आजकल हर घर में बच्चे और बड़े दूध में तरह-तरह के पाउडर या माल्ट ड्रिंक्स मिलाकर पीते हैं। किसी को चॉकलेट फ्लेवर पसंद है तो किसी को बादाम पिस्ता लेकिन क्या स्वाद और सेहत के नाम पर दिए जाने वाले ये पाउडर वास्तव में फायदेमंद है, कह पाना मुश्किल है। टीवी पर ढ़ेरों ऐड रोजाना इनके फायदे गिनाते दिख जाते हैं और बच्चें खासतौर पर इन्हें पसंद करते हैं।
आइए जानते हैं कि दूध में मिलाए जाने वाले ये पाउडर फायदेमंद है या नहीं। बाजार में हॉर्लिक्स, कॉमप्लैन, बूस्ट, पिडियाशोर, बोर्नविटा, प्रोटिनेक्स जैसे कई नाम मौजूद हैं जिस पर महीनों खूब खर्चा होता हैं ताकि बच्चे दूध पीना पसंद करें। इस तरह के पाउडर स्वाद बढ़ाने के लिए शूगर यानि चीनी का खूब प्रयोग करते है। चीनी की ज्यादा मात्रा किसी को भी नुकसान करेगी।
कई ब्रांड चॉकलेट डाल देते हैं जिसे बच्चे बड़े चाव से पीते हैं। लेकिन ये चीजें दांतों और मुंह पर बुरा असर डालते हैं। इससे दांतों के टूटने के साथ कैविटी का भी खतरा मंडराता है।
इसके अलावा ये लंबे समय तक प्रयोग में लाए जा सकें इसके लिए प्रिजर्वेटिव डाले जाते हैं। साथ ही नकली रंग भी प्रयोग होता है ताकि ये स्वाद के साथ देखने में भी लोगों को लुभाएं। इस तरह के प्रिजर्वेटिव और नकली रंगों का शरीर पर हमेशा उल्टा असर पड़ता है। शोध बताते हैं कि इनके प्रयोग से बच्चों के व्यवहार पर उल्टा असर पड़ता है। ये यादाश्त और एकाग्रता पर भी असर डालता है।
चीनी से मिलने वाली कैलोरी किसी काम की नहीं होती है। इनसे किसी तरह की पोषण नहीं मिलता। खासतौर से डॉयबटीज और मोटापे से परेशान हैं तो इस तरह की कैलोरी किसी काम की नहीं है।
इस तरह के पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से तुरंत ताकत तो मिलती है लेकिन थोड़ी देर बाद इससे थकान और सुस्ती हो जाएगी। इससे बेहतर है कि किसी और तरीके से एनर्जी लाई जाए।
इनकी जगह पर दूध को फलों के साथ मिल्क शेक बनाकर पी सकते हैं। कुछ लोग केसर भी डाल सकते हैं। स्वाद के लिए दालचीनी का भी प्रयोग कर सकते हैं।