भारत में स्टमक फ्लू के मामले 2024
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2024 में भारत में पेट के संक्रमण ने तोड़ा रिकॉर्ड
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में बताया कि साल 2024 में एक्यूट डायरिया डिजीज ने पिछले 15 साल के रिकार्ड को तोड़ दिया। पिछले साल (2024 में) तीव्र दस्त रोग का प्रकोप रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो दुनियाभर में सबसे आम जीवाणु और वायरल बीमारियों की असामान्य वृद्धि को दर्शाता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में 22 दिसंबर तक देशभर में एक्यूट डायरियल डिजीज के 1,000 से अधिक प्रकोप दर्ज किए गए। 2009 के बाद से यह उच्चतम स्तर है।
स्वास्थ्य विभाग ने देशभर में फूड पॉइजनिंग के 300 से अधिक प्रकोपों की भी सूचना दी, जो 2019 के बाद से सबसे अधिक है।
पेट में संक्रमण की समस्या
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एक्यूट डायरियल डिजीज क्या है?
एक्यूटडायरियल डिजीज कई अलग-अलग कारकों के कारण हो सकता है। साल्मोनेला और विब्रियो पैराहेमोलिटिकस जैसे बैक्टीरिया और नोरोवायरस-रोटावायरस और एस्ट्रोवायरस जैसे वायरस के संक्रमण से ये बीमारी होती है। वैसे तो सभी उम्र के लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं हालांकि बच्चों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
तीव्र दस्त रोग से पीड़ित रोगियों में बार-बार पतला या पानी जैसा मल आने, उल्टी और बुखार की समस्या होती रहती है। यह रोग आमतौर पर हल्का होता है और अपने आप ठीक हो जाता है, हालांकि गंभीर मामलों में इसके कारण निर्जलीकरण और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
एच5एन1 का बढ़ता संक्रमण
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कई देशों में एच5एन1 का संक्रमण
विशेषज्ञों की टीम ने कहा, कोविड-19 महामारी के बाद दुनियाभर में कई बीमारियों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। महामारी के दौरान टीकाकरण में कमी और बदलते पर्यावरणीय कारकों के चलते पहले की तुलना में संक्रामक रोगों के मामले अब काफी ज्यादा देखे जा रहे हैं।
भारत-अमेरिका सहित कई अन्य देश इन दिनों एच5एन1 जिसे बर्ड फ्लू भी कहा जाता है, इस रोग से प्रभावित हैं। बर्ड फ्लू को आमतौर पर मुर्गियों और कुछ पक्षियों में होने वाला संक्रमण माना जाता रहा था हालांकि अब न सिर्फ ये इंसानों को संक्रमित कर रहा है बल्कि इसके कारण कुछ लोगों की मौत भी हुई है। हाल ही में वायरस का एक नया वैरिएंट D1.1 देखा गया है जिसे कई मामलों में सेहत के लिए गंभीर और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
यहां पढ़िए पूरी खबर
नोरोवायरस का भी देखा जा रहा है प्रकोप
हालिया रिपोर्ट्स में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने ब्रिटेन के कई हिस्सों में नोरोवायरस के संक्रमण को लेकर भी अलर्ट किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, नोरावायरस के मामले ब्रिटेन में 116 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है। आयरलैंड में भी इसके मामले बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके तेजी से फैलने वाली बीमारी को रोकने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं। इंग्लैंड में एनएचएस पहले से ही उच्च संक्रमण दर को लेकर चिंता जताता रहा है। फरवरी की शुरुआत में प्रतिदिन औसतन 961 मरीजों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा था। कुछ मामलों में इस संक्रामक रोग के कारण गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं भी देखी जा रही हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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