिकों की टीम ने काफी तेजी से टीके बनाकर लोगों का जान बचाई, हालांकि इबोला को लेकर सबसे बड़ी चिंता ही यही है कि इसके मौजूदा स्ट्रेन से सुरक्षा के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

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इस बीच कई अध्ययन लगातार इस बात को लेकर भी अलर्ट करते रहे हैं कि जिस तरह से जानवरों और इंसानों का संपर्क बढ़ता जा रहा है, इसने जूनोटिक रोगों को अब काफी आम कर दिया है। ऐसे में हमें भविष्य में और भी खतरनाक संक्रामक रोगों को लेकर अलर्ट रहने की जरूरत है। 

अब कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया की, जहां वायरस के फैलने का इंतजार न करना पड़े, न ही हर बार नई महामारी आने पर डर के साए में जीना पड़े। वैज्ञानिक और डॉक्टर हमेशा वायरस के पीछे-पीछे भागने के बजाय, एक कदम आगे हों।
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कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अब इसी दिशा में एक ऐसी खोज का दावा किया है, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्था को बदल सकती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से एक ऐसी यूनिवर्सल वैक्सीन तैयार कर ली है, जो फ्लू हो या कोरोना या फिर चमगादड़ों से भविष्य में फैलने वाली कोई भी वायरल बीमारी, इन सबके खिलाफ सुरक्षा दे सकती है।

तमाम संक्रामक रोगों से बचाव के लिए वैक्सीन - फोटो : Adobe Stock Photos
भविष्य की महामारी से बचाने वाला सुपर-एंटीजन

इस खबर ने संक्रामक रोगों के खिलाफ लड़ाई में एक नई उम्मीद जगा दी है। चाहे कोरोना जैसा खतरनाक वायरस हो या इबोला जैसे घातक संक्रमण, दावा किया जा रहा है कि ये यूनिवर्सल वैक्सीन सभी से आपकी रक्षा कर सकती है। इस वैक्सीन को सभी प्रकार के कोरोनावायरस पर काम करने के लिए बनाया गया था। इसमें कोविड के सभी वैरिएंट्स के साथ-साथ वे वायरस भी शामिल हैं जो अभी जानवरों को संक्रमित करते हैं, लेकिन भविष्य में नई महामारी पैदा करने की क्षमता रखते हैं। फिलहाल इसे सरबेकोवायरस (कोरोना वायरस फैमिली) पर टेस्ट किया गया है।

अब तक वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया हमेशा मौजूदा वायरस स्ट्रेन्स पर आधारित होती थी, यानी वैज्ञानिक तब टीके बनाने पर काम शुरू करते थे जब वायरस पहले ही फैल चुका होता था। लेकिन इस नई तकनीक में कहानी बदलती नजर आ रही है। 


वैज्ञानिकों का कहना है कि एआई द्वारा बनाए गए इस सुपर-एंटीजन की मदद से शरीर के इम्यून सिस्टम को इस तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है कि वह सिर्फ मौजूदा नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाले संभावित संक्रमण को न सिर्फ पहचान सके बल्कि पहले से ही शरीर में एक ढाल तैयार कर लोगों को सुरक्षा दे सके।

एआई का इस्तेमाल करके बना 'सुपर-एंटीजन' - फोटो : Adobe Stock
बदल जाए वायरस का स्ट्रेन, फिर भी चिंता नहीं

ये इतिहास में पहली बार है जब वैज्ञानिकों की टीम ने एआई का इस्तेमाल करके एक 'सुपर-एंटीजन' तैयार किया है जो कई तरह के वायरस से लंबे समय तक सुरक्षा दे सकता है, भले ही वे वायरस का स्ट्रेन क्यों ने बदल जाए।
 
