आरएसवी वायरस और इसका फेफड़ों पर असर
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निमोनिया और फेफड़ों के संक्रमण वाले वायरस का खतरा
नेशनल हेल्थ सर्विसेज (एनएचएस) विशेषज्ञों का मानना है कि खांसी और छींक से फैलने वाले इस वायरस के कारण हर साल ब्रिटेन में लगभग 30,000 बच्चे और 18,000 वयस्क निमोनिया और फेफड़ों के संक्रमण जैसी गंभीर सांस संबंधी जटिलताओं के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। यह वायरस शिशुओं में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। हर सर्दियों में लगभग 20 से 30 बच्चे इस वायरस के कारण मौत का शिकार होते हैं। अनुमान है कि इसी अवधि में 8,000 वयस्कों की मृत्यु भी इसी वायरस के कारण होती है, क्योंकि यह संक्रमण रोगियों के हृदय पर दबाव बढ़ाता है और हृदय से संबंधित जटिलताओं का कारण हो सकती है। अधिकारियों ने सभी लोगों को इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है।
हल्के से गंभीर तक हो सकते हैं इसके लक्षण
एनएचएस इंग्लैंड की मुख्य मिडवाइफरी अधिकारी केट ब्रिंटवर्थ ने कहा, ज्यादातर वयस्कों में आरएसवी केवल हल्के, सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण पैदा करता है, हालांकि वृद्ध और छोटे बच्चों में यह गंभीर सांस संबंधित समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान टीका लगवाना आपके बच्चे को जन्म से ही सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है।
अब समय आ गया है कि सभी माएं वैक्सीनेशन के बारे में डॉक्टर की सलाह लें, ताकि इस सर्दी के शुरुआती कुछ महीनों से पहले ही अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें, क्योंकि इसी दौरान सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं।
संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन जरूरी
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गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण कराने की सलाह
पिछले हफ़्ते, यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (यूकेएचएसए) द्वारा प्रकाशित आंकड़ों से यह भी पता चला है कि गर्भवती महिलाओं का अगर टीकाकरण हो जाता है तो ये उनके बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने से लगभग तीन-चौथाई (72 प्रतिशत) तक बचा सकता है। टीकाकरण के बाद गर्भवती के शरीर में उत्पादित एंटीबॉडी गर्भ में ही उनके बच्चों तक पहुंच जाती हैं, जो जन्म के बाद पहले छह महीनों तक उनकी सुरक्षा दे सकती हैं।
आरएसवी वायरस से बचाव की सलाह
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इस संक्रमण से कैसे बचें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एक बार आरएसवी होने के बाद, आप दोबारा संक्रमित हो सकते हैं। यह भी संभव है कि यह उसी सीजन में हो, हालांकि, लक्षण आमतौर पर उतने गंभीर नहीं होते। वैक्सीनेशन के साथ लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव आपको इस बीमारी से बचाए रखने में सहायक हो सकता है।
- अपने हाथ बार-बार धोएं। बच्चों को हाथ धोने का महत्व सिखाएं।
- संक्रमण से बचाव और इसके प्रसार को रोकने के लिए खांसते या छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें।
- तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने वाले शिशुओं में संक्रमण होने का खतरा ज़्यादा होता है और संभावित रूप से ज्यादा गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने वाले उपाय करें ताकि इस प्रकार के श्वसन रोगों का खतरा कम हो सके।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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