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कोरोना वायरस को लेकर आपके मन में भी हैं ये 17 सवाल? डॉ. सुचित्रा जैन से जानें इनके जवाब

Tue, 20 Oct 2020 01:16 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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All About Coronavirus: कोरोना को लेकर हमारे मन में हर दिन कई सारे सवाल उठते रहते हैं - फोटो : Amar Ujala
कोरोना का संक्रमण काल चल रहा है और ऐसे में हमारे मन में हर दिन कई सारे सवाल उठते रहते हैं। मन में कई सारी उलझनें होती हैं। यह फैलता कैसे है? अगर आसपास कोई संक्रमित है तो खुद को कैसे बचाएं? क्या खाएं? नॉनवेज खाना सुरक्षित है या नहीं? सबसे ज्यादा खतरा किसको है? मास्क कबतक पहनें? इसकी सुरक्षित वैक्सीन कब आएगी? आएगी तो कितनी कारगर होगी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब हर कोई जानना चाहता है। सवालों के साथ ही कोरोना को लेकर कुछ भ्रांतियां या अफवाहें भी फैलने लगती है, जिनकी सच्चाई जानना बहुत जरूरी है। आपकी ऐसी तमाम जिज्ञासाओं और आशंकाओं को दूर करने के लिए अमर उजाला ने जानी-मानी माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुचित्रा जैन से बात की। कुछ जरूरी सवालों के साथ हमारी बातचीत शुरू हुई और अपने लाइव कार्यक्रम के दौरान लोगों के सवालों का भी उन्होंने जवाब दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • ड्रॉपलेट्स के अलावा कोरोना वायरस क्या हवा से भी फैलता है?
कोरोना वायरस ड्रॉपलेट संक्रमण है। इसका पार्टिकल साइज 0.5 माइक्रोमीटर से ज्यादा है। यह हवा में नहीं रहता है। पहले भले ही कुछ रिपोर्ट आई थीं कि यह हवा से फैल सकता है, लेकिन बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा कि यह ड्रॉपलेट्स से फैलता है, हवा से नहीं।

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Coronavirus: नॉनवेज नहीं खाना चाहिए? - फोटो : Amar Ujala
  • महामारी के शुरुआती महीनों से ही कहा जा रहा है कि नॉनवेज नहीं खाना चाहिए?
नॉनवेज खा सकते हैं, लेकिन तमाम एहतियात बरतने चाहिए। जैसे कि जहां विश्वास हो, वहीं से खरीदें। ऐसे वेंडर से लें, जहां की फूड क्वालिटी ट्रैक हो सके। इसे घर लाएं तो अच्छी तरह साफ करें। सबसे जरूरी बात कि इसे बेहतर तरीके से उचित तापमान पर पकाएं। ध्यान रखें कि यह अधपका न हो। शाक-सब्जियों में भी यही ध्यान रखना है। उसे धोकर प्रॉपर तरीके से पकाएं। इस तरह इस्तेमाल करेंगे तो संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
  • कोरोना से बचने को शराब पीने की अफवाह भी उड़ी थी, क्या एल्कोहल पीने से कोरोना वायरस मरता है? 
स्पिरिट एक तरह का एल्कोहल है, जो कीड़े-मकोड़े को मारने में भी प्रयोग होता है। यह भ्रांति शायद वहीं से पैदा हुई। लोगों ने यह समझ लिया कि हम इसे पी लेंगे तो वायरस मर जाएगा। स्पिरिट सतहों की सफाई के लिए भले ही इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन यह पूरी तरह गलत है कि एल्कोहल या शराब पी लेने से कोरोना वायरस मर जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • लॉकडाउन खत्म होने का मतलब कोरोना खत्म हो गया? क्या मास्क पहनना अभी भी जरूरी है?
लॉकडाउन रहे या अनलॉक, मास्क पहनना बिल्कुल जरूरी है। कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। आप कहीं निकलते हैं और कोई आप पर खांस दे या छींक दे तो ड्रॉपलेट्स के जरिए कोरोना वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए कपड़े का मास्क, एन 95 मास्क, मेडिकल मास्क वगैरह जगह और जरूरतों के हिसाब से हमेशा इस्तेमाल करें। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : बासित जरगर
  • फिल्टर या वॉल्व वाले मास्क पहनना चाहिए या नहीं?
यदि कोई व्यक्ति मरीज है और अगर वह वॉल्व वाला मास्क पहने हुए है तो उसके सांस लेने और छोड़ने के दौरान उस होकर हवा निकल रही होती है। सामने वाले का ख्याल रखने के लिए ऐसे में उसे उस रेस्पिरेटर पर एक और मेडिकल या अन्य मास्क लगा लेना चाहिए। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
  • कोविड से सबसे ज्यादा खतरा किसको है?
एक तो बहुत छोटा बच्चा और दूसरा वर्ग 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग, दोनों वर्ग उच्च जोखिम वाले हैं, जिनका खास ख्याल रखने की जरूरत है, क्योंकि दोनों आयुवर्ग में इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है। इसके अलावा डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कैंसर, फेफड़े की बीमारी या अन्य गंभीर बीमारियां हैं, तो ज्यादा खतरा रहता है। 

