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Health Alert: बीपी की दवाएं कहीं आपकी किडनी न खराब कर दें? ये दवाएं 33% तक बढ़ा सकती हैं खतरा

Thu, 20 Aug 2026 01:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ब्लड प्रेशर की आम दवाएं लेने वाले लाखों मरीज़ों को किडनी की जानलेवा समस्याओं का खतरा हो सकता है। स्टडी में पाया गया है कि एमलोडिपाइन और लैसिडिपाइन जैसी दवाएं लेने वालों में, ब्लड प्रेशर की दूसरी दवाएं लेने वालों की तुलना में किडनी की बीमारी समेत अन्य जटिलताओं का खतरा 33 प्रतिशत ज्यादा था।
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बीपी की दवाओं से किडनी को खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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दुनियाभर में दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है, लिहाजा खतरे को देखते हुए डॉक्टर कम उम्र के लोगों में भी हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शुरू कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) से करीब 1.4 अरब लोगों प्रभावित हैं उनमें से 63 करोड़ वयस्कों में ही इस बीमारी की पहचान हुई है और वे इसका इलाज करवा रहे हैं। इसका मतलब है किहाई ब्लड प्रेशर वाले लगभग 44% लोगों को ही मेडिकल इलाज मिल रहा है।

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हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित रूप से बीपी की दवा लेने की सलाह दी जाती रही है। ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक से लेकर किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे को कम करने में मददगार मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्लड प्रेशर की दवा कई बार आपकी किडनी के लिए भी मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है?

इसी को लेकर एक हालिया अध्ययन में डॉक्टर्स ने ब्लड प्रेशर की कुछ आम दवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों ने पाया कि जिन लोगों को पहले से डायबिटीज के साथ ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए बीपी की कुछ दवाएं और भी नुकसानदायक हो सकती हैं। ऐसे लोगों में किडनी की बीमारियों का खतरा कहीं ज्यादा देखा गया है।

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बीपी की दवाओं को लेकर अध्ययन में अलर्ट - फोटो : Freepik.com
डीसीसीबी दवाओं को लेकर अध्ययन में अलर्ट

शोधकर्ताओं ने डाइहाइड्रोपाइरिडिन कैल्शियम-चैनल ब्लॉकर यानी डीसीसीबी दवाओं को लेकर अलर्ट किया है। ये ऐसी ब्लड प्रेशर की दवाएं हैं जो खून ले जाने वाली नलियों को ढीला और चौड़ा करने में मदद करती हैं। इससे खून का प्रवाह आसानी से होता है और ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलती है। एम्लोडिपिन जैसी सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाई जाने वाली दवाएं इसी समूह की होती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों में गंभीर किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम, दूसरी ब्लड प्रेशर दवाएं लेने वालों की तुलना में करीब 33 प्रतिशत अधिक था।
 
  • शोधकर्ताओं ने बताया कि लाखों लोग हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए दवाएं लेते हैं।
  • अध्ययन में टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में इन दवाओं के इस्तेमाल और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं के बारे में पता चला है।

किडनी की समस्याओं का खतरा - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज वाले मरीजों में दवा से ज्यादा खतरा

अध्ययन में पाया गया है एम्लोडिपिन और लैसिडिपिन जैसी दवाएं लेने वाले मरीजों में किडनी से जुड़ी गंभीर जटिलताओं का जोखिम, दूसरी तरह की ब्लड प्रेशर दवाएं लेने वालों की तुलना में करीब 33 प्रतिशत ज्यादा था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये दवाएं सीधे किडनी खराब करती हैं। शोधकर्ताओं ने खुद कहा है कि अध्ययन से कारण और परिणाम का सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।

इन दवाओं को डाइहाइड्रोपाइरिडिन कैल्शियम-चैनल ब्लॉकर्स (डीसीसीबी) कहा जाता है। इन दवाओं में एम्लोडिपिन, फेलोडिपिन, लैसिडिपिन, लरकेनिडिपिन, निकार्डिपिन, निफेडिपिन और निमोडिपिन जैसी दवाएं शामिल हैं।

यह अध्ययन खास तौर पर टाइप-2 डायबिटीज के शिकार लोगों पर केंद्रित था। ऐसे लोगों में पहले से ही किडनी की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। लंबे समय तक खून में शुगर ज्यादा रहने पर किडनी को लगातार ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण धीरे-धीरे किडनी के अंदर मौजूद खून छानने वाले बेहद छोटे फिल्टर यानी फिल्ट्रेशन यूनिट खराब होने लगते हैं।

किडनी में होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए इजरायल के शोधकर्ताओं ने टाइप-2 डायबिटीज वाले 31,000 से ज्यादा वयस्कों आंकड़ों का अध्ययन किया। इन लोगों की करीब साढ़े तीन साल तक निगरानी की गई। 
 
  • सभी मरीज डायबिटीज के कारण किडनी को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दवाएं ले रहे थे। इनमें से करीब 39 प्रतिशत लोगों के लिए डीसीसीबी दवाएं लिखी गई थीं।
  • अध्ययन के दौरान डीसीसीबी लेने वाले लोगों में गंभीर किडनी संबंधी समस्या का जोखिम 33 प्रतिशत ज्यादा पाया गया। 
  • गंभीर समस्या में किडनी की काम करने की क्षमता में 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा कम हो जाती है, जहां पर डायलिसिस और  किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ये दवाएं  किडनी के अंदर खून के प्रवाह को बहुत ज्यादा बढ़ा सकती हैं। ये दवाएं रक्त वाहिकाओं को इतना ढीला कर देती हैं कि किडनी के खून छानने वाले हिस्सों तक ज्यादा दबाव या तरल पहुंचने लगता है। इससे पहले से कमजोर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे जटिलताएं और भी ज्यादा हो सकती हैं।
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बीपी की दवाओं को लेकर विशेषज्ञों ने किया सावधान - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

शोध की प्रमुख लेखिका और किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. तिमना अगुर कहती हैं, इन नतीजों से यह महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या किडनी की सुरक्षा वाली आधुनिक डीसीसीबी दवाएं हर स्थिति में सबसे अच्छा विकल्प हैं?

लेकिन शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया कि मरीजों को अपनी ब्लड प्रेशर की दवा खुद से बंद नहीं करनी चाहिए। यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि दवा सीधे किडनी खराब करती है। डॉक्टर को मरीज की पूरी स्थिति देखकर तय करना होगा कि कौन-सी दवा उसके लिए सही है।
 
  • यह अध्ययन ऐसे समय में सामने आया है जब विशेषज्ञ डायबिटीज से जुड़ी किडनी बीमारी की जल्दी पहचान पर भी जोर दे रहे हैं।
  • डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण कारण हैं। कई बार किडनी धीरे-धीरे खराब होती रहती है, लेकिन शुरुआत में मरीज को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होता। इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
  • डॉक्टर कहते हैं, ये अवलोकन अध्ययन है इसलिए अगर आप दवाएं ले रहे हैं तो खुद से बंद न करें।
  • अपने डॉक्टर की सलाह लें। डीसीसीबी दवाएं हर किसी के लिए नुकसानदायक हों ये भी जरूरी नहीं है।



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स्रोत:
Widely prescribed blood pressure drugs linked to 33% higher kidney risk in type 2 diabetes


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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