  • अब तक के टीके सीमित सुरक्षा देते हैं और उन्हें समय-समय पर अपडेट और बूस्टर के रूप में दोबारा लगाना पड़ता है।
  • लेकिन यह नई तकनीक वायरस के बदलने से पहले ही सुरक्षा दे सकती है, जिससे महामारी फैलाने वाले नए स्ट्रेन्स को शुरुआत में ही रोका जा सकता है।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वेटेरिनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट की 'लैब ऑफ वायरल जूनोटिक्स' के मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर जोनाथन हीनी कहते हैं, ''हमने वैक्सीन बनाने के तरीके को रिएक्टिव (समस्या आने पर प्रतिक्रिया देने वाला) से बदलकर 'फ्यूचर-प्रूफ' (भविष्य के लिए सुरक्षित) करने का प्रयास किया है।'' 

एक वैक्सीन देगी कई रोगों से सुरक्षा - फोटो : Freepik.com
ट्रायल में क्या पता चला?

जर्नल ऑफ इन्फेक्शन में इस क्रांतिकारी नई वैक्सीन के पहले ह्यूमन ट्रायल के नतीजे भी प्रकाशित किए गए हैं।

ये उम्मीद जगाते हैं कि ये वैक्सीन सुरक्षित है, शरीर पर इसका असर अच्छा है और इसके साइड-इफेक्ट्स भी बहुत कम हैं। हालांकि ट्रायल का सैंपल साइज अभी काफी छोटा है।
 
  • इस परीक्षण में 18-50 की उम्र के 39 लोगों को एक यूनिवर्सल सारबेको कोरोनावायरस वैक्सीन दी गई, जो सार्स-सीओवी-2, सार्स और कई संबंधित चमगादड़ों से फैलने वाले वायरस को कवर करती है।
  • अध्ययन में  पाया गया कि इस वैक्सीन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ने न केवल सार्स-सीओवी-2 और सार्स  के खिलाफ प्रतिक्रिया दी, बल्कि उन बैट वायरसों के खिलाफ भी प्रतिक्रिया दी जो भविष्य में जानवरों से इंसानों में आ सकते हैं।
  • हालांकि अभी इस तकनीक को और आगे विकसित करने की जरूरत है। इसका फेज-2 ट्रायल अधिक बड़े और विविध समूह पर किया जाएगा ताकि इसकी क्षमता को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
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यूनिवर्सल वैक्सीन ने बढ़ाई उम्मीद - फोटो : Adobe Stock Photos
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सॉउल फॉस्ट कहते हैं, फ्लू, कोरोनावायरस और इबोला जैसे वायरस लगातार बदलते रहते हैं, जिससे पारंपरिक टीके अक्सर मेल नहीं खा पाते। यह नई यूनिवर्सल वैक्सीन तकनीक भविष्य के लिए तैयार है। ऐसी वैक्सीन किसी महामारी में लाखों जानें बचा जा सकती हैं, लॉकडाउन रोके जा सकते हैं और अर्थव्यवस्था को नुकसान से बचाया जा सकता है।

वर्तमान में वैश्विक स्वास्थ्य के लिए इबोला बड़ी चिंता के रूप में उभर रहा है। यूगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में नए प्रकोप से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं और लगभग 260 लोगों की मौत हो चुकी है। 
 
  • इस समय इबोला को लेकर चिंता ही यही है कि इसके मौजूदा बुंडिबुग्यो  स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। 
  • भविष्य में इस तरह की स्थितियों में ये नई  यूनिवर्सल वैक्सीन काफी मददगार साबित हो सकती है।
  • हालांकि ये वैक्सीन कितनी असरदार है, विभिन्न स्थितियों लोगों को लिए ये कितनी कारगर साबित हो सकती है, इसको समझने के लिए अभी विस्तृत ट्रायल्स जरूरी हैं। हालांकि शुरुआती नतीजों ने उम्मीद जरूर जगा दी है।


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स्रोत:
A phase I, needle free, dose escalation clinical trial of pEVAC-PS, a candidate pan-Sarbecovirus Vaccine


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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