ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी की समस्या (सांकेतिक)
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ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के बारे में जानिए
ग्रोथ हार्मोन की कमी (जीएचडी) की स्थिति के शिकार लोगों में हाइट न बढ़ने की समस्या सबसे अधिक देखी जाती रही है। यह बौनेपन का कारण बन सकती है। इसके शिकार बच्चों का कद सामान्य शरीर के अनुपात में छोटा रह जाता है। यह समस्या जन्मजात हो सकती है या फिर इसके बाद में भी विकसित होने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ कारणों से पिट्यूटरी ग्रंथि से ग्रोथ हार्मोन का बनना काफी कम हो जाता है। इसके लिए आनुवंशिक दोष, मस्तिष्क की गंभीर चोट या जन्म से ही पिट्यूटरी ग्रंथि न होने की स्थिति को कारण माना जा सकता है।
ग्रोथ हार्मोन की कमी और जटिलताएं
एक अनुमान के मुताबिक करीब सात हजार नवजात में से एक में इस प्रकार के विकारों का जोखिम होता है। ग्रोथ हार्मोन की कमी के कारण न सिर्फ शरीर की लंबाई कम हो सकती है साथ ही दिमाग का विकास भी प्रभावित हो सकता है। जीएचडी की समस्या जन्मजात या फिर बाद में भी विकसित हो सकती है, जिसका समय पर निदान करके इलाज के माध्यमों से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है। जिन लोगों को यह समस्या होती है उनमें शरीर की लंबाई कम रह जाना, लड़कियों में स्तन के विकास या भी यौनावस्था से संबंधित कई तरह की समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन थेरपी (सांकेतिक)
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ग्रोथ हार्मोन की कमी का इलाज संभव
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अगर समय रहते जीएचडी की स्थिति का निदान कर लिया जाए तो इसमें सुधार किया जा सकता है। 1980 के दशक के मध्य से, बच्चों और वयस्कों के इलाज के लिए सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन थेरपी को प्रयोग में लाकर सफलता पाई गई है। ग्रोथ हार्मोन इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है, इससे अंगों और मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं ने इस थेरपी के कुछ दुष्प्रभावों के बारे में भी अलर्ट किया है। दीर्घकालिक रूप से ग्रोथ हार्मोन थेरपी इंजेक्शन के कारण मधुमेह की समस्या देखी गई है, हालांकि इसमें आनुवांशिकता वाले लोगों में जोखिम अधिक होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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