फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EBV: एक बार संक्रमण और जीवनभर का खतरा, कैंसर का भी कारण बन सकता है ये वायरस; 95% लोग हो चुके हैं शिकार

Sat, 21 Feb 2026 01:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Epstein-Barr virus Risk: बीते एक दशक में दुनियाभर में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का दौर देखा गया है। कोरोनावायरस का व्यापक असर हम सबने बड़े करीब से अनुभव किया है। अब विशेषज्ञों की टीम एपस्टीन-बार वायरस के खतरे को लेकर लोगों को सावधान कर रही है। एक बार इस वायरस का सक्रमण हो जाने के बाद ये जीवनभर के लिए शरीर में बना रह सकता है। दुनिया में लगभग 90-95% वयस्क किसी न किसी समय इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। 
विज्ञापन
संक्रामर रोगों का खतरा - फोटो : Amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले कुछ वर्षों में दुनियाभर में संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। साल 2020-2023 के दौरान कोरोनावायरस महामारी और इसके जोखिमों का हम सभी ने बड़े करीब से अनुभव किया है।

विज्ञापन


कोविड महामारी ने यह साफ कर दिया कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं और वैश्विक स्तर पर किस तरह से स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकते हैं? कोरोना के अलावा बीते कुछ वर्षों में म्यूकोरमाइकोसिस, निपाह वायरस और फ्लू के नए स्ट्रेनों ने भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ाई है। 

हाल के वर्षों में इंसानों में फैली ज्यादातर बड़ी बीमारियों की जड़ जानवरों से जुड़ी देखी गई है। इस तरह की बीमारियों का जूनोटिक बीमारियां कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वनों की कटाई और शहरीकरण के चलते जंगली जानवर और इंसानों का संपर्क बढ़ गया है जिसके कारण अब संक्रामक बीमारियों के मामले पहले की तुलना में कहीं ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
विज्ञापन


वायरस और बैक्टीरिया के कारण इंसानी सेहत के खतरों पर नजर रखने वाली वैज्ञानिकों की टीम ने एक और संक्रामक रोग के लेकर लोगों को सावधान किया है। विशेषज्ञों ने एपस्टीन-बार वायरस को लेकर अलर्ट किया है। इस वायरस को कई मामलों में इंसानों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

नई संक्रामक बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos
एपस्टीन-बार वायरस (ईबीवी) का खतरा

वैज्ञानिकों की टीम ने एक रिपोर्ट में अलर्ट किया है कि दुनियाभर में एपस्टीन-बार वायरस (ईबीवी) का खतरा देखा जा रहा है। ये कोरोना जितना आक्रमक नहीं है, इसलिए अक्सर लोगों का इस खतरे पर ध्यान नहीं जाता है। हालांकि अध्ययन की रिपोर्ट्स में इस संक्रामक रोग को लेकर जो बातें सामने आई हैं, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली हैं। एपस्टीन-बार वायरस नया नहीं है, चूंकि ये ज्यादा आक्रमक नहीं है इसलिए इसलिए इसको लेकर चर्चा कम होती है।
 
  • दुनिया की 95% से ज्यादा वयस्क आबादी एपस्टीन-बार वायरस से कभी न कभी संक्रमित हो चुकी है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसका कभी पता ही नहीं चलता। 
  • इस इन्फेक्शन के लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोगों का ध्यान ही नहीं जाता है।
  • हालांकि चिंताजनक बात ये है कि अगर आप एक बार इस संक्रमण की चपेट में आ गए तो ये वायरस जिंदगी भर शरीर में रह जाता है।
  • कुछ अध्ययनों में इस वायरस को कुछ प्रकार के कैंसर को बढ़ाने वाला भी पाया गया है।

