कोरोना की दूसरी लहर को विशेषज्ञ पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा शक्तिशाली और प्रभावी मान रहे हैं। इस बार ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि युवा लोग कोरोना के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। भले ही देश में अब भी कोरोना से रिकवरी रेट अच्छी है लेकिन लोगों में इस बार डर पहले से कहीं ज्यादा है। इस विपरीत समय में लोगों के मन में एक डर यह भी है कि अगर बच्चों को कोरोना का संक्रमण हो जाता है तो उनपर इसका प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है?
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर मंगलवार को हुई चर्चा में हमने डॉक्टरों से इसी बारे में जानने की कोशिश की। कार्यक्रम में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जैन और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन जैन ने बच्चों पर कोरोना के असर को लेकर सवालों के जवाब दिए।
क्या बच्चों को कोरोना का खतरा ज्यादा है?
इस सवाल के जवाब में डॉ विपिन कहते हैं कि फिलहाल इस बात को लेकर हमें खुशी है कि वायरस बच्चों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर रहा है। जिन बच्चों को पहले से ही कोई गंभीर बीमारी है खतरा सिर्फ उन्हें ही ज्यादा होता है। सामान्य बच्चों को अगर संक्रमण हो भी जाए तो वह आसानी से ठीक हो जा रहे हैं।
बच्चों को कोरोना हुआ तो क्या करें
डॉ विपिन कहते हैं कि अगर बच्चों को कोरोना हो जाए तो घबराएं नहीं, अब तक देखने को मिला है कि बच्चों पर इसका ज्यादा असर नहीं हो रहा है। दवाइयों के बजाय इस समय होम केयर की ज्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा बुखार और खांसी जैसे लक्षणों को सामान्य दवाओं के साथ ठीक किया जा सकता है। तेज बुखार के दौरान भी एसी, कूलर आदि चालू रखें, जिससे शरीर की ठंडक बनी रही। बार -बार पट्टी करते रहें।
कैसे रखें ख्याल
कोरोना के समय में बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए समय-समय पर पानी और जूस देते रहें। यहां एक बात का ध्यान जरूर दें कि बच्चों को काढ़ा या घरेलू उपचार आदि खुद से न दें। इसके लिए डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। कई घरेलू उपचारो का असर बच्चों के लिए कोरोना से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। बच्चों के फेफड़ों पर कोरोना वायरस का ज्यादा असर नहीं होता है, जिन बच्चों को जन्मजात हृदय रोग, किडनी या मानसिक रोगों की दिक्कत है सिर्फ उन्हें खतरा ज्यादा हो सकता है।
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नोट: यह लेख बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन जैन से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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