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सरसों या नारियल नहीं, इस तेल में पकाएं खाना, सेहत के लिए है सबसे लाभकारी

Sun, 13 Sep 2020 10:18 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सरसों का तेल, कनोला ऑयल, नारियल का तेल, एवेकाडो ऑयल, मूंगफली का तेल, ऑलिव ऑयल, अलसी का तेल, पामोलीन ऑयल, लिस्ट बहुत लंबी है। खाने-पकाने के लिए तेल के बहुत सारे विकल्प हैं, मगर कौन सा तेल सेहत के लिए सबसे अच्छा है? खाने और सेहत को लेकर फिक्रमंद लोग अक्सर इस सवाल से दो चार होते हैं। खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल अक्सर उसके फल, पौधे, बीज या नट से तय होते हैं। इन्हें कुचलकर, दबाकर या प्रॉसेस करके निकाला जाता है। तेल की सबसे बड़ी खूबी ये होती है कि उसमें फैट की मात्रा काफी होती है। इसमें सैचुरेटेड फैट, मोनोसैचुरेटेड फैट और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड शामिल होते हैं। 
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नारियल का तेल - फोटो : Pixabay
कुछ वर्षों पहले तक नारियल के तेल को सेहत के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता था। कई लोगों ने तो इसे सुपरफूड घोषित कर दिया था। कुछ लोगों का दावा था कि इस तेल के वसा के रूप में शरीर मे जमा होने की संभावना बेहद कम थी, लेकिन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च ने नारियल तेल को 'विशुद्ध जहर' करार दे दिया। इसकी वजह ये है कि इंसान का शरीर बहुत ज्यादा फैट नहीं पचा सकता और अधिक फैट हमारे शरीर में जमा होने लगता है, जो दिल की बीमारियां और ब्लड प्रेशर जैसी सेहत की समस्याएं पैदा करता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन में सरकार की गाइडलाइन कहती है कि किसी पुरुष को दिन भर में तीस ग्राम और महिला को बीस ग्राम से अधिक तेल नहीं खाना चाहिए। इसकी वजह भी समझिए। तेल में जो फैट होता है, वो फैटी एसिड के कणों से मिलकर बनता है। ये फैटी एसिड या तो सिंगल बॉन्ड से जुड़े होते हैं, जिन्हें सैचुरेटेड फैट कहते हैं या फिर डबल बॉन्ड से जुड़े होते हैं, जिन्हें अनसैचुरेटेड फैट कहते हैं। जो फैटी एसिड छोटी श्रृंखला में बंधे होते हैं, वो खून में सीधे घुल जाते हैं और शरीर की एनर्जी की जरूरत पूरी करते हैं, लेकिन, लंबी चेन वाले फैटी एसिड सीधे लिवर में जाते हैं। इससे हमारे खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। 

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नारियल का तेल - फोटो : Pixabay
नारियल के तेल को लेकर हुई रिसर्च कहती है कि इससे हमारे शरीर में लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन (LDL) की मात्रा बढ़ जाती है। LDL का सीधा संबंध दिल के दौरे से पाया गया है। हालांकि नारियल के तेल से हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन (HDL) भी मिलती है, जो खून से LDL को खींच लेती है। वर्जिनिया की जॉर्ज मैसन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टेलर वॉलेस कहते हैं कि, 'HDL में लॉरिक एसिड नाम का केमिकल होता है, जिसे C12 फैटी एसिड कहा जाता है। ये लॉन्ग चेन वाला फैटी एसिड होता है, जो लिवर में जमा हो जाता है। इससे स्वास्थ्य की दिक्कतें पैदा होती हैं।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इसीलिए, जानकार कहते हैं कि जिस तेल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम हो उसे खाना बेहतर होता है और इसे भी कम मात्रा में ही खाना चाहिए। पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और ओमेगा-3,6 फैट वाले तेल खाना बेहतर होता है। इससे खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और शरीर को जरूरी फैटी एसिड और विटामिन मिल जाते हैं। पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोसैचुरेटेड फैट वाले फैटी एसिड कई तेलों में पाए जाते हैं। इनकी मात्रा पौधे और तेल निकालने की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। 
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ऑलिव ऑयल - फोटो : Pixabay
एक सर्वे में पाया गया है कि ऑलिव ऑयल का ज्यादा इस्तेमाल दिल की बीमारियों की आशंका को पांच से सात प्रतिशत तक कम कर देता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की वैज्ञानिक मार्टा गॉश फेरे ने 24 साल तक एक लाख लोगों पर एक स्टडी की। उन्होंने पाया कि जो हर तरह के ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, उनमें दिल की बीमारियों की आशंका 15 प्रतिशत तक कम हो जाती है। जैतून के तेल के फायदों की बड़ी वजह उसमें पाए जाने वाले मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड हैं, जिनमें विटामिन, मिनरल्स, पॉलीफेनॉल्स और पौधों में पाए जाने वाले दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। मार्टा कहती हैं कि ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करने से हमारे खाने से जुड़े अन्य नुकसानदेह फैटी एसिड से भी छुटकारा मिलता है। 
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ऑलिव ऑयल - फोटो : Pixabay
ऑलिव ऑयल

