वेंटिलेटर सपोर्ट पर मरीज
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गंभीर रोगों का कारण बन रही है ये बीमारी
खबरों के मुताबिक ये बीमारी कई लोगों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का भी कारण बन रही है। पुणे में करीब 16 लोगों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है, वहीं नागपुर में एक 8 साल के मरीज को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था जो अब वेंटिलेटर पर रखा गया है, उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। एक 40 साल की मरीज भी आईसीयू में वेंटिलेटर पर है।
इस रोग के कारण अब तक एक मौत की खबर है। सोलापुर सरकारी मेडिकल कॉलेज के डीन ने बताया कि सांस फूलने, निचले अंगों में कमजोरी और डायरिया जैसी समस्याओं से पीड़ित एक मरीज को 18 जनवरी को सोलापुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था हालांकि रविवार (26 जनवरी) को उसकी मौत हो गई।
गिलियन बैरे सिंड्रोम के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं।
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आप भी तो नहीं हो गए हैं इस बीमारी के शिकार?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं गिलियन बैरे सिंड्रोम के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। समय रहते लक्षणों पर ध्यान देकर अगर इलाज प्राप्त कर लिया जाए तो रोग को गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले ठीक किया जा सकता है। समय पर इलाज प्राप्त करने वाले ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं। आपको ये बीमारी तो नहीं हो गई है, इस बारे में जानने के लिए अपने लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दें।
अगर आपको हाथ और पैर की उंगलियों, टखनों या कलाई में सुई चुभने जैसा एहसास हो रहा है, सांस की दिक्कत हो या किसी अंग में असामान्य रूप से कमजोरी महसूस हो रही हो तो इसे बिल्कुल अनदेखा न करें।
हाथों में दर्द और चुभन की समस्या
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कैसे करें बीमारी की पहचान?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि गिलियन बैरे सिंड्रोम आपके पेरीफेरल नर्वस को अटैक करती है। ये तंत्रिकाएं मांसपेशियों की गति, शरीर में दर्द के संकेत, तापमान और शरीर को छूने पर होने वाली संवेदनाओं का एहसास कराती हैं। इन तंत्रिकाओं को होने वाली क्षति के कारण आपको अंगों में कमजोरी, चुभन, लकवा मारने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
जीबीएस के कारण होने वाली गंभीर स्थिति में आपको गंभीर रूप से लकवा मारने और सांस लेने में समस्या हो सकती है। सांस की दिक्कत वाले मरीजों को आईसीयू या वेंटिलेटर पर रखने की भी जरूरत होती है ताकि शरीर में ऑक्सीजन के संचार में कोई दिक्कत न आने पाए। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहें।
- पैरों में कमजोरी जो शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैल रही हो।
- चलने या सीढ़ियां में असमर्थ होना।
- बोलने, चबाने या निगलने में परेशानी होना।
- पेशाब पर नियंत्रण न रह जाना या हृदय गति का बहुत बढ़ जाना।
समय पर लें डॉक्टर की सलाह
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कब जाएं डॉक्टर के पास?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पुणे-नागपुर सहित जिन शहरों में ये बीमारी ज्यादा देखी जा रही है वहां लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अगर आपके हाथ-पैर की उंगलियों में झुनझुनी-चुभन हो रही है और ये शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल रही हो, सीधे लेटने पर सांस लेने में परेशानी हो रही है, दम घुटने जैसा लग रहा हो तो बिना देर किए इमरजेंसी में डॉक्टर के पास जाएं। गिलियन बैरे सिंड्रोम एक गंभीर स्थिति है जिसके लिए तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है क्योंकि इसके लक्षण बहुत तेजी से बिगड़ने लगते हैं। जितनी जल्दी इलाज शुरू हो जाए मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
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स्रोत और संदर्भ
Guillain-Barré Syndrome
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