कोरोना के कारण लोग हो रहे हैं अवसाद के शिकार
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर में तेजी से बढ़ते संक्रमितों और मौत के आंकड़ों के चलते देश में चारो तरफ हाहाकार है। कहीं अस्पताल में लोगों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं तो कहीं ऑक्सीजन की कमी के चलते लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर हर तरफ मौत और परेशान लोगों की तस्वारें देख कर लोगों को घबराहट और तनाव जैसी दिक्कतों का अनुभव हो रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर का असर लोगों के शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर देखा जा रहा है।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शनिवार को हुई चर्चा में विशेषज्ञों ने कोरोना के कारण लोगों के मानसिक सेहत पर पड़ रहे असर के बारे में बताया। इस दौरान मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा और दिल्ली एम्स की डॉ निष्ठा कपिल ने इस समस्या से बचने के उपायों के बारे में लोगों को बताया।
कोरोना कैसे लोगों के मानसिक सेहत को कर रही है प्रभावित?
इस सवाल के जबाव में मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा बताती हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में लोगों की समस्याएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। इस लहर में अब तक कोई आशा की किरण दिख नहीं रही है। लगभग हर किसी के जानने वाले परेशान हैं ऐसे में यह लहर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती दिख रही है। कई लोग तो इतने घबराए हुए हैं कि उन्हें लगने लगा है कि अगर फोन बजा तो जरूर कोई बुरी खबर सुनने को मिलेगी। ऐसा दौर हर किसी के लिए बेहद कठिन है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है महामारी
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नकारात्मक चीजों से कैसे बनाएं दूरी?
डॉ दीपाली कहती हैं कि ऐसे समय में जब हर तरफ से बुरी खबरें ही सुनने को मिल रही हैं, लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि आप कुछ ऐसा करें जिससे आपको खुशी मिले। लोगों से फोन पर अच्छी बातें करें। निश्चित ही ऐसे माहौल में खुशी ढूंढ पाना कठिन है फिर भी आपको कोशिश जरूर करते रहना चाहिए।
घर में लोगों को हो रही बेचैनी से कैसे बचाएं?
इस बारे में डॉ दीपाली कहती हैं कि यह समय घर में मौजूद बुजुर्गों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण है। घर के अन्य लोगों की जिम्मेदारी बन जाती है कि आप ऐसे विपरीत माहौल में सीनियर सिटीजन के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखें। घर के बुजुर्गों के साथ समय बिताएं, उनसे उनके अनुभवों के बारे में जानें। ऐसा करके आप न सिर्फ उन्हें बोरियत से बचा सकते हैं साथ ही उनका जीवन के प्रति अनुभव आपके भी काफी काम आ सकता है।
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नोट: यह लेख मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा और दिल्ली एम्स की डॉ निष्ठा कपिल से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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