भारतीय लोगों में डायबिटीज का खतरा
- फोटो : Freepik.com
भारत में डायबिटीज और इसका बढ़ता खतरा
अध्ययन की ये रिपोर्ट इसलिए जरूरी और चिंताजनक है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे देश की आबादी बूढ़ी होगी, मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में मधुमेह के मामले और भी बढ़ेंगे। उम्र बढ़ने के साथ इसके लक्षण और गंभीरता भी अधिक होने की आशंका है, जिसके कारण न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दवाब बढ़ेगा, बल्कि इसके कारण बड़ा संख्या में लोगों को गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
डायबिटीज और इसके कारण होने वाली जटिलताएं
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज मुंबई और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को अपनी मधुमेह की स्थिति की जानकारी थी उसमें से 46 प्रतिशत लोगों ने दवाओं और अन्य सहायक उपचार के माध्यम से ब्लड शुगर के स्तर को काफी कंट्रोल कर लिया। इसी तरह लगभग 60 प्रतिशत ने रक्तचाप को नियंत्रित करने में सफलता पाई।
ये देखते हुए आवश्यक है कि समय रहते लोगों को अपनी स्वास्थ्य समस्या की जानकारी हो जाए, जिससे उसका प्रबंधन सही तरीके से किया जा सके। टीम ने बताया कि छह प्रतिशत लोग हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए लिपिड कम करने वाली दवा ले रहे थे।
सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है डायबिटीज का जोखिम
- फोटो : Freepik.com
शहरी आबादी में खतरा और भी अधिक
ये अध्ययन साल 2017-2019 के दौरान 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 60,000 वयस्कों पर किया गया। इसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि मेटाबॉलिज्म संबंधी इस बीमारी का प्रसार पुरुषों और महिलाओं में समान था (लगभग 20 प्रतिशत)। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में डायबिटीज के मामले दोगुना देखे गए।
इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया कि आर्थिक रूप से अधिक विकसित राज्यों में मधुमेह का प्रसार भी अधिक था। यहां लगभग एक तिहाई या उससे अधिक लोगों में मधुमेह की समस्या थी।
डायबिटीज का प्रबंधन जरूरी
- फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं अध्ययन के लेखक?
लेखकों के निष्कर्ष उस धारणा का समर्थन करते हैं कि भारतीय आबादी में पोषण का स्तर उस चरण में बना हुआ है जहां से मधुमेह का प्रसार अधिक हो सकता है। टीम ने कहा कि वृद्धावस्था वाले आयु समूहों में मधुमेह के अधिक प्रसार को दर्शाने वाले परिणाम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश की जनसंख्या तेजी से वृद्ध हो रही है। इससे आने वाले वर्षों में देश में डायबिटीज के मामलों में और भी वृद्धि आने की आशंका है।
आने वाले वर्षों में, मधुमेह से पीड़ित मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों की कुल संख्या बढ़ सकती है, जिसको लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। चूंकि डायबिटीज केवल ब्लड शुगर लेवल बढ़े रहने की समस्या नहीं है, इसका असर शरीर के कई अन्य अंगों पर भी पड़ता है इसलिए खतरा और भी अधिक हो सकता है जिसको लेकर अलर्ट रहना जरूरी है।