सेडेंटरी लाइफस्टाइल से कैंसर का खतरा
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लाइफस्टाइल में बदलाव से रोका जा सकता है कैंसर
विशेषज्ञों की एक टीम ने बताया कि लाइफस्टाइल में अगर कुछ आसान से बदलाव कर लिए जाएं तो हर तीन में से एक कैंसर को रोका जा सकता है। फेफड़े, पेट और सर्वाइकल कैंसर के खतरे को आप आसानी से कम कर सकते हैं।
- अपने तरह के पहले अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यूएस और यूके समेत लगभग 200 देशों में 36 अलग-अलग तरह के कैंसर के 19 मिलियन (1.9 करोड़) से अधिक मामलों का एनालिसिस किया।
- टीम ने पाया कि करीब 38 प्रतिशत (करीब 71 लाख) कैंसर के मामले ऐसे थे जिनमें अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर लिए जाते तो इन्हें रोका जा सकता था।
कैंसर के मामले क्यों बढ़ते जा रहे हैं?
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पुरुषों और महिलाओं में बढ़ते कैंसर के कारण
अब सवाल ये है कि किन आदतों को कैंसर बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार पाया जा रहा है?
इस बारे में शोधकर्ताओं ने अलर्ट करते हुए कहा है कि धूम्रपान और शराब दो ऐसी आदतें हैं, जिनमें अगर सुधार कर लिया जाए तो कई गंभीर तरह के कैंसर से बचाव किया जा सकता है।
- विशेषज्ञों ने कहा, दुनियाभर में स्मोकिंग रेट्स में कमी आई है। बावजूद इसके तंबाकू और स्मोकिंग कैंसर का सबसे बड़ा मॉडिफाइड रिस्क फैक्टर पाया गया है।
- ये आदत कैंसर के हर छह मामलों में से एक के लिए जिम्मेदार पाया गया है।
- धूम्रपान और तंबाकू की आदत, पुरुषों में सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला रिस्क फैक्टर था।
महिलाओं में कैंसर के कारण
- यौन संचारित संक्रमण ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) सर्वाइकल और एनल कैंसर का एक मुख्य कारण है। इसे वैक्सीनेशन और सेफ यौन संबंध प्रैक्टिस से रोका जा सकता है।
- महिलाओं में इसे कैंसर का सबसे बड़ा कारण पाया गया है। जबकि शराब तीन प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है।
- महिलाओं में कैंसर के दूसरे रिस्क फैक्टर में ठीक से ब्रेस्टफीडिंग न करवाना, प्रदूषण, व्यायाम की कमी और रसायनों का संपर्क जिम्मेदार पाया गया है।
कैंसर को रोकने के लिए क्या किए जाएं?
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कैंसर से बचाव इतना भी कठिन नहीं
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिका में कैंसर से बचने की दर अब पहले से कहीं ज्यादा है। 10 में से सात मरीज अपने डायग्नोसिस के बाद कम से कम पांच साल तक जिंदा रहते हैं। यह 2000 के 64 प्रतिशत और 1970 के दशक के लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा है।
- शोधकर्ताओं ने कहा, ये नतीजे कैंसर के रिस्क फैक्टर्स पर ध्यान देने की बढ़ती जरूरत का इशारा करते हैं जिन्हें बदला जा सकता है।
- धूम्रपान-शराब से दूरी और डाइट में बदलाव कम उम्र से ही अगर आदत में शामिव कर लिए जाते हैं तो इस बीमारी को आसानी से रोकने में मदद मिल सकती है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि साल 2022 में, दुनियाभर में 1.87 करोड़ से अधिक कैंसर डायग्नोस हुए। उनमें से 71 लाख (38 प्रतिशत) कुल मिलाकर मॉडिफाइड रिस्क फैक्टर्स के कारण थे। लिंग के हिसाब से देखें तो, महिलाओं में 27 लाख (30 प्रतिशत) नए कैंसर के मामले जबकि पुरुषों में 43 लाख (45 प्रतिशत) कैंसर के मामले ऐसे थे जिन्हें पहले से सावधानी बरतकर रोका जा सकता था।
कैंसर से बचने के लिए कौन सी आदतें छोड़ें?
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कैंसर के 30 जोखिम कारकों को जान लीजिए
अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर विशेषज्ञों की टीम ने कैंसर के 30 जोखिम कारकों के बारे में जानकारी दी है, जिनमें अगर समय रहते सुधार कर लिया जाए और कुछ आदतें छोड़ दी जाएं तो आप खुद को कैंसर के खतरे से सुरक्षित रख सकते हैं।
- धूम्रपान की आदत।
- तंबाकू-गुटखा चबाना
- शराब पीना।
- बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अधिक होना।
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- ब्रेस्टफीडिंग न कराना।
- एयर पॉल्यूशन
- अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन
- हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H पाइलोरी)
- ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी)
- हेपेटाइटिस बी संक्रमण
- हेपेटाइटिस सी संक्रमण
- एपस्टीन-बार वायरस
- ह्यूमन हर्पीसवायरस टाइप 8
- शिस्टोसोमा हेमेटोबियम
- ह्यूमन T-सेल लिम्फोट्रोपिक वायरस
- ओपिसथोर्किस विवरिनी और क्लोनोर्किस साइनेंसिस
- एस्बेस्टस
- आर्सेनिक
- बेंजीन
- बेरिलियम
- कैडमियम
- क्रोमियम
- डीजल इंजन एग्जॉस्ट
- फॉर्मेल्डिहाइड
- निकेल
- पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन
- सिलिका
- सल्फ्यूरिक एसिड
- ट्राइक्लोरोइथिलीन
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स्रोत
Global and regional cancer burden attributable to modifiable risk factors to inform prevention
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