अब विदेश ही नहीं बल्कि भारत में भी आप डायरेक्ट नल से पानी पी सकते हैं। इसे लेकर आप जरूर हैरान हो जाएंगे कि डायरेक्ट नल से पानी पीना कैसे सुरक्षित हो सकता है? चौंकिए मत दिल्ली सरकार ने दिल्ली के एक इलाके में ये काम शुरू भी कर दिया है।
दरअसल, इसके लिए पानी में Total Dissolved Solid नामक प्रक्रिया अपनाई जाती है। ये पानी में मौजूद कार्बनिक और अकार्बनिक तत्वों का मापन करती है। इस संबंध में कई देशों में स्पेशल टीम भी बनाई गई है जो इस पानी को जांचती हैं और इनमें स्वास्थ्य के लिए जो भी हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं उन्हें हटाती है। अलग-अलग देशों में TDS मापने का पैमाना अलग-अलग है।
पानी में अनेकों दूषित बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जो मानव के लिए बेहद खतरनाक हैं। इन नलों के लिए जो टीम बनाई गई है वह इसका पूरी ख्याल रख रही है कि इस पानी से दूषित कणों को हटाएं। लेकिन इनमें कुछ ऐसी प्राकृतिक चीजें भी हैं जो सेहत के लिए अच्छे होते हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों को नल का पानी पीने से एहतियात बरतने की जरूरत है। आइए जानते हैं, किन लोगों को
डायरेक्ट नल के पानी से दूर रहना चाहिए।
- जो लोग कीमोथेरेपी से गुजर रहे हैं।
- जिन्हें एड्स है।
- बच्चे और नवजात शिशु।
- प्रेग्नेंट औरतें।
हालांकि ये टीम पानी को स्वच्छ बनाने के लिए हर महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं लेकिन इसे बिलकुल साफ कर पाना मुश्किल है। दरअसल, पानी से तो लेड तो निकाल दिया जाता है लेकिन जिस पाइप से होकर ये पानी नल में आता है, वह हानिकारक है। क्योंकि पाइप प्लासटिक के होते हैं जिनमें 8% लेड होता है।