इम्यूनिटी मजबूत करने पर दें जोर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोरोना संक्रमण की दूसरी रफ्तार पर अब काफी हद तक काबू पा लिया गया है। संक्रमितों के घटते आंकड़े इस बात के सूचक हैं। हालांकि कोरोना से ठीक हो रहे लोगों में कई दिनों तक गंभीर थकान और कमजोरी की शिकायतें मिल रही हैं। इसको लेकर लोगों के मन में कई तरह से डर भी है। कोरोना के उपचार के लिए सामान्य तौर पर एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को प्रयोग में लाया जाता रहा है, हालांकि इस दौरान वैकल्पिक चिकित्सा ने भी लोगों को खासा आकर्षित किया है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य कई चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से भी कोरोना को ठीक करने और भविष्य में इस तरह की अन्य संक्रमण की स्थितियों से सुरक्षित रखने का दावा किया जा रहा है।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शुक्रवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञ से कोरोना से जंग में प्राकृतिक चिकित्सा की उपयोगिता के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान किचन रेमडीज स्पेशलिस्ट, डॉ प्रवीण कुमार अमर ने सभी सवालों के जवाब दिए।
प्राकृतिक चिकित्सा और कोरोना संक्रमण
डॉ प्रवीण बताते हैं कि कोरोना के उपचार के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी और कारगर उपाय है। हां, जहां तक बात कोरोना जैसे वायरस से भविष्य में सुरक्षित रहने की है, वहां पर प्राकृतिक चिकित्सा के काफी लाभ हो सकते हैं। सुबह खाली पेट चाय, कॉफी जैसी चीजें पीने से शरीर को कई नुकसान हो सकते हैं जिसका सीधा असर हमारी इम्यूनिटी को प्रभावित करता है। जो लोग डायबिटिक नहीं है उन्हें खाली पेट ग्लूकोज के दो बिस्कुट खाने चाहिए इसके बाद 20 मिनट इंतजार करें और फिर अपनी दिनचर्या के खान-पान को शुरू कर सकते हैं।
घरेलू औषधियां (सांकेतिक तस्वीर)
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6 बजे के बाद दूध के उत्पादों का सेवन न करें
डॉ प्रवीण बताते हैं कि शाम को 6 बजे के बाद दूध या दूध से बनी चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। हमारे लिए अभी सबसे जरूरी है बेस लाइन इम्यूनिटी को प्राप्त करना, इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लोगों में बेस लाइन की कमी देखी जा रही है। तमाम तरह की पर्यावरणीय समस्याओं के चलते लोगों में बेस लाइन इम्यूनिटी की कमी देखी जा रही है। पहले हमें इसे ठीक करने पर ध्यान देना होगा और इसके लिए दिनचर्या का ठीक होना बेहद जरूरी है।
प्रयोग में लाएं यह नुस्खा
डॉ प्रवीण बताते हैं- तेज पत्ता (22 ग्राम), मोटी इलाइची (25 ग्राम), छोटी इलाइची (50 ग्राम), लौंग (20 ग्राम), दालचीनी (20 ग्राम) और काली मिर्च (20 ग्राम) का पाउडर बनाकर उसे मिला लें। इसके 1 ग्राम की तीन खुराक बनाए। इसे सुबह नाश्त के बाद लें और इसके बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं। इससे गैस्ट्रो-इंटेसटाइनल सिस्टम को ठीक करने में मदद मिल सकती है। एलोपेथिक दवाइयों के साथ इसके सेवन से कोरोना के रोगियों को भी काफी आराम मिलता है।
काढ़े का सेवन
कोरोना के समय में बचाव के लिए खूब सारा काढ़ा पीना का चलन शुरू हो गया था, इसके चलते लोगों को अब सांस लेने में दिक्कत, पेट में तनाव और सूखी बवासीर की समस्या हो रही है। गर्मियों में काढ़े की जगह एक चौथाई चम्मच धनिया पाउडर और चुटकी भर दालचीनी का सेवन कर सकते हैं, दिन में एक से दो बार कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख किचन रेमडीज स्पेशलिस्ट, डॉ प्रवीण कुमार अमर से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ प्रवीण को प्राकृतिक उपचार में महारत हासिल है।
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