एपस्टीन-बार वायरस को लेकर अलर्ट - फोटो : Adobe Stock Photos
कैसे फैलता है ये संक्रमण?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों का कहना है कि एपस्टीन-बार वायरस दुनिया में सबसे आम ह्यूमन वायरस में से एक है। इसे ह्यूमन हर्पीसवायरस-4 के नाम से भी जाना जाता है और यह हर्पीस वायरस फैमिली का सदस्य है।
 
  • ईबीवी की खोज 1964 में डॉ. एंथनी एपस्टीन की प्रयोगशाला में की गई थी। 
  • एपस्टीन-बार वायरस संक्रमित व्यक्ति के लार (थूक) के संपर्क में आने से आसानी से फैलता है। 
  • संक्रमित व्यक्ति की चीजों को साझा करने, जैसे एक प्लेट में खाने, एक ही गिलास से पानी पीने से ये संक्रमण दूसरे लोगों में फैल सकता है।
  • चुंबन को भी इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार माना जाता है, यही कारण है कि इसे किसिंग-डिजीज भी कहा जाता है।

इस संक्रमण को इसलिए भी खतरनाक माना जाता है क्योंकि आमतौर पर संक्रमितों में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं ऐसे में आप जाने-अनजाने कई लोगों को ये बीमारी फैला सकते हैं। 

संक्रमण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
कैसे जानें कि किसी को एपस्टीन-बार वायरस का संक्रमण तो नहीं?

एपस्टीन-बार वायरस का संक्रमण वैसे तो काफी हल्का होता है हालांकि कुछ लोगों में ये कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है।
 
  • अक्सर थकान- बुखार या गले में सूजन
  • स्प्लीन का बढ़ना या लिवर में सूजन
  • त्वचा पर रैशेज।
  • आमतौर पर ये संक्रमण 2 से 4 हफ्ते में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ लोगों को कई महीनों तक थकान महसूस हो सकती है।

ईबीवी संक्रमण को लेकर अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात के भी पक्के सबूत मिले हैं कि यह मल्टीपल स्क्लेरोसिस का भी एक कारण हो सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें हमारा इम्यून सिस्टम दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर अटैक कर देता है।

विशेषज्ञों ने बताया, एक बार संक्रमण के बाद ये वायरस हमेशा शरीर में बना रहता है हालांकि कुछ ऐसे स्थितियां हैं जो इसे ट्रिगर भी कर सकती हैं। जो लोग ज्यादा तनाव लेते हैं, इम्युनिटी कमजोर है या फिर मेनोपॉज के कारण होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों की वजह से भी शरीर में मौजूद वायरस ट्रिगर हो सकता है।
विज्ञापन

संक्रमण की रोकथाम के लिए क्या करें? - फोटो : Freepik.com
इस वायरस से बचाव के लिए क्या करें?

एपस्टीन-बार वायरस का कोई इलाज नहीं है। संक्रमण के लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टर सहायक चिकित्सा दे सकते हैं। एक बार वायरस से इन्फेक्टेड होने के बाद, यह आपके शरीर में डॉर्मेंट (सुस्त अवस्था) हालत में रहता है, जिसका मतलब है कि अगर आपका शरीर स्ट्रेस या कमजोर इम्यून सिस्टम के जरिए इसे ट्रिगर करता है तो यह फिर से एक्टिवेट हो सकता है। हाल के अध्ययनों में विशेषज्ञों ने कुछ एंटीबॉडीज विकसित करने पर काम किया है जिससे वायरस को रोका जा सके।

एपस्टीन-बार वायरस से बचे रहने के लिए आप कुछ सावधानियां बरत सकते है।
 
  • किसी ऐसे व्यक्ति के साथ खाना या ड्रिंक शेयर न करें जिसे यह संक्रमण है।
  • संक्रमित व्यक्ति को किस न करें या शारीरिक संबंध न बनाएं। 
  • हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। किसी भी सतह को छूने के बाद हाथों को अच्छे से धोएं। 


-------------
स्रोत और संदर्भ
Epstein-Barr Virus (EBV)

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें