कान में दर्द-चक्कर आना भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर का संकेत
- फोटो : Adobe Stock
शरीर में कुछ भी असामान्य हो तो न करें इग्नोर
डॉक्टर कहते हैं, ये घटना सवाल उठाती है कि क्या कुछ मामलों में साधारण दिखने वाले लक्षण भी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं?
- विशेषज्ञों का कहना है कि अगर न्यूरोलॉजिकल लक्षण जैसे चेहरे का सुन्न होना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, संतुलन बिगड़ने या बोलने में परेशानी जैसी दिक्कतें हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- हालांकि हर कान दर्द या चक्कर आने का मतलब ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, लेकिन लगातार बिगड़ते लक्षणों की समय पर जांच बेहद जरूरी है।
ब्रेन में ट्यूमर के कारण होने वाली दिक्कतें
- फोटो : Freepik.com
कान का दर्द निकला ब्रेन ट्यूमर
इसी साल जनवरी में टायलर को सबसे पहले कान में तेज दर्द हुआ। कुछ ही दिनों बाद उनके चेहरे के बाईं तरफ सुन्नपन महसूस होने लगा और उन्हें ठीक से चलने में भी परेशानी होने लगी।
- जब वे अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें कान का संक्रमण और वर्टिगो बताया। उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं देकर घर भेज दिया गया।
- लेकिन दवाओं का कोई असर नहीं हुआ। उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।
- उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं और धीरे-धीरे उनके शरीर का पूरा बायां हिस्सा काम करना बंद करने लगा।
इसके बाद डॉक्टरों ने सीटी स्कैन किया। जांच में उनके दिमाग में एक लीजन मिला। लीजन का मतलब है कि दिमाग के किसी हिस्से में असामान्य या क्षतिग्रस्त टिश्यू दिखाई देना। इसके बाद उनकी बायोप्सी,ताकि बीमारी का सही पता लगाया जा सके।
बायोप्सी की रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें ग्रेड-4 ग्लियोब्लास्टोमा है। यह दिमाग का ब्रेन का खतरनाक और तेजी से फैलने वाला कैंसर माना जाता है। फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है।
टायलर की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी थी कि डॉक्टरों ने बताया कि वे कीमोथेरेपी जैसे इलाज के लिए भी फिट नहीं हैं। 25 मार्च को शुरुआती लक्षण दिखाई देने के सिर्फ कुछ ही हफ्तों बाद टायलर की मौत हो गई।
ब्रेन ट्यूमर का बढ़ता खतरा
- फोटो : Freepik.com
टायल के परिवार का मानना है कि अगर शुरुआत में ही बीमारी का सही पता चल जाता, तो शायद इलाज शुरू किया जा सकता था और कुछ उम्मीद बचती। कम से कम हमें यह सुकून होता कि हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की थी।
ब्रेन ट्यूमर रिसर्च की रिसर्च और पॉलिसी डायरेक्टर डॉ. करेन नोबल ने कहती हैं टायलर की कहानी उन हजारों परिवारों की दर्दनाक हकीकत को दिखाती है, जो हर साल इस बीमारी का सामना करते हैं।
दुनियाभर में बढ़ रहा है ब्रेन ट्यूमर का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया भर में, ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के ट्यूमर से हर साल लगभग 2.50 लाख लोगों की मौत होती है। यह दुनिया भर में कैंसर से होने वाली सभी मौतों का लगभग 2.5% है।
- वहीं ग्लियोब्लास्टोमा एक गंभीर प्रकार का ब्रेन कैंसर है जो एस्ट्रोसाइट्स नामक कोशिकाओं में शुरू होता है। ये तंत्रिका कोशिकाओं को सहारा देती हैं।
- यह वयस्कों में होने वाला सबसे आम और घातक ब्रेन ट्यूमर है। ग्रेड 4 का मतलब है कि ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा है और आसपास के मस्तिष्क ऊतकों में फैलने लगा है, जिससे इसे पूरी तरह से हटाना मुश्किल हो जाता है। टायलर को भी यही समस्या थी।
- ब्रेन में ट्यूमर किस जगह पर बन रहा है इसके आधार पर लोगों को लक्षण महसूस हो सकते हैं। ज्यादातर लोगों को दौरे पड़ने या सोचने-बोलने और देखने में समस्या के साथ शरीर के संतुलन में भी दिक्कतें होने लग जाती हैं।
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि गर्भनिरोधक दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मेनिन्जियोमा नाम के ब्रेन ट्यूमर का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया। कहीं आप भी तो इस तरह की गोलियों का सेवन नहीं कर रही हैं?
पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
--------------
स्रोत:
Credit to- 21-year-old man died from an incurable brain tumour
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।