कोरोना के देशभर में तेजी से बढ़ते मामलों के कारण लोगों के मन में एक तरह का डर बन गया है। आलम यह है कि अब हर छोटी से छोटी परेशानी को कोरोना के मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है। चूंकि देश में कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, इस वजह से कई स्थानों पर कोरोना की जांच के लिए भी लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे यह जाना जा सके कि हम संक्रमित हैं या नहीं?
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर सोमवार के हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश की। डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसिन, एम्स के डॉ. अमनदीप सिंह और उजाला सिग्नस के इंटेंसिव केयर कंसलटेंट डॉ. प्रियरंजन इस कार्यक्रम का हिस्सा रहे। आइए जानते हैं इस बारे में डॉक्टरों का क्या कहना है?
कैसे जानें कि हम संक्रमित हैं या नहीं?
डॉ. अमनदीप सिंह बताते हैं कि एक साल पहले के कोरोना के मामलों में आमतौर पर गले में दर्द, बुखार और जुकाम जैसे लक्षण देखने को मिल रहे थे। इस बार स्ट्रेन में हुए बदलाव के कारणों लक्षणों में भी परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। इस बार के रोगियों में सांस की तकलीफ, आंख आने और बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते जैसी समस्याएं भी हो रही हैं। इसके अलावा कोविड संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों को भी संक्रमित माना जा सकता है़, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
कैसे जानें वायरल बुखार है या कोरोना?
डॉ. अमनदीप सिंह कहते हैं कि आमतौर पर वायरल बुखार और कोरोना के लक्षण एक जैसे ही होते है, इसलिए बिना जांच के इसमें फर्क कर पाना बहुत ही कठिन होता है। इसके लिए शक के आधार पर लोगों को आरटीपीसीआर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, जिससे मामले की पुष्टि की जा सके।
क्या आरटीपीसीआर टेस्ट पर भरोसा कर सकते हैं?
सवाल के जवाब में डॉ. प्रियरंजन कहते हैं कि आरटीपीसीआर टेस्ट को काफी प्रमाणित माना जाता है। कई ऐसे मामले भी आ रहे हैं जहां टेस्ट रिपोर्ट तो नेगेटिव आ जाती है लेकिन लोग संक्रमित पाए जाते हैं। इस बारे में डॉ. प्रियरंजन कहते हैं कि बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि टेस्ट का तरीका क्या है? स्वैब लेने के दौरान अगर आप असहज महसूस नहीं करते हैं तो संभव है कि आपके टेस्ट का रिपोर्ट सही न हो।