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HMPV: इन दो गंभीर समस्याओं का भी कारण बन सकता है एचएमपीवी संक्रमण, ऐसे लक्षण हैं तो हो जाइए सावधान

Tue, 14 Jan 2025 01:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एचएमपीवी को लेकर कुछ अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया, संक्रमण की गंभीर स्थिति में एचएमपीवी के कारण एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा हो सकता है। ये संक्रमण और किस तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है आइए इस बारे में जानते हैं।
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एचएमपीवी संक्रमण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) अब तक दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। दिसंबर के मध्य से चीन में शुरू हुआ इसका संक्रमण छह जनवरी को पहली बार भारत में रिपोर्ट किया गया। ये अबतक कई राज्यों में फैल चुका है, संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को इससे बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की अपील की है। बच्चों और बुजुर्गों में इस संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं, हालांकि अच्छी बात ये है कि अधिकतर लोग आसानी से ठीक हो रहे हैं और गंभीर जटिलताएं नहीं देखी जा रही हैं।

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जैसा की कई रिपोर्ट्स में बताया जाता रहा है कि एचएमपीवी कोई नया वायरस नहीं है। करीब 25 साल से वैज्ञानिकों को इस वायरस की जानकारी है। चीनी स्वास्थ्य विभाग ने एक हालिया रिपोर्ट में जानकारी दी है कि भले ही इस बार संक्रमण के मामलों को लेकर काफी चर्चा हो रही है फिर भी देश में एचएमपीवी के कुल मामले, पिछले साल इसी अवधि की तुलना में कम हैं।




चूंकि वायरस में दो नए म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो इसकी संक्रामकता दर को बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संभवत: इन्हीं म्यूटेशनों के कारण इस बार वायरस का प्रसार इतना अधिक देखा जा रहा है।

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ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) - फोटो : Adobe stock
संक्रमितों में गंभीर स्थितियों का खतरा

एचएमपीवी को लेकर कुछ अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया, संक्रमण की गंभीर स्थिति में एचएमपीवी के कारण एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा हो सकता है। ये संक्रमण और किस तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है आइए इस बारे में जानते हैं।

अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ समीर भारद्वाज बताते हैं, एचएमपीवी वैसे तो मुख्यरूप से श्वसन वायरस है और ज्यादातर लोगों में खांसी, बुखार, गले में खराश, बहती या बंद नाक, शरीर में दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षण पैदा करता है, हालांकि कुछ लोगों को ये काफी बीमार कर सकता है।

कुछ रिपोर्ट्स कहते हैं, एचएमपीवी के कारण पाचन से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं, आइए इस बारे में जानते हैं।

पाचन से संबंधित समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
संक्रमितों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का खतरा

क्या ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस का संक्रमण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण भी पैदा करता है? इस बारे में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ रमन शेखर ने बताया वायरस हमारे शरीर को कई प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं। जैसा की कोविड के समय में भी देखा गया था। श्वसन वायरस होने के बावजूद कोविड के कारण कई तरह की स्वास्थ्य जटिलताएं देखी गईं। 

एचएमपीवी कुछ लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का कारण बन सकता है जिसमें आपको मतली या उल्टी या पेट में दर्द जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है। हालांकि इस तरह की शिकायत के मामले बहुत कम देखे जाते रहे हैं। 

पेट की समस्या - फोटो : Freepik.com
आंतों में सूजन का बन सकता है कारण

कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कमजोर इम्युनिटी या फिर पहले से कोमोरबिडिटी के शिकार कुछ लोगों में एचएमपीवी आंतों में सूजन का कारण भी बन सकता है जिसके कारण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों का खतरा रहता है। हालांकि सभी संक्रमितों को ये दिक्कत हो ये आवश्यक नहीं है। एचएमपीवी का मूल वायरस इतना हल्का रहा है कि इससे संक्रमित अधिकतर लोग बिना किसी खास उपचार के ही ठीक हो जाते हैं। 
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सर्दी-जुकाम की समस्या - फोटो : Freepik.com
अक्सर सर्दियों के दौरान फैलता है इसका संक्रमण

एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह ने बताया, यह कोई नया वायरस नहीं है। यह आमतौर पर सर्दियों के दौरान अधिक फैलता रहा है। आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों और प्रतिरक्षा प्रणाली की शिकायत वाले व्यक्तियों में इसका खतरा देखा जाता रहा करता है। संक्रमण को लेकर ज्यादा चिंता की आवश्यकता नहीं है।

विशेषज्ञों ने एचएमपीवी से बचाव के लिए सभी लोगों को निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह दी है।


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स्रोत और संदर्भ
Human Metapneumovirus Infection in Hospitalized Children


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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