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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: डॉक्टरों ने बताया कैसे करें मौसमी बुखार और कोरोना में फर्क?

Sat, 24 Apr 2021 07:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
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देश में कोरोना के बेकाबू होते जा रहे मामलों के बीच आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लोगों की सबसे बड़ी चिंता है। मार्च और अप्रैल के समय में आमतौर पर देश में मौसमी बुखार और सर्दी-खांसी के मामले भी ज्यादा देखने को मिलते हैं, ऐसे में लोगों के लिए इस समय मौसमी बुखार और कोरोना के बीच अंतर कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है। चूंकि दोनों ही मामलों में लक्षण एक जैसे ही होते हैं इस वजह से लोगों में काफी भ्रम का माहौल देखने को मिल रहा है। 
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शनिवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इसी बारे में जानने की कोशिश की। इस कार्यक्रम में एम्स के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के एमडी डॉ. आर्यभट्ट साधु, उजाला सिग्नस के डॉ. निर्दोष छाबड़ा (एमबीबीएस मेडिसिन) और प्रयागराज के जहांगीर हॉस्पिटल के डॉ. अलताफ अहमद ने कोरोना से संबंधित सवालों के जवाब दिए।

कैसे करें सामान्य जुकाम-बुखार या कोरोना में अंतर
इस सवाल के जवाब में एम्स के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के एमडी डॉ. आर्यभट्ट साधु कहते हैं कि बिना जांच के इन दोनों स्थितियों में अंतर कर पाना काफी मुश्किल है। मौसमी फ्लू और कोरोना, दोनों के लक्षण लगभग एक समान ही होते हैं, इसलिए शुरुआती तौर पर हम सभी रोगियों को कोरोना के मरीज के तौर पर ही देख रहे हैं। कोरोना संक्रमितों में लक्षण थोड़े गंभीर हो सकते हैं। रोगियों को सूखी खांसी, तेज बुखार, नाक बहने, बदन में बहुत ज्यादा दर्द होना और डायरिया आदि की दिक्कत हो सकती है।
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टेस्ट के रिपोर्ट आ रहे हैं निगेटिव - फोटो : iStock
लक्षण होने के बाद भी आरटीपीसीआर टेस्ट निगेटिव आ जाए तो क्या करें?
इस सवाल के जवाब में उजाला सिग्नस के डॉ. निर्दोष छाबड़ा (एमबीबीएस मेडिसिन) कहते हैं कि कोरोना के डबल और ट्रिपल म्यूटेंट वायरस, सामान्य तौर पर आरटीपीसीआर टेस्ट को चकमा दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि रोगी को कोई लक्षण है तो उसी आधार पर इलाज की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे रोगियों को सबसे पहले आइसोलेट हो जाना चाहिए जिससे संक्रमण की रफ्तार पर रोक लगाई जा सके।

किन रोगियों को हो रही है अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत
जहांगीर हॉस्पिटल के डॉ. अलताफ अहमद कहते हैं कि हाल के दिनों में देखा गया है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जिन लोगों को ऐसी दिक्कत नहीं है उन्हें घर में ही क्वारंटीन होने की सलाह दी जाती है। वहीं जिन लोगों के ऑक्सीजन का स्तर लगातार 90 से कम बना रहता है उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी जाती है। 

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नोट: यह लेख एम्स के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के एमडी डॉ. आर्यभट्ट साधु, उजाला सिग्नस के डॉ. निर्दोष छाबड़ा (एमबीबीएस मेडिसिन) और प्रयागराज के जहांगीर हॉस्पिटल के डॉ. अलताफ अहमद से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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