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कोरोना वायरस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
  • एसिम्प्टोमैटिक, प्री-सिम्प्टोमैटिक से कोरोना संक्रमण का कितना खतरा है?
एसिम्प्टोमैटिक यानी वे मरीज, जो कोविड से पीड़ित हैं, लेकिन उसमें लक्षण नहीं हैं। प्री-सिम्पटोमैटिक यानी लक्षण दिखने से पहले से ही कोरोना संक्रमित होते हैं। एक से चार दिन बीत जाने के बाद वह सिम्पटोमैटिक हो जाता है। सभी से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। 

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जांच के लिए नमूने लेती स्वास्थ्य विभाग की टीम(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
  • आरटीपीसीआर टेस्ट की एक्यूरेसी क्या है?
एक्यूरेसी इस बात पर निर्भर करती है कि हम सैंपल कहां से ले रहे हैं। सामान्यत: नाक और गला से सैंपल लिया जाता है। फेफड़े या जहां से हम ज्यादा सैंपल ले सकते हैं, वहां से एक्यूरेसी ठीक रहेगी। सामानयत: नाक और गले, दोनों जगह के स्वैब नमूने को मिला दिया जाए तो 60 से 65 फीसदी एक्यूरेसी आ जाती है। आरटीपीसीआर के साथ ही अन्य जांच भी करें तो एक्यूरेसी और बढ़ जाती है।

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कोरोना वायरस जांच(फाइल फोटो) - फोटो : iStock
  • एंटीबॉडी टेस्ट किसे करवाना चाहिए और इसके क्या फायदे हैं?
स्वास्थ्यकर्मियों को एंटीबॉडी टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए। हमें पता नहीं है कि कोरोना महामारी तीन महीने, छह महीने रहेगी या ज्यादा रहेगी। शरीर में एंटीबॉडी डेवलप हो रही है तो टेस्ट से यह पता चल पाएगा और स्वास्थ्यकर्मी निश्चिंत रहेंगे। जैसे इन्फ्लूएंजा के मामले में एंटीबॉडी खत्म हो जाती है और फिर से वैक्सीन की जरूरत पड़ती है। स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा उच्च जोखिम वर्ग, जिन्हें कोविड होने की संभावना ज्यादा है, वे भी एंटीबॉडी टेस्ट करा सकते हैं। यह सुरक्षा की दृष्टि से सही रहेगा। 

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फाइल फोटो - फोटो : Social media
कोरोना का डर क्यों खत्म हो रहा है? क्यों लोग लापरवाह हो गए हैं?
  • कोरोना महामारी की शुरुआत में यह वायरस हमारे लिए बिल्कुल ही नया था। न इसका प्रभाव पता था, न बचाव और न ही कोई इलाज। पहले मृत्यु दर बहुत ज्यादा थी और संक्रमण दर भी बहुत ज्यादा थी। लेकिन अब इसमें बहुत कमी आई है। अब इसके बचाव के साथ, इसके फैलने के तरीके, इसकी दवा और अन्य तरह के उपचार उपलब्ध हैं। शायद यह वजह हो सकती है कि लोग निश्चिंत हुए जा रहे हैं। दूसरी बात कि लंबे समय से लॉकडाउन ने लोगों का आजीज कर दिया है। घर की आर्थिक स्थिति गड़बड़ हो चुकी है। ऐसे में लोगों का निकलना जरूरी हो गया है। हालांकि तमाम एहतियात बरतने जरूरी हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक शोध में कहा गया कि कोरोना वायरस सतहों पर 28 दिन तक भी रह सकता है, इसे कितना सच माना जाए?
  • वह शोध लैबोरेट्री कंडीशन पर हुआ था। लैब में तापमान, प्रकाश आदि फैक्टर संतुलित थे। इस शोध के परिणाम हमारे जीवन में व्यवहारिक तौर पर लागू नहीं हो सकते। अब जैसे खुले में कम संभावना रहती है वायरस के सक्रिय रहने की, लेकिन क्लोज कंडीशन में संक्रमण फैल सकता है। अगर 20 डिग्री तापमान में किसी सतह पर वायरस ज्यादा दिन सक्रिय रहता है तो हमारे शरीर का ही तापमान 36—37 होगा, तो स्किन पर लंबे समय तक सक्रिय रहना संभव नहीं। लैब में सूर्य का प्रकाश नहीं मिला होगा, लेकिन बाहर सनलाइट में परिणाम में फर्क पड़ेगा, उस पर यूवी यानी अल्ट्रा वॉयलेट किरणें पड़ेंगी तो वायरस खत्म हो जाएगा। और भी कई सारी कंडीशन होती हैं। इसलिए लैब आधारित उस शोध के परिणामों को व्यवहारिक तौर पर सही नहीं माना जा सकता। 