जैतून को फोड़ कर उनके गूदे से ऑलिव ऑयल को निकाला जाता है। इसे सबसे सेहतमंद तेल कहा जाता है, जो हमारे पेट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया के लिए भी अच्छा होता है। इससे दिल की बीमारियां कम होने की बातें कही जाती हैं। ऑलिव ऑयल खाने से कैंसर और डायबिटीज से बचाव के दावे भी किए जाते हैं। स्पेन की वैलेंशिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांसिस्को बार्बा कहते हैं कि, 'जैतून के तेल में मिलने वाले फैटी एसिड और दूसरे तत्व हमें असंक्रामक बीमारियों से भी बचाते हैं, क्योंकि इसमें वो तत्व होते हैं, जिनकी हमारे शरीर की जरूरत होती है।'

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ऑलिव ऑयल - फोटो : Pixabay
भूमध्य सागर के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग ऑलिव ऑयल का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। इसे मेडिटेरेनियन डाइट का अटूट हिस्सा कहा जाता है और मेडिटेरेनियन डाइट को विश्व की सबसे हेल्दी डाइट माना जाता है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस डाइट के हेल्दी होने की सबसे बड़ी वजह, जैतून का तेल ही है। लेकिन, मार्टा का कहना है कि, 'दुनिया के दूसरे इलाकों के मुकाबले भूमध्य सागर के इर्द गिर्द के खान-पान में नट्स हैं, फल हैं और सब्जियों की मात्रा भी ज्यादा होती है।' तो, हेल्थ के पैमानों पर मेडिटेरेनियन डाइट के अच्छा साबित होने के पीछे केवल ऑलिव ऑयल नहीं, बल्कि पूरा खान-पान है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तेल कम मात्रा में खाना ही ठीक

रिसर्चरों ने पाया है कि अन्य क्षेत्रों के मुकाबले, भूमध्य सागरीय क्षेत्र की डाइट लेने से खून में ग्लूकोज का लेवल कम होता है। कुछ लोग ये दावा करते हैं कि एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल लेना और भी सेहतमंद है। मगर, हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि भले ही इसमें एंटी ऑक्सिडेंट और विटामिन ई की मात्रा ज्यादा हो, पर ये बहुत कम तापमान पर गर्म हो जाता है। इससे इस तेल के कई पोषक तत्व गर्म करने पर नष्ट हो जाते हैं, तो इसे कच्चा लेने पर ही सेहत को फायदा होगा। 

2011 में यूरोपीय फूड सेफ्टी अथॉरिटी ने ऑलिव ऑयल बनाने वालों को इस बात की इजाजत दे दी थी कि वो इस तेल से ऑक्सिडेटिव तनाव कम करने का दावा कर सकते हैं। इसी तरह एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को भी कम आंच पर गर्म करके पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। 
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ऑलिव ऑयल - फोटो : Pixabay
हालांकि, तेल कोई भी हो, कम मात्रा में खाना ही ठीक होगा। इस स्टोरी में वेस्टर्न डाइट और वहां के खान-पान के रिसर्च को ही आधार बनाया गया है। भारत में लोग सरसों के तेल से लेकर मूंगफली और अलसी के तेल तक, खाना पकाने के लिए कई तरह के तेल इस्तेमाल करते हैं। निष्कर्ष ये है कि आप तेल जो भी खाएं उसे बहुत अधिक न गर्म करें। बार-बार गर्म करके तेल को इस्तेमाल न करें और संयमित होकर ही तेल का इस्तेमाल करें। यही सेहत के लिए अच्छा होगा। 
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