रिसर्च के दौरान मरीजों की सुरक्षा पर नजर रखना, गंभीर घटनाओं की जानकारी देना और रिसर्च के नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।
- रिसर्च में कोई बड़ा बदलाव होता है या मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है तो उसकी जानकारी भी तय प्रक्रिया के तहत देनी होगी।
- यानी रिसर्च की मंजूरी एक जगह से मिल सकती है, लेकिन मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी संबंधित अस्पतालों की रहेगी।
कई अस्पतालों में होने वाली रिसर्च को एक ही एथिक्स कमेटी देगी मंजूरी
बड़ी संख्या में मरीजों के शामिल होने से फायदा आईसीएमआर की इस नई व्यवस्था का असर सिर्फ रिसर्च की मंजूरी तक सीमित नहीं रहेगा। अगर छोटे अस्पताल और गांवों के आसपास के सेंटर बड़ी मेडिकल स्टडी से जुड़ते हैं तो रिसर्च में अलग-अलग इलाकों के मरीज शामिल हो सकेंगे। इससे किसी बीमारी, नई दवा या इलाज के तरीके पर होने वाली स्टडी में सिर्फ बड़े शहरों के मरीजों के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को शामिल करना आसान होगा।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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