इबोला वायरस का भारत में खतरा
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भारत पहुंच गया इबोला?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत में अब तक संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी के बाद निगरानी और रोकथाम उपायों को और सख्त किया गया है।
- एहतियाती तौर पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- एयरपोर्ट पर निगरानी और स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है।
- क्वारंटीन प्रोटोकॉल, मरीजों के प्रबंधन और लैब परीक्षण से जुड़े मानक पहले ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जा चुके हैं।
मंत्रालय ने कहा कि भारत को ऐसी परिस्थितियों से निपटने का पूर्व अनुभव है इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
इबोला के जोखिमों को जानिए
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भारत में पहले कब रिपोर्ट किया गया था इबोला
भारत में कभी भी इबोला वायरस का कोई घरेलू प्रकोप या सक्रिय संक्रमण देखने को नहीं मिला है।
साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले वैश्विक इबोला के जोखिमों के दौरान
एकमात्र मामला 10 नवंबर, 2014 में सामने आया था। लाइबेरिया से लौटे 26 वर्षीय भारतीय नागरिक में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान पुष्टि हुई थी। हालांकि उसे सफलतापूर्वक आइसोलेट कर ठीक कर लिया गया था और देश में इससे संबंधित संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया था।
- हालिया प्रकोप के जोखिमों के बीच केंद्र ने सभी नागरिकों सेजारी दिशा-निर्देशों और सलाह का पालन करने की अपील की है।
- सरकार ने इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए अलर्ट जारी किया है।
- बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर यात्रियों को एयरपोर्ट हेल्थ डेस्क पर तुरंत सूचना देनी होगी।
- यात्रियों को भारत आने के 21 दिनों तक अपनी सेहत की निगरानी करने की सलाह दी गई है।
इबोला का संक्रमण कैसे फैलता है?
इबोला के जोखिमों से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी ये जानना है कि वायरस फैलता कैसे है और इससे बचे रहने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
- मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, पसीना, उल्टी या वीर्य के संपर्क से ये फैल सकता है।
- अस्पतालों, स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमित मरीज के परिजनों को सबसे अधिक जोखिम में माना जाता है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला का संक्रमण कोविड की तरह हवा के जरिए नहीं फैलता। इसी कारण से संक्रमण को कंट्रोल करना अपेक्षाकृत संभव माना जाता है।
इबोला के खतरे से कैसे बचें?
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इबोला का जोखिम किन लोगों को ज्यादा?
इबोला वायरस का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है जो संक्रमित मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्यकर्मी, अस्पताल स्टाफ और मरीजों की देखभाल करने वाले परिजन सबसे अधिक जोखिम में होते हैं।
- संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने, लार, वीर्य या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से वायरस फैल सकता है, इसलिए इससे बचाव सबसे जरूरी है।
- कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि अफ्रीका में कई संक्रमण अंतिम संस्कार के दौरान भी फैले, क्योंकि शव को छूने की पारंपरिक प्रथाएं संक्रमण का कारण बनीं।
- अगर आपके घर में या कोई दोस्त अफ्रीकी देशों की यात्रा करके आया है तो उसके सीधे संपर्क से बचना चाहिए।
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स्रोत:
Follow-up of Ebola Patient, 2014–2015
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