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Hantavirus Survivor: संक्रमण ने छीनी याददाश्त, 16 साल बाद भी दर्द में जी रही हंतावायरस की शिकार महिला

Tue, 19 May 2026 09:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hantavirus Survivor Story: हंतावायरस की लेकर इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। क्रूज शिप से फैला संक्रमण विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इस बीच 2010 में हंतावायरस का शिकार रही महिला ने अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए हैं, जो सोचने पर मजबूर कर देंगे कि ये वायरस असल में कितना खतरनाक हो सकता है?
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हंतावायरस सर्वाइवर महिला की दास्तान - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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मई के शुरुआती दिनों में क्रूज शिप एमवी होंडियस में फैले हंतावायरस संक्रमण को लेकर पूरी दुनिया में शोर है। 2 मई, 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को इसकी सूचना मिली। यह जहाज 1 अप्रैल, 2026 को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था। इस प्रकोप में कई देशों में 11 मामले सामने आए हैं और तीन लोगों की मौत हुई है। शुरुआत में इस क्रूज पर करीब 150 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे, लेकिन 24 अप्रैल को दर्जनों लोग सेंट हेलेना द्वीप पर उतर गए। स्वास्थ्य अधिकारी शिप से उतरे हुए लोगों का पता लगाने की होड़ में लगे हैं क्योंकि इन लोगों से संक्रमण के फैलने की आशंका बनी हुई है।

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हंतावायरस को लेकर इन दिनों भले ही काफी चर्चा हो रही है, पर ये कोई नया वायरस नहीं है। पहले भी इसके संक्रमण रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। साल 2010 में भी इसका प्रकोप देखा गया था। इसमें संक्रमण का शिकार हुई एक महिला ने यूके की स्थानीय मीडिया डेली मेल से बातचीत में अपने खतरनाक अनुभव साझा किए हैं। चूहों से फैलने वाले वायरस से बचकर निकली महिला ने बताया कि कैसे इस जानलेवा बीमारी ने उसे कोमा में डाल दिया था, उसकी जान जाते-जाते बची।

एमवी होंडियस पर फैला हंतावायरस - फोटो : ANI
हंतावायरस संक्रमण की शिकार महिला के अनुभव

हंतावायरस का गंभीर संक्रमण झेलने वाली 43 वर्षीय  जेनिफर बेनेविएट ने डेली मेल को बताया कि करीब 16 साल पहले उन्हें हंतावायरस हुआ था। उन्हें आईसीयू साइकोसिस (आईसीयू में रहने से होने वाला मानसिक भ्रम) का अनुभव हुआ था। इससे ठीक होने के बाद उन्हें दोबारा से चलना और नहाना सीखना पड़ा था। तीन बच्चों की मां बेनेविएट दिसंबर 2010 में क्रिसमस के आस-पास इस बीमारी की चपेट में आई थीं।
 
  • संक्रमण के कारण होने वाले लक्षणों को लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी जान भी जा सकती है।
  • बेनेविएट को 10 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, जिसके कारण उसके शरीर का गर्दन से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।

हंतावायरस की शिकार महिला के अनुभव - फोटो : Adobe stock
संक्रमण के बाद क्या-क्या हुआ?

जेनिफर ने बताया कि संक्रमण के कुछ दिनों बाद एक दिन अचानक मैं गिर गई। मैं बहुत थक गई थी और मुझे बुखार भी था, लेकिन अगले दिन मुझे काम पर जाना था, इसलिए मैंने सोचा कि मैं सो जाऊंगी और सुबह तक ठीक हो जाएगा।
 
  • लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। वह कुछ घंटों बाद जागीं और खूब उल्टियां होने लगीं।बुखार और भी ज्यादा बढ़ गया था। 
  • परिवार के लोग तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन वहां के जितने भी टेस्ट हुए, उनमें कुछ भी नहीं सामने आया। उन्होंने बताया सब कुछ नेगेटिव था- न कोई फ्लू, न कुछ और। 
  • डॉक्टर भी हैरान थे। इसके बाद हो रहे लक्षणों को कम करने वाली दवा देकर घर भेज दिया गया, लेकिन अगले दिन हालत और भी ज़्यादा बिगड़ गई। 
  • इस बार, घर वाले तुरंत इमरजेंसी रूम ले गए, जहां पता चला कि ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगा।
  • जेनिफर कहती हैं,  मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी।
  • जांच रिपोर्ट आने में 10 दिन लगे और इस पूरे समय उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। उन 10 दिनों के दौरान, मुझे कुछ भी याद नहीं है। यहां तक कि जब मैं जाग रही थी और मुझे होश था, तब भी मुझे उस समय का कुछ भी याद नहीं है।' ये कोमा जैसी स्थिति थी।
  • आखिरकार डॉक्टरों ने पुष्टि की कि उन्हें 'हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम' था। मैंने इसके बारे में पहले कभी नहीं सुना था।
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हंतावायरस संक्रमण ने कठिन कर दी रोजमर्रा की जिंदगी - फोटो : Adobe stock photos
16 साल बाद अब भी होती हैं कई दिक्कतें

रिपोर्ट के मुताबिक जेनिफर को अस्पताल में बिताए उन दिनों की कोई याद नहीं है। लिहाजा वायरस से ठीक होने बाद उन्हें वे सारी चीजें फिर से सीखनी पड़ीं 'जो एक आम इंसान दिन भर में करता है। यह भी सीखना पड़ा कि खुद खाना कैसे खाया जाए और नहाया कैसे जाए? मुझे आज भी यह साफ नहीं है कि हंतावायरस कैसे और कहां से हुआ?
 
  • जेनिफर ने बताया कि जब उन्होंने हालिया घटना एमवी होंडियस क्रूज शिप पर हंटावायरस फैलने की खबर सुनी, तो सदमे जैसा महसूस हुआ।
  • जेनिफर ने कहा कि इस बीमारी को मात दिए हुए एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद, आज भी उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में संक्रमण के असर महसूस होते हैं। 
  • वह कहती हैं, 16 साल बाद भी मुझे मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है और मेरे हाथ-पैरों में सुन्नपन व झनझनाहट रहती है।
  • ठीक होने के बाद घर का काम और ऐसी ही दूसरी चीजें करते समय, मुझे पहले के मुकाबले ज्यादा बार ब्रेक लेने पड़ते हैं। 

संक्रमण से ठीक हुए लंबा वक्त बीत जाने के बाद अब वह सब कुछ कर सकती है जो पहले किया करती थीं, लेकिन उन्होंने माना कि अब उतनी तेजी से रोजमर्रा के काम नहीं हो पाते, जितनी तेजी से पहले हो जाता था। जेनिफर कहती हैं, कई चीजें अब तक साफ नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के लोग मेरे घर आए लेकिन उन्हें ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिससे यह पक्के तौर पर कहा जा सके कि वायरस वहीं था।



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स्रोत:
Rat virus survivor reveals horrifying long term effects from hantavirus after she ended up in coma


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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