खांसी निकली दिल की खतरनाक बीमारी
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तीन साल की बच्ची की खांसी कैसे बन गई जानलेवा
स्थानीय मीडिया में प्रकाशित ये रिपोर्ट सभी माता-पिता के लिए अलार्म है कि बच्चों में कोई भी समस्या अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो उसे हल्के में लेने की गलती न करें।
पेनी डन बिल्कुल स्वस्थ और बहुत एक्टिव बच्ची थी। उसे आमतौर पर सर्दी-जुकाम भी बहुत कम होता था। लेकिन क्रिसमस के आसपास उसे खांसी शुरू हुई। नया साल आने के बाद भी खांसी ठीक नहीं हुई और उसे सांस लेने में परेशानी भी होने लगी। हालत बिगड़ता देख मां कोर्टनी उसे डॉक्टर के पास ले गईं। डॉक्टर ने जांच के बाद उसे सांस की तकलीफ के लिए कुछ दवाएं और इनहेलर दिया। लेकिन इलाज से पेनी की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। गर्मियां आते-आते उसकी तबीयत और बिगड़ गई और उसे दौरे भी पड़ने लगे।
बच्ची की स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टरों की टीम ने फिर से जांच किया जिसकी रिपोर्ट सभी को चौंकाने वाली थी। पेनी को डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (डीसीएम) नाम की गंभीर बीमारी है।
इसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर होकर दिल को असामान्य रूप से बड़ा कर देती हैं।
इससे हार्ट के लिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पर्याप्त खून पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
डॉक्टरों ने सतर्कता दिखाते हुए दिल को ठीक करने के लिए बड़ी सर्जरी भी की, लेकिन तब तक बीमारी पेनी के शरीर में खून और ऑक्सीजन के प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित कर चुकी थी। उसके दिमाग और दूसरे अंगों तक भी पर्याप्त खून और ऑक्सीजन का प्रवाह काफी बाधित हो चुका था।
ऑपरेशन के कुछ ही हफ्तों बाद पेनी ने प्रतिक्रिया देना लगभग बंद कर दिया। आखिरकार 6 जुलाई को उसके माता-पिता को बेहद दर्दनाक फैसला लेना पड़ा और उन्होंने उसकी जीवन रक्षक मशीन बंद करने की अनुमति दी।
कोर्टनी कहती हैं, वह ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी थी, जहां से अगर वह बच भी जाती तो उसकी जिंदगी सामान्य नहीं रह पाती। उसे हमेशा सांस लेने वाली मशीन पर रखना पड़ता। मैं किसी को दोष नहीं देती, क्योंकि डॉक्टरों ने अपनी पूरी कोशिश की।
डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी की समस्या के बारे में जानिए
डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (डीसीएम) दिल की मांसपेशियों की एक ऐसी बीमारी है जो दुनियाभर में लगभग हर 250 में से 1 व्यक्ति को प्रभावित करती है। यह दिल की कमजोरी यानी हार्ट फेलियर का बड़ा कारण है। हालांकि यह बीमारी बच्चों की तुलना में वयस्कों में ज्यादा देखने को मिलती है। लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चों में इसका खतरा अधिक हो सकता है।
विशेषज्ञ अभी तक यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि बच्चों में यह बीमारी क्यों होती है।
हालांकि कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कुछ आनुवंशिक बदलाव यानी माता-पिता से मिलने वाले जीन में बदलाव और कुछ वायरल संक्रमण जैसी स्थितियां इसके खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।
मां कोर्टनी कहती हैं, शुरुआत में हमें बताया गया था कि ये बच्चों में होने वाला सामान्य संक्रमण है। लेकिन उसकी खांसी ठीक नहीं हो रही थी। धीरे-धीरे हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे खांसी के साथ उल्टियां भी होने लगीं। हमें अस्पताल में डॉक्टर के पास जाने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं। वह सीढ़ियां चढ़ने के बाद कम से कम पांच मिनट तक बहुत ज्यादा हांफती रहती थी।"
डॉक्टर ने भी कहा भी था कि तीन साल की बच्ची का इतनी ज्यादा सांस फूलना सामान्य नहीं है।
बच्चों की सेहत पर गंभीरता से दें ध्यान
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कुछ ही हफ्तों में पेनी की हालत पूरी तरह बदल गई। जो बच्ची कुछ समय पहले तक बहुत खुश रहती थी और इधर-उधर दौड़ती रहती थी, वह अब बेहद सुस्त रहने लगी और खाना तक खाने से मना करने लगी।
जून के आखिर में स्कूल की खेल प्रतियोगिता के दौरान पेनी को अचानक दौरा पड़ा। जांच में डॉक्टरों ने पाया कि उसका दिल सामान्य तरीके से धड़क ही नहीं रहा था और शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचा पा रहा था।
हालत की गंभीरता को देखते हुए उसे एडवांस लाइफ सपोर्ट मशीन पर रखा गया। यह ऐसी मशीन होती है जो शरीर के जरूरी कामकाज को सहारा देती है, जब शरीर खुद उन्हें ठीक से नहीं कर पाता।
डॉक्टरों ने उसके दिल की धड़कन को सामान्य करने के लिए ऑपरेशन किया। शुरुआत में ऐसा लगा कि सर्जरी का असर अच्छा हुआ है। हम सभी बहुत खुश थे क्योंकि ऑपरेशन के बाद जब वह बाहर आई तो उसकी दिल की धड़कन स्थिर थी। मुझे लगा कि हमारी बेटी अब घर वापस आएगी। हालांकि ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।
आगे की रिपोर्ट्स में डॉक्टरों ने जो बताया उससे मेरा दिल बैठ गया, क्योंकि मैं जानती थी कि दिल को तो ठीक किया जा सकता है, लेकिन दिमाग को ठीक नहीं किया जा सकता।
इस बीमारी से पीड़ित कुछ मरीज हार्ट ट्रांसप्लांट की मदद से ठीक हो सकते हैं। लेकिन पेनी की हालत बहुत जटिल हो चुकी थी, इसलिए वह इस इलाज के लिए उपयुक्त नहीं थी। हमें यह भी बताया गया था कि अगर पेनी को नया दिल मिल भी जाता, तब भी उसके बचने की संभावना नहीं थी। आखिरकार परिवार के सामने जीवन रक्षक मशीन बंद करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।
इस पूरी घटना को याद करते हुए कोर्टनी कहती हैं, मुझे अफसोस है कि जब उनकी बेटी पहली बार बीमार हुई थी, तब हमने तुरंत आगे की जांच के लिए ज्यादा जोर नहीं दिया।
मैं माता-पिता को डराना नहीं चाहती, लेकिन बस इतना सलाह देना चाहती हूं कि अगर आपके बच्चे में कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लें। समय पर जांच और इलाज शायद पेनी जैसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकती है।
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स्रोत:
Dilated Cardiomyopathy
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