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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : Social Media
कई देशों के वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में लगे हैं, तो ये सारी वैक्सीन अलग होंगी या एक? अगर अलग होंगी तो कौन सी कितनी कारगर होगी?
  • वायरस के पार्टिकल्स को लेकर, एंटीबॉडी को लेकर वैक्सीन बनाई जाती है। अभी तमाम वैक्सीन ट्रायल फेज में हैं। किसी वैक्सीन का 100 फीसदी सुरक्षित और कारगर होना अबतक साबित नहीं हुआ है। हर जगह अलग-अलग शोध आधारित वैक्सीन बनाई जा रही है। तीसरे यानी अंतिम चरण के ह्यूमन ट्रायल पूरा हुए बगैर और परिणाम आए बगैर यह बताना मुश्किल होगा कि कौन सी वैक्सीन पूरी तरह कारगर होगी। 

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सर्दियों में कोरोना - फोटो : iStock
सर्दियां आने वाली है, तो क्या कोरोना का विकराल रूप देखने को मिल सकता है?
  • अबतक लोग बाहर से लौटने पर नहाते, कपड़े बदलते हैं। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रख रहे हैं। सर्दियों में हो सकता है कि इन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सावधानियों पर नजर न जाए। लोग पहले की अपेक्षा थोड़े लापरवाह तो हुए हैं। अगर दिशानिर्देशों और सावधानियों का पूरा ख्याल रखा जाए तो हो सकता है कि कोरोना का उतना विकराल रूप हमें देखने को न मिले। अन्यथा कोरोना संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। 

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आयुर्वेद - फोटो : पेक्सेल्स
आयुर्वेदिक उपाय, मसाले, घरेलू नुस्खे कोरोना से बचाने में कितने कारगर हैं? क्या इसके साइड इफेक्ट भी हैं?
  • आयुर्वेद में जो तमाम उपाय बताए गए हैं, ये सारे इम्यूनिटी बूस्टर हैं। चूंकि इम्यूनिटी कमजोर होने पर कोरोना संक्रमण का खतरा रहता है, इसलिए इम्यूनिटी मजबूत बनाए रखने पर इससे बचाव होता है। लेकिन अगर किसी चीज के बारे में सीधे यह नहीं कहा जा सकता है कि यह कोरोना का इलाज है या फिर किसी खास चीज को खाने से कोविड नहीं होगा। हालांकि इसपर शोध हो रहे हैं। इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर लेना फायदेमंद है। घरेलू नुस्खों को सही तरीके से लें तो नुकसान नहीं होगा, लेकिन ओवरडोज से दिक्कत हो सकती है। 

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Coronavirus Treatment - फोटो : Amar Ujala
  • कोरोना के लिए कौन-इलाज ज्यादा बेहतर है?
पहले जहां इसका कोई निश्चित इलाज नहीं था, अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने इलाज का प्रोटोकॉल निर्धारित कर दिया है। लगातार शोधों की बदौलत हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षण वाले मरीजों के लिए तमाम तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। प्लाज्मा थेरेपी, आयुष प्रोटोकॉल जैसे उपचार के अन्य तरीके भी मौजूद हैं। हालांकि बिना चिकित्सकीय सलाह के कुछ करना उचित नहीं है। अपने फिजिशियन या विशेषज्ञ डॉक्टर पर विश्वास करना ज्यादा बेहतर रहेगा। 

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कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई
भारत में बहुत ज्यादा तबाही देखने को नहीं मिली, इस उपलब्धि को कैसे देखती हैं?
  • भौगोलिक विविधता, आबादी के हिसाब से भी शहरों, गांवों आदि में फर्क पड़ता है। भारत में इससे निपटने की रणनीति अच्छी रही। स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक तन्मयता से लगे हुए हैं। ज्यादा से ज्यादा जगह जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई। ज्यादा से ज्यादा जांच की गई। दूसरी बात कि यहां की आबादी में इम्यूनिटी लेवल भी ज्यादा हो सकता है, शायद यह भी एक कारण रहा हो। 
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Coronavirus prevention - फोटो : iStock
कोरोना से बचने के लिए क्या करें, क्या न करें? 
  • जबतक कोरोना का 100 फीसदी इलाज उपलब्ध नहीं है और इसकी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होती, तबतक वे तमाम सावधानियां बरतनी होगी। मास्क का इस्तेमाल, सोशल डिस्टेंसिंग, साफ-सफाई, भीड़भाड़ से बचना वगैरह। इसके साथ ही अपनी इम्यूनिटी का स्तर मजबूत बनाए रखना होगा। योग, व्यायाम के साथ ही अपनी दिनचर्या बेहतर रखनी होगी